आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में तिरुमाला की सात पहाड़ियों पर बसा तिरुपति बालाजी (श्री वेंकटेश्वर स्वामी) मंदिर न सिर्फ भारत का बल्कि दुनिया का सबसे प्रसिद्ध और सबसे ज्यादा देखा जाने वाला धार्मिक स्थल है। यह मंदिर सबसे अमीर हिंदू मंदिरों की सूची में भी पहले स्थान पर है। तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) द्वारा संचालित इस मंदिर की कुल संपत्ति 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बताई जाती है। इसमें सोने-चांदी के आभूषण, बैंक में जमा राशि, कीमती हीरे-जवाहरात और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। इतनी बड़ी संपत्ति होने के बावजूद मंदिर की लोकप्रियता सिर्फ धन से नहीं, बल्कि भक्तों की अटूट श्रद्धा, पौराणिक कथाओं और अनोखे रहस्यों से जुड़ी है। हर साल करोड़ों भक्त यहां पहुंचते हैं और सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होने का विश्वास लेकर लौटते हैं।
मंदिर की संपत्ति का मुख्य आधार: भक्तों का दान और हुंडी में आने वाली राशि
मंदिर की अपार संपत्ति का सबसे बड़ा स्रोत भक्तों का दान है। टीटीडी के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2024 में 2.55 करोड़ से ज्यादा भक्तों ने तिरुमाला के दर्शन किए। इन दर्शनों के दौरान हुंडी में 1,365 करोड़ रुपये से ज्यादा का दान आया। नवंबर 2024 से अक्टूबर 2025 तक की अवधि में दान की कुल राशि 918 करोड़ रुपये से ज्यादा रही, जिसमें ऑनलाइन दान 579 करोड़ और ऑफलाइन दान 339 करोड़ रुपये थे। रोजाना औसतन 50 हजार से ज्यादा भक्त दर्शन के लिए आते हैं और त्योहारों या खास मौकों पर यह संख्या कई लाखों तक पहुंच जाती है।
हुंडी में आने वाला पैसा मंदिर के रखरखाव, भक्तों की सुविधाओं और सामाजिक कल्याण कार्यों में लगता है। टीटीडी कई अस्पताल, स्कूल, कॉलेज और अन्य संस्थान चलाता है। मंदिर परिसर में आने वाले भक्तों को मुफ्त भोजन (अन्नदानम), आवास और दर्शन की व्यवस्था भी इसी दान से होती है। दान की राशि गरीबों की मदद, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आपदा राहत कार्यों में इस्तेमाल होती है। टीटीडी ने पिछले कुछ सालों में कई बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए हैं, जैसे नई सड़कें, रेलवे स्टेशन का विस्तार और पर्यावरण संरक्षण कार्य। ये सब दान की राशि से ही संभव हो पाते हैं।
बाल दान की परंपरा: करोड़ों का अनोखा कारोबार
तिरुपति बालाजी मंदिर की संपत्ति में बाल दान का बहुत बड़ा योगदान है। भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने पर यहां मुंडन कराते हैं। हर साल लाखों किलो बाल इकट्ठा होते हैं। इन बालों की ई-नीलामी होती है और दुनिया भर की कंपनियां इनसे विग, हेयर एक्सटेंशन और अन्य ब्यूटी प्रोडक्ट्स बनाती हैं। पहले के आंकड़ों में एक महीने की नीलामी से 6 से 7 करोड़ रुपये तक की कमाई होती थी। आज भी यह नीलामी मंदिर की आय का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
यह परंपरा बहुत पुरानी है। भक्त मानते हैं कि मुंडन से अहंकार, बुराइयां और पाप दूर हो जाते हैं। बाल दान करने के बाद भक्त को लगता है कि उसके जीवन में नई शुरुआत हुई है। यह दान सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक महत्व रखता है। टीटीडी इन बालों की नीलामी से मिलने वाले पैसों को मंदिर के विकास और भक्तों की सुविधाओं में लगाता है।
पौराणिक कथा: कुबेर से लिया गया कर्ज और दान की परंपरा
मंदिर की इतनी बड़ी संपत्ति के पीछे एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है। मान्यता है कि भगवान वेंकटेश्वर ने माता पद्मावती से विवाह के लिए कुबेर से धन उधार लिया था। कुबेर ने इतनी बड़ी राशि दी कि विवाह भव्य तरीके से संपन्न हो सका। लेकिन उस कर्ज को चुकाने के लिए भगवान ने भक्तों से दान मांगा। इसलिए भक्त यहां दान करते हैं, ताकि कुबेर का कर्ज उतरे। इसी वजह से मंदिर में सोना, चांदी और अन्य कीमती चीजों की भरमार है। मंदिर में 10 टन से ज्यादा सोना है और बैंक में जमा राशि भी बहुत बड़ी है। यह कथा भक्तों को दान करने के लिए प्रेरित करती है। वे मानते हैं कि उनका दान भगवान के कर्ज में हिस्सा डालता है और बदले में उन्हें आशीर्वाद मिलता है।
मंदिर के सबसे बड़े और अनोखे रहस्य
तिरुपति बालाजी मंदिर के रहस्य भक्तों को सदियों से आकर्षित करते हैं। भगवान वेंकटेश्वर की मूर्ति पर लगे बाल असली हैं और कभी उलझते नहीं। वे बाल हमेशा चमकते रहते हैं। मूर्ति के पीछे से समुद्र की लहरों जैसी आवाज आती है। कई भक्त और पुरोहित इसे सुनकर चमत्कार मानते हैं।
गर्भगृह में जलने वाला अखंड दीपक सदियों से जल रहा है। कोई नहीं जानता कि इसे पहली बार किसने जलाया। यह दीपक कभी बुझता नहीं, जैसे भगवान का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है। मंदिर की पूजा में आग का महत्व बहुत है। कई रस्में यज्ञ की तरह होती हैं। मंदिर के पीछे एक गुप्त सुरंग होने की बात भी कही जाती है, जो नारायणगिरि से जुड़ी है। मूर्ति हमेशा नम रहती है और कैम्फर या सजावट से प्रभावित नहीं होती। भक्त इसे जीवंत मूर्ति मानते हैं। मंदिर में कई अन्य रहस्य भी हैं। जैसे मूर्ति का रंग हमेशा काला रहता है और इसे कोई सजावट स्थायी रूप से नहीं चिपकती। भक्त इसे भगवान की दिव्य शक्ति मानते हैं।
भक्तों की अटूट श्रद्धा: करोड़ों लोग क्यों आते हैं?
भक्त यहां इसलिए करोड़ों की संख्या में आते हैं क्योंकि उन्हें विश्वास है कि सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। यहां बाल दान करने से पाप और दुख दूर होते हैं। भगवान वेंकटेश्वर को कलियुग में प्रत्यक्ष दैवम माना जाता है। यानी कलयुग में भगवान खुद प्रकट हुए हैं और भक्तों की रक्षा करते हैं। भक्त यहां अपनी बुराइयों को छोड़कर नई शुरुआत करते हैं।
हर साल करोड़ों भक्त यहां आते हैं और अपनी कहानी लेकर लौटते हैं। मंदिर की अपार संपत्ति दान से आती है और रहस्य भक्तों को बार-बार खींचते हैं। तिरुपति बालाजी मंदिर सिर्फ धार्मिक जगह नहीं है। यह श्रद्धा, विश्वास और चमत्कार का केंद्र है। सदियों से यह मंदिर दुनिया में सबसे ज्यादा लोकप्रिय है।









