बॉलीवुड के दो दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और अनुपम खेर अपनी शानदार एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं। दोनों ने कई फिल्मों में ऐसा काम किया है जिसे आज भी याद किया जाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों से इन दोनों कलाकारों के बीच रिश्ते पहले जैसे नहीं रहे। इसकी वजह फिल्मों से ज्यादा उनके राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अलग-अलग विचार माने जाते हैं।

हाल ही में एक बार फिर दोनों के बीच जुड़ा विवाद चर्चा में आ गया। सोशल मीडिया से लेकर मनोरंजन जगत तक इस मुद्दे पर काफी बातें हो रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर इन दोनों दिग्गज कलाकारों के बीच दूरी कैसे बढ़ी और पूरा मामला क्या है?

 

ताजा विवाद कैसे शुरू हुआ?

हाल के दिनों में नसीरुद्दीन शाह ने एक इंटरव्यू में कुछ राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखी। इसी दौरान उन्होंने अभिनेता अनुपम खेर के बयानों और सार्वजनिक रुख पर भी टिप्पणी की। इसके बाद अनुपम खेर ने भी सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी।

अनुपम खेर ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार है, लेकिन किसी की सोच या देशभक्ति पर सवाल उठाना सही नहीं है। उनके इस जवाब के बाद दोनों कलाकारों के बीच बयानबाजी एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई। 

 

पहले भी हो चुका है आमना-सामना

यह पहली बार नहीं है जब दोनों कलाकारों के बीच सार्वजनिक रूप से मतभेद सामने आए हों। इससे पहले भी कई मौकों पर नसीरुद्दीन शाह और अनुपम खेर अलग-अलग मुद्दों पर एक-दूसरे से असहमत नजर आए हैं। दोनों ने कई बार मीडिया इंटरव्यू और सोशल मीडिया के जरिए अपनी-अपनी बात रखी है। हालांकि इन मतभेदों के बावजूद दोनों ने हमेशा एक-दूसरे की अभिनय क्षमता की तारीफ भी की है।

 

पॉलिटिक्स बनी सबसे बड़ी वजह

फिल्म इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि दोनों कलाकारों के बीच सबसे बड़ा अंतर उनकी राजनीतिक सोच को लेकर है। नसीरुद्दीन शाह कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते रहे हैं। वहीं अनुपम खेर भी राष्ट्रीय मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं और कई बार सरकार के समर्थन में अपनी बात रखते हैं। यही वजह है कि दोनों के विचार अक्सर एक-दूसरे से बिल्कुल अलग दिखाई देते हैं।

 

फिल्मों में साथ किया है काम

दिलचस्प बात यह है कि व्यक्तिगत मतभेदों से पहले दोनों कलाकार कई फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं। दोनों ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई यादगार भूमिकाएं निभाईं और दर्शकों का भरपूर प्यार हासिल किया। अभिनय के मामले में दोनों की अपनी अलग पहचान है और इंडस्ट्री में उनका बड़ा सम्मान भी है।

 

सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस

दोनों अभिनेताओं के बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई। कुछ लोग नसीरुद्दीन शाह के विचारों का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई लोग अनुपम खेर के पक्ष में अपनी राय रख रहे हैं। वहीं बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जो मानते हैं कि दोनों कलाकारों को अपने विचार रखने का पूरा अधिकार है, लेकिन बहस सम्मानजनक तरीके से होनी चाहिए।

 

फैंस भी हुए दो हिस्सों में

इस विवाद का असर दोनों कलाकारों के प्रशंसकों पर भी देखने को मिला। एक तरफ नसीरुद्दीन शाह के समर्थक उनकी बेबाक राय की तारीफ कर रहे हैं, तो दूसरी ओर अनुपम खेर के प्रशंसक उनके जवाब को सही बता रहे हैं। हालांकि कई लोगों का कहना है कि दोनों कलाकारों ने भारतीय सिनेमा को बहुत कुछ दिया है, इसलिए उनके मतभेदों को व्यक्तिगत दुश्मनी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

 

अभिनय के क्षेत्र में दोनों का बड़ा योगदान

नसीरुद्दीन शाह को भारतीय समानांतर सिनेमा के सबसे बेहतरीन अभिनेताओं में गिना जाता है। उन्होंने थिएटर, फिल्म और टेलीविजन तीनों माध्यमों में शानदार काम किया है। वहीं अनुपम खेर ने भी कॉमेडी, इमोशनल और निगेटिव किरदारों से लेकर अंतरराष्ट्रीय फिल्मों तक अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने सैकड़ों फिल्मों में काम किया है और कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय सिनेमा का प्रतिनिधित्व भी किया है।

 

क्या आगे खत्म हो सकता है विवाद?

फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि दोनों कलाकार अपने विचार बदलने वाले हैं। दोनों अपने-अपने नजरिए पर कायम दिखाई देते हैं। हालांकि फिल्म इंडस्ट्री में कई बार ऐसा हुआ है कि लंबे समय तक मतभेद रहने के बाद भी कलाकार साथ काम करते नजर आए हैं। इसलिए भविष्य में दोनों के रिश्तों में सुधार की संभावना से पूरी तरह इनकार भी नहीं किया जा सकता।

 

असहमति होना गलत नहीं

लोकतांत्रिक समाज में अलग-अलग विचार होना सामान्य बात है। किसी भी मुद्दे पर दो लोगों की राय अलग हो सकती है। जरूरी यह है कि असहमति को सम्मानजनक तरीके से व्यक्त किया जाए। सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के बयान लाखों लोगों तक पहुंचते हैं, इसलिए उनकी भाषा और व्यवहार का असर भी व्यापक होता है।

 

हमारी राय

नसीरुद्दीन शाह और अनुपम खेर दोनों भारतीय सिनेमा के बेहद सम्मानित और अनुभवी कलाकार हैं। उनके राजनीतिक और सामाजिक विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन इससे उनके अभिनय और भारतीय सिनेमा में दिए गए योगदान की अहमियत कम नहीं होती। किसी भी लोकतंत्र में अलग-अलग राय होना स्वाभाविक है और हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है।

दर्शकों के लिए भी जरूरी है कि वे किसी विवाद को सिर्फ सोशल मीडिया की बहस तक सीमित न रखें, बल्कि तथ्यों के आधार पर अपनी राय बनाएं। कला और कलाकार का मूल्यांकन उनके काम से होना चाहिए, जबकि वैचारिक मतभेदों पर चर्चा सम्मानजनक और संयमित तरीके से होनी चाहिए।