हाल ही में BSNL के सैटेलाइट फोन को लेकर काफी चर्चा हो रही है। खबरों के मुताबिक, सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL ने सैटेलाइट फोन सेवा शुरू की है, जिससे उन इलाकों में भी संपर्क किया जा सकेगा जहां मोबाइल टावर का नेटवर्क नहीं पहुंचता। हालांकि, इस खबर के बाद लोगों के मन में कई सवाल उठने लगे हैं। क्या कोई भी सैटेलाइट फोन खरीद सकता है? क्या इसे इस्तेमाल करने के लिए सरकार की अनुमति चाहिए? और आखिर यह सामान्य मोबाइल फोन से कितना अलग होता है? अगर आपके मन में भी ऐसे सवाल हैं, तो आइए आसान भाषा में समझते हैं कि सैटेलाइट फोन क्या है, यह कैसे काम करता है और भारत में इसके इस्तेमाल को लेकर क्या नियम हैं।
क्या होता है सैटेलाइट फोन?
सामान्य मोबाइल फोन कॉल करने के लिए पास के मोबाइल टावर से जुड़ता है। लेकिन सैटेलाइट फोन का तरीका बिल्कुल अलग होता है। यह फोन सीधे पृथ्वी के ऊपर मौजूद संचार उपग्रह (सैटेलाइट) से जुड़ता है। यही वजह है कि जहां मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह गायब हो, वहां भी यह फोन काम कर सकता है। यानी अगर आप किसी ऊंचे पहाड़ी इलाके, समुद्र के बीच, घने जंगल या दूर-दराज के ऐसे क्षेत्र में हैं जहां मोबाइल टावर नहीं हैं, तब भी सैटेलाइट फोन के जरिए संपर्क किया जा सकता है।
BSNL का सैटेलाइट फोन क्यों चर्चा में है?
BSNL ने हाल ही में अपना सैटेलाइट फोन पेश किया है। इसकी कीमत करीब 1.34 लाख रुपये बताई गई है। हालांकि यह सेवा फिलहाल आम लोगों के लिए नहीं है।रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से सुरक्षा एजेंसियां, आपदा प्रबंधन विभाग, सरकारी अधिकारी और ऐसे संस्थान करेंगे जिन्हें नेटवर्क न होने वाली जगहों पर भी लगातार संपर्क बनाए रखना पड़ता है। यह सेवा Inmarsat सैटेलाइट नेटवर्क के जरिए काम करेगी।
क्या कोई भी खरीद सकता है?
यही सबसे बड़ा सवाल है। फिलहाल भारत में सैटेलाइट फोन आम मोबाइल फोन की तरह बाजार से खरीदकर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसके लिए सरकार के नियमों का पालन करना जरूरी होता है। भारत में केवल सरकार द्वारा स्वीकृत सैटेलाइट सेवाओं का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। बिना अनुमति किसी भी सैटेलाइट फोन का उपयोग करना कानूनी परेशानी खड़ी कर सकता है।
भारत में क्या हैं नियम?
भारत में सैटेलाइट फोन के इस्तेमाल पर सुरक्षा कारणों से सख्त नियम बनाए गए हैं। दूरसंचार विभाग (DoT) की अनुमति के बिना सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। खासतौर पर Thuraya और Iridium जैसे कई विदेशी सैटेलाइट नेटवर्क के उपकरणों के उपयोग पर भारत में प्रतिबंध या कड़े नियंत्रण हैं। केवल अधिकृत सेवाओं का ही उपयोग किया जा सकता है।
नियम इतने सख्त क्यों हैं?
सैटेलाइट फोन सीधे उपग्रह से जुड़ता है, इसलिए यह सामान्य मोबाइल नेटवर्क पर निर्भर नहीं रहता। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अगर ऐसे उपकरण बिना नियंत्रण के इस्तेमाल होने लगें, तो निगरानी और सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। यही वजह है कि भारत समेत कई देशों में इनके इस्तेमाल पर नियम बनाए गए हैं।
किन लोगों के लिए सबसे ज्यादा उपयोगी?
सैटेलाइट फोन का सबसे ज्यादा इस्तेमाल उन जगहों पर होता है जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता, जैसे, सेना और सुरक्षा बल, आपदा राहत और बचाव दल, पर्वतारोहण अभियान, समुद्री जहाज, दूरदराज के सरकारी अधिकारी, सीमावर्ती क्षेत्र में काम करने वाली एजेंसियां, प्राकृतिक आपदा आने पर जब मोबाइल टावर बंद हो जाते हैं, तब सैटेलाइट फोन काफी मददगार साबित हो सकता है।
क्या इसमें इंटरनेट भी चलता है?
कुछ आधुनिक सैटेलाइट फोन केवल कॉल ही नहीं, बल्कि सीमित डेटा और मैसेजिंग की सुविधा भी देते हैं।हालांकि इनकी इंटरनेट स्पीड सामान्य 4G या 5G नेटवर्क जैसी नहीं होती। इनका मुख्य उद्देश्य इमरजेंसी कम्युनिकेशन और जरूरी संपर्क बनाए रखना होता है।
कीमत इतनी ज्यादा क्यों?
सामान्य स्मार्टफोन की तुलना में सैटेलाइट फोन काफी महंगे होते हैं। इसकी वजह यह है कि इनमें इस्तेमाल होने वाली तकनीक अलग होती है। साथ ही इनकी सेवा के लिए सैटेलाइट नेटवर्क का उपयोग किया जाता है, जिसकी लागत भी ज्यादा होती है। इसके अलावा कॉल और सेवा शुल्क भी सामान्य मोबाइल कनेक्शन की तुलना में अधिक हो सकता है।
विदेश से लाना भी आसान नहीं
अगर कोई व्यक्ति विदेश से सैटेलाइट फोन लेकर भारत आता है, तो भी उसे नियमों का पालन करना होगा। ऐसे उपकरण को कस्टम विभाग में घोषित करना पड़ सकता है और दूरसंचार विभाग की अनुमति भी जरूरी हो सकती है। बिना वैध अनुमति ऐसे उपकरण लाने या इस्तेमाल करने पर कार्रवाई हो सकती है।
क्या भविष्य में आम लोगों तक पहुंचेगी यह सुविधा?
दुनियाभर में सैटेलाइट कम्युनिकेशन तेजी से आगे बढ़ रहा है। कई कंपनियां मोबाइल फोन में भी सैटेलाइट आधारित इमरजेंसी मैसेजिंग जैसी सुविधाएं जोड़ रही हैं। भारत में भी भविष्य में ऐसी तकनीक का दायरा बढ़ सकता है। हालांकि सुरक्षा और लाइसेंसिंग से जुड़े नियमों को देखते हुए यह पूरी तरह सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगा।
हमारी राय
सैटेलाइट फोन उन इलाकों के लिए बेहद उपयोगी तकनीक है जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करता। आपदा, सेना, सीमावर्ती क्षेत्रों और दूर-दराज के इलाकों में यह जीवनरक्षक संचार माध्यम साबित हो सकता है। लेकिन भारत में इसके इस्तेमाल को लेकर सख्त नियम लागू हैं और बिना अनुमति इसका उपयोग करना कानूनी मुश्किलें पैदा कर सकता है।
अगर भविष्य में यह तकनीक आम लोगों तक पहुंचती है, तो दूरदराज के क्षेत्रों में संचार व्यवस्था और मजबूत हो सकती है। फिलहाल अगर कोई व्यक्ति सैटेलाइट फोन खरीदने या इस्तेमाल करने की सोच रहा है, तो उसे पहले सरकार के मौजूदा नियमों और आवश्यक अनुमतियों की पूरी जानकारी जरूर लेनी चाहिए।









