भारतीय क्रिकेट के दिग्गज कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की जिंदगी पर बनी फिल्म 'एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी' बॉलीवुड की सबसे सफल बायोपिक फिल्मों में गिनी जाती है। साल 2016 में रिलीज हुई इस फिल्म ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई की, बल्कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के करियर को भी नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया। M.S. Dhoni: The Untold Story में सुशांत ने धोनी का किरदार इतनी खूबसूरती से निभाया कि आज भी लोग उनकी परफॉर्मेंस को याद करते हैं।
लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म में धोनी का रोल निभाने की इच्छा सबसे पहले बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार यानी Akshay Kumar ने जताई थी। हालांकि, निर्देशक Neeraj Pandey ने उन्हें इस भूमिका के लिए मना कर दिया। आखिर ऐसा क्यों हुआ और सुशांत सिंह राजपूत इस फिल्म के लिए पहली पसंद कैसे बने? आइए जानते हैं पूरी कहानी।
अक्षय कुमार खुद निभाना चाहते थे धोनी का किरदार
जब महेंद्र सिंह धोनी की बायोपिक पर काम शुरू हुआ, तब अक्षय कुमार इस फिल्म का हिस्सा बनना चाहते थे। उन्होंने खुद निर्देशक नीरज पांडे से इस भूमिका के लिए बात भी की थी। उस समय दोनों फिल्म बेबी में साथ काम कर चुके थे और उनके बीच अच्छी समझ भी थी।
लेकिन नीरज पांडे ने बेहद साफ शब्दों में अक्षय कुमार से कहा कि वह इस किरदार के लिए फिट नहीं बैठते। निर्देशक का मानना था कि अक्षय कुमार का व्यक्तित्व और लुक महेंद्र सिंह धोनी से मेल नहीं खाता। बाद में खुद अक्षय कुमार ने भी एक इंटरव्यू में इस बात का जिक्र किया था और कहा था कि निर्देशक के फैसले का उन्होंने सम्मान किया।
आखिर क्यों चुने गए सुशांत सिंह राजपूत?
जब नीरज पांडे कलाकार की तलाश कर रहे थे, तब उनकी नजर सुशांत सिंह राजपूत पर गई। दिलचस्प बात यह है कि उस समय सुशांत ने बहुत ज्यादा फिल्में भी नहीं की थीं। इसके बावजूद निर्देशक को लगा कि वही धोनी के किरदार के साथ सबसे ज्यादा न्याय कर पाएंगे।
एक बड़ी वजह यह भी थी कि सुशांत और धोनी दोनों का संबंध पूर्वी भारत से था। धोनी झारखंड के रांची से हैं, जबकि सुशांत का परिवार बिहार से जुड़ा था। नीरज पांडे को लगा कि सुशांत उस क्षेत्र की भाषा, लहजे और माहौल को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे। यही कारण था कि उन्होंने शुरू से ही सुशांत को अपनी पहली पसंद माना।
किरदार के लिए सुशांत ने की थी जबरदस्त मेहनत
धोनी का रोल निभाना आसान नहीं था। सिर्फ चेहरा मिल जाना काफी नहीं था, बल्कि उनकी चाल, बल्लेबाजी का अंदाज, विकेटकीपिंग, हेलीकॉप्टर शॉट और मैदान पर शांत रहने की शैली को भी हूबहू अपनाना जरूरी था।
इसके लिए सुशांत सिंह राजपूत ने करीब 13 महीने तक लगातार ट्रेनिंग की। उन्होंने क्रिकेट की बारीकियां सीखीं और पूर्व भारतीय विकेटकीपर किरण मोरे से विशेष प्रशिक्षण लिया। उन्होंने घंटों नेट्स पर अभ्यास किया ताकि स्क्रीन पर उनका हर शॉट बिल्कुल असली धोनी जैसा लगे। यही मेहनत फिल्म में साफ दिखाई भी दी। कई दर्शकों को लगा कि स्क्रीन पर सचमुच महेंद्र सिंह धोनी ही बल्लेबाजी कर रहे हैं।
धोनी ने भी दिया था पूरा सहयोग
इस बायोपिक की सबसे खास बात यह रही कि महेंद्र सिंह धोनी ने खुद फिल्म के निर्माण में सहयोग दिया। उन्होंने निर्देशक नीरज पांडे से कई बार मुलाकात की और अपनी जिंदगी से जुड़े कई ऐसे किस्से साझा किए, जिनके बारे में आम लोग नहीं जानते थे।
हालांकि धोनी ने फिल्म की स्क्रिप्ट नहीं लिखी, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा था कि उनकी कहानी को बढ़ा-चढ़ाकर न दिखाया जाए। उनकी इच्छा थी कि फिल्म में वही दिखाया जाए जो उनकी जिंदगी में वास्तव में हुआ। इसी वजह से फिल्म दर्शकों को काफी वास्तविक और भावनात्मक लगी।
बॉक्स ऑफिस पर बनी बड़ी हिट
30 सितंबर 2016 को रिलीज हुई 'एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी' को दर्शकों का शानदार प्यार मिला। फिल्म ने भारत ही नहीं, विदेशों में भी बेहतरीन कमाई की। फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत के अलावा Kiara Advani, Disha Patani, Anupam Kher और Bhumika Chawla ने भी अहम भूमिकाएं निभाईं। दर्शकों को फिल्म की कहानी, भावनात्मक दृश्य और प्रेरणादायक सफर काफी पसंद आया।
सुशांत के करियर की सबसे यादगार फिल्म बनी
सुशांत सिंह राजपूत ने अपने करियर में कई बेहतरीन फिल्में कीं, लेकिन 'एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी' उनकी सबसे चर्चित फिल्मों में से एक मानी जाती है। इस फिल्म ने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई। क्रिकेट प्रेमियों के साथ-साथ फिल्म समीक्षकों ने भी उनकी अभिनय क्षमता की जमकर तारीफ की। धोनी के हावभाव, मुस्कान, शांत स्वभाव और बल्लेबाजी शैली को जिस तरह उन्होंने पर्दे पर उतारा, उसे आज भी उनकी सर्वश्रेष्ठ परफॉर्मेंस में गिना जाता है।
अगर अक्षय कुमार होते तो क्या फिल्म वैसी ही बन पाती?
यह सवाल आज भी कई लोगों के मन में आता है। अक्षय कुमार शानदार अभिनेता हैं और उन्होंने कई बायोपिक फिल्मों में बेहतरीन काम किया है। लेकिन नीरज पांडे का मानना था कि धोनी के किरदार के लिए सिर्फ अच्छा अभिनेता होना काफी नहीं था, बल्कि चेहरा, व्यक्तित्व और स्क्रीन प्रेजेंस भी धोनी जैसी लगनी चाहिए। निर्देशक ने अपने विजन के मुताबिक सुशांत को चुना और उनका फैसला सही साबित हुआ। फिल्म की सफलता और सुशांत की परफॉर्मेंस ने यह दिखा दिया कि यह कास्टिंग कहानी की सबसे बड़ी ताकतों में से एक थी।
आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है यह फिल्म
रिलीज के कई साल बाद भी 'एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी' क्रिकेट प्रेमियों की पसंदीदा फिल्मों में शामिल है। जब भी महेंद्र सिंह धोनी की बात होती है, इस फिल्म का जिक्र जरूर होता है। धोनी के संघर्ष, रेलवे में टिकट कलेक्टर की नौकरी, भारतीय टीम में जगह बनाने की कहानी और 2011 विश्व कप जीतने तक का सफर आज भी लोगों को प्रेरित करता है। यही वजह है कि यह फिल्म सिर्फ एक स्पोर्ट्स बायोपिक नहीं, बल्कि सपनों को सच करने की कहानी भी मानी जाती है।
हमारी राय
किसी भी बायोपिक की सबसे बड़ी ताकत उसकी सही कास्टिंग होती है। महेंद्र सिंह धोनी जैसे लोकप्रिय खिलाड़ी का किरदार निभाना किसी भी अभिनेता के लिए बड़ी चुनौती थी। अक्षय कुमार की इच्छा के बावजूद निर्देशक नीरज पांडे ने अपनी सोच पर भरोसा किया और सुशांत सिंह राजपूत को चुना।
आज फिल्म की सफलता और सुशांत की दमदार परफॉर्मेंस को देखकर कहा जा सकता है कि यह फैसला बिल्कुल सही साबित हुआ। इस फिल्म ने न सिर्फ धोनी के संघर्ष को पर्दे पर जीवंत किया, बल्कि सुशांत सिंह राजपूत को भी हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार परफॉर्मेंस में से एक देने का मौका दिया।









