हर साल 29 मई को इंटरनेशनल एवरेस्ट डे मनाया जाता है। यह दिन दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को समर्पित होता है। इसी दिन 1953 में एडमंड हिलेरी और तेनजिंग नोर्गे ने पहली बार माउंट एवरेस्ट फतह किया था। लेकिन क्रिकेट की दुनिया में भी एक ऐसा नाम है जिसने मैदान के साथ-साथ दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर भी अपना झंडा गाड़ा। यह नाम है न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर एडम पारोरे का।
एडम पारोरे दुनिया के इकलौते इंटरनेशनल क्रिकेटर माने जाते हैं जिन्होंने माउंट एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचने का कारनामा किया। क्रिकेट के मैदान पर विकेटकीपर के रूप में पहचान बनाने वाले पारोरे ने यह साबित किया कि खेल के बाहर भी इंसानी जज्बा किसी भी ऊंचाई को छू सकता है।
कौन हैं एडम पारोरे?
Adam Parore न्यूजीलैंड के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज रहे हैं। उन्होंने 1990 के दशक में न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम के लिए कई मैच खेले। पारोरे अपनी तेज विकेटकीपिंग और संघर्षशील बल्लेबाजी के लिए जाने जाते थे।
उन्होंने न्यूजीलैंड के लिए टेस्ट और वनडे दोनों फॉर्मेट में क्रिकेट खेला। उस दौर में वे टीम के भरोसेमंद विकेटकीपरों में गिने जाते थे। हालांकि क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने जो किया, उसने उन्हें दुनिया भर में अलग पहचान दिला दी।
क्रिकेट से पहाड़ों तक का सफर
अक्सर खिलाड़ी रिटायरमेंट के बाद कोचिंग, कमेंट्री या बिजनेस की तरफ जाते हैं। लेकिन एडम पारोरे ने एडवेंचर का रास्ता चुना। उन्हें पहाड़ों और ट्रैकिंग का काफी शौक था। धीरे-धीरे उन्होंने प्रोफेशनल क्लाइंबिंग की तैयारी शुरू की।
माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई दुनिया की सबसे कठिन चुनौतियों में गिनी जाती है। वहां ऑक्सीजन की कमी, बर्फीले तूफान और बेहद कठिन मौसम जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे में किसी पूर्व क्रिकेटर का एवरेस्ट फतह करना लोगों के लिए हैरानी की बात बन गया।
2011 में किया एवरेस्ट फतह
रिपोर्ट्स के मुताबिक एडम पारोरे ने साल 2011 में माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने का कारनामा किया था। उन्होंने यह कठिन मिशन नेपाल की तरफ से शुरू किया था। कई दिनों की कठिन चढ़ाई और ट्रेनिंग के बाद वे आखिरकार दुनिया की सबसे ऊंची चोटी तक पहुंचने में सफल रहे। यह उपलब्धि इसलिए भी खास मानी गई क्योंकि इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाला कोई दूसरा खिलाड़ी अब तक यह कारनामा नहीं कर पाया है।
माउंट एवरेस्ट क्यों है इतनी मुश्किल चुनौती?
Mount Everest दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी है जिसकी ऊंचाई करीब 8,848 मीटर मानी जाती है। यहां तापमान कई बार माइनस 40 डिग्री तक पहुंच जाता है। ऊपर जाते-जाते ऑक्सीजन का स्तर बेहद कम हो जाता है।
इसी वजह से एवरेस्ट पर चढ़ाई करना सिर्फ शारीरिक ही नहीं, बल्कि मानसिक परीक्षा भी माना जाता है। हर साल दुनिया भर से हजारों लोग एवरेस्ट फतह करने की कोशिश करते हैं, लेकिन हर किसी को सफलता नहीं मिलती।
क्रिकेटरों के लिए क्यों अलग है यह उपलब्धि?
क्रिकेट एक अलग तरह का खेल है जिसमें फिटनेस तो जरूरी होती है, लेकिन एवरेस्ट क्लाइंबिंग जैसी अत्यधिक सहनशक्ति की जरूरत नहीं पड़ती। इसी वजह से एडम पारोरे की उपलब्धि को खास माना जाता है। उन्होंने यह दिखाया कि अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो खिलाड़ी अपने खेल से बाहर भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
इंटरनेशनल एवरेस्ट डे क्यों मनाया जाता है?
29 मई 1953 को Edmund Hillary और Tenzing Norgay ने पहली बार माउंट एवरेस्ट की चोटी पर सफलतापूर्वक पहुंचकर इतिहास रचा था। इसी उपलब्धि की याद में हर साल 29 मई को इंटरनेशनल एवरेस्ट डे मनाया जाता है। यह दिन साहस, रोमांच और इंसानी जज्बे का प्रतीक माना जाता है।
सोशल मीडिया पर फिर चर्चा में आए एडम पारोरे
इंटरनेशनल एवरेस्ट डे के मौके पर सोशल मीडिया पर एडम पारोरे का नाम फिर चर्चा में आ गया। कई क्रिकेट फैंस उनकी तस्वीरें और उपलब्धियां शेयर कर रहे हैं।कुछ यूजर्स ने उन्हें ‘क्रिकेट का असली एडवेंचर मैन’ तक कह दिया। कई लोगों का कहना है कि मैदान के बाहर भी खिलाड़ियों की जिंदगी कितनी प्रेरणादायक हो सकती है, यह पारोरे की कहानी दिखाती है।
खेल और एडवेंचर का अनोखा मेल
आज के समय में कई खिलाड़ी एडवेंचर स्पोर्ट्स में दिलचस्पी दिखाते हैं। कोई स्काईडाइविंग करता है तो कोई बाइकिंग और ट्रैकिंग का शौक रखता है। लेकिन माउंट एवरेस्ट फतह करना बिल्कुल अलग स्तर की उपलब्धि मानी जाती है। इसमें महीनों की तैयारी, फिटनेस और मानसिक मजबूती की जरूरत होती है।
न्यूजीलैंड का पर्वतारोहण से खास रिश्ता
दिलचस्प बात यह है कि एडमंड हिलेरी भी न्यूजीलैंड से थे और एडम पारोरे भी न्यूजीलैंड के खिलाड़ी रहे।न्यूजीलैंड का पर्वतारोहण और एडवेंचर स्पोर्ट्स से हमेशा खास रिश्ता रहा है। यही वजह है कि वहां एडवेंचर कल्चर काफी मजबूत माना जाता है।
खिलाड़ियों के लिए फिटनेस की नई मिसाल
आज के दौर में खिलाड़ी फिटनेस को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हैं। क्रिकेटरों के लिए भी अब सिर्फ बल्लेबाजी और गेंदबाजी ही नहीं, बल्कि ओवरऑल फिटनेस काफी अहम हो चुकी है। एडम पारोरे की कहानी यह दिखाती है कि सही ट्रेनिंग और अनुशासन से इंसान खेल के बाहर भी बड़ी चुनौतियां पार कर सकता है।
दुनिया में बढ़ रहा एडवेंचर स्पोर्ट्स का क्रेज
पिछले कुछ वर्षों में ट्रैकिंग, पर्वतारोहण और एडवेंचर टूरिज्म का क्रेज तेजी से बढ़ा है। लोग अब सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि चुनौतीपूर्ण अनुभव लेने के लिए भी पहाड़ों की तरफ जा रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञ कहते हैं कि बिना सही ट्रेनिंग और तैयारी के ऐसी जगहों पर जाना खतरनाक हो सकता है।
हमारी राय
एडम पारोरे की कहानी सिर्फ क्रिकेट या पर्वतारोहण की कहानी नहीं, बल्कि इंसानी जज्बे और हिम्मत की मिसाल है। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर पहुंचना आसान नहीं माना जाता, और जब कोई क्रिकेटर ऐसा कर दिखाए तो यह उपलब्धि और भी खास बन जाती है। इंटरनेशनल एवरेस्ट डे सिर्फ पर्वतारोहण का उत्सव नहीं, बल्कि यह याद दिलाने का दिन भी है कि मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर इंसान किसी भी ऊंचाई तक पहुंच सकता है।









