गर्मी का मौसम आते ही सबसे बड़ी परेशानी घर के अंदर बढ़ता तापमान बन जाता है। कई बार हालात ऐसे हो जाते हैं कि पंखा भी गर्म हवा देने लगता है। खासकर जिन घरों की छत सीधे धूप झेलती है, वहां दोपहर और शाम के समय कमरे भट्टी जैसे महसूस होने लगते हैं। हर किसी के लिए हर वक्त AC चलाना भी आसान नहीं होता क्योंकि बिजली का बिल जेब पर भारी पड़ता है। ऐसे में लोग ऐसे उपाय तलाशते हैं जिनसे बिना ज्यादा खर्च किए घर को थोड़ा ठंडा रखा जा सके। 

दरअसल घर के अंदर बढ़ती गर्मी की सबसे बड़ी वजह छत मानी जाती है। दिनभर सूरज की सीधी धूप छत पर पड़ती रहती है और वही गर्मी धीरे-धीरे पूरे कमरे में फैल जाती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ भी कहते हैं कि अगर छत को गर्म होने से रोक लिया जाए, तो घर का तापमान काफी हद तक कम किया जा सकता है।

 

आखिर छत इतनी ज्यादा गर्म क्यों हो जाती है?

गर्मी के मौसम में सूरज की किरणें सीधे छत पर पड़ती हैं। सीमेंट और कंक्रीट की छतें गर्मी को तेजी से सोख लेती हैं। फिर यही गर्मी धीरे-धीरे कमरे के अंदर उतरती रहती है। 

कई बार रात में भी कमरे गर्म रहते हैं क्योंकि छत दिनभर की गर्मी को लंबे समय तक छोड़ती रहती है। जिन घरों में ऊपरी मंजिल होती है, वहां रहने वाले लोगों को यह समस्या ज्यादा महसूस होती है। यही वजह है कि अब लोग ‘रूफ कूलिंग’ यानी छत को ठंडा रखने वाले तरीकों पर ज्यादा ध्यान देने लगे हैं।

 

सफेद पेंट या कूल रूफ कोटिंग क्यों हो रही लोकप्रिय?

इन दिनों कई लोग अपनी छत पर सफेद पेंट या खास तरह की ‘कूल रूफ कोटिंग’ करवा रहे हैं। इसका कारण यह है कि हल्के रंग सूरज की गर्मी को कम सोखते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक सफेद या रिफ्लेक्टिव कोटिंग छत के तापमान को काफी हद तक कम कर सकती है। इससे कमरे अंदर से थोड़े ठंडे महसूस होते हैं और AC का इस्तेमाल भी कम करना पड़ सकता है। हालांकि अच्छी क्वालिटी की कोटिंग करवाने में शुरुआती खर्च जरूर आता है, लेकिन लंबे समय में इससे बिजली की बचत हो सकती है।

 

छत पर पानी डालना कितना असरदार?

भारत में पुराने समय से लोग गर्मियों में छत पर पानी डालते रहे हैं। आज भी कई घरों में शाम के समय छत पर पानी छिड़कने का तरीका अपनाया जाता है। जब गर्म छत पर पानी डाला जाता है, तो उसका तापमान कुछ समय के लिए कम हो जाता है। इससे कमरे के अंदर भी थोड़ी राहत महसूस होती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि पानी की बर्बादी से बचना जरूरी है। जिन इलाकों में पानी की कमी हो, वहां यह तरीका रोज अपनाना सही नहीं माना जाता।

 

मिट्टी और घास का इस्तेमाल भी हो रहा ट्रेंड में

कुछ लोग अब छत पर मिट्टी की परत या कृत्रिम घास लगाने जैसे उपाय भी अपना रहे हैं। इसका मकसद छत को सीधे धूप से बचाना होता है। ग्रामीण इलाकों में पहले मिट्टी की छतें और टाइल्स ज्यादा इस्तेमाल होती थीं, इसलिए घर अंदर से अपेक्षाकृत ठंडे रहते थे। लेकिन अब कंक्रीट के घर बढ़ने के साथ गर्मी की समस्या भी बढ़ी है। शहरी इलाकों में लोग छोटे-छोटे रूफ गार्डन भी बना रहे हैं। पौधे और हरियाली छत की गर्मी कम करने में मदद करते हैं।

 

पर्दे और वेंटिलेशन भी निभाते हैं बड़ा रोल

कई लोग सिर्फ पंखा या AC पर ध्यान देते हैं, लेकिन घर का वेंटिलेशन भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। अगर कमरे में हवा आने-जाने का रास्ता सही हो, तो गर्मी कम महसूस होती है। दिन के समय खिड़कियों पर मोटे पर्दे लगाने से भी धूप और गर्म हवा को रोका जा सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि दोपहर में खिड़कियां बंद रखना और शाम को खुली हवा आने देना ज्यादा असरदार हो सकता है।

 

क्या बिना AC सच में घर ठंडा रखा जा सकता है?

यह पूरी तरह मौसम, घर की बनावट और इलाके पर निर्भर करता है। बहुत ज्यादा गर्मी वाले शहरों में बिना AC पूरी राहत मिलना मुश्किल हो सकता है। लेकिन कुछ घरेलू उपाय अपनाकर कमरे का तापमान जरूर कम किया जा सकता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अगर छत, खिड़कियां और वेंटिलेशन सही तरीके से मैनेज किए जाएं, तो घर का तापमान कई डिग्री तक कम महसूस हो सकता है। यानी छोटे-छोटे उपाय भी गर्मी में बड़ा फर्क पैदा कर सकते हैं।

 

बिजली बिल से परेशान लोग खोज रहे विकल्प

आजकल बिजली के बढ़ते बिल भी लोगों की चिंता का बड़ा कारण बन गए हैं। लगातार AC चलाने से कई परिवारों का मासिक खर्च काफी बढ़ जाता है। इसी वजह से लोग अब ऐसे विकल्प ढूंढ रहे हैं जिनसे बिजली की खपत कम हो और घर भी थोड़ा ठंडा रहे। सोशल मीडिया पर भी ‘लो कॉस्ट कूलिंग टिप्स’ काफी वायरल हो रहे हैं। YouTube और Instagram पर लोग अलग-अलग घरेलू जुगाड़ दिखाते रहते हैं। हालांकि हर तरीका साइंटिफिक रूप से असरदार हो, यह जरूरी नहीं होता।

 

शहरों में बढ़ती गर्मी भी बनी वजह

विशेषज्ञों के मुताबिक शहरों में कंक्रीट और कम हरियाली की वजह से ‘हीट आइलैंड इफेक्ट’ बढ़ रहा है। यानी शहर आसपास के इलाकों की तुलना में ज्यादा गर्म महसूस होने लगे हैं। बड़ी इमारतें, सीमेंट की सड़कें और कम पेड़-पौधे गर्मी को और बढ़ा देते हैं। ऐसे में घरों को ठंडा रखना पहले की तुलना में ज्यादा चुनौती बनता जा रहा है।

 

क्या सरकारें भी कर रही हैं काम?

देश के कई राज्यों में अब ‘कूल रूफ’ प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू हो चुका है। कुछ शहरों में सफेद छतों और हरित छतों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर बड़े स्तर पर इस दिशा में काम किया जाए, तो शहरों का तापमान कम करने में मदद मिल सकती है।

 

हमारी राय

गर्मी से राहत पाने के लिए सिर्फ AC ही एकमात्र रास्ता नहीं है। घर की छत, वेंटिलेशन और छोटे घरेलू उपाय भी तापमान कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि हर उपाय हर घर में समान रूप से काम करे, यह जरूरी नहीं है। लेकिन अगर लोग थोड़ी समझदारी और सही तरीकों का इस्तेमाल करें, तो बिना ज्यादा खर्च किए भी गर्मियों को थोड़ा आसान बनाया जा सकता है। साथ ही पर्यावरण और बिजली बचत के लिहाज से भी ऐसे उपाय भविष्य में काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।