सनातन धर्म में हर तिथि और पर्व का अपना अलग महत्व माना जाता है, लेकिन कुछ योग ऐसे होते हैं जिन्हें बेहद दुर्लभ और खास माना जाता है। ऐसा ही एक संयोग है भानु सप्तमी का। जब सप्तमी तिथि रविवार के दिन पड़ती है तो उसे भानु सप्तमी कहा जाता है। चूंकि रविवार और सप्तमी दोनों ही भगवान सूर्य को समर्पित माने जाते हैं, इसलिए यह दिन सूर्य उपासना के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इस बार इसकी खास बात यह है कि भानु सप्तमी अधिकमास में पड़ रही है, जिसकी वजह से इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास को भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना जाता है और इस दौरान किए गए जप, तप, दान और पूजा का विशेष फल मिलता है। ऐसे में अधिकमास में आने वाली भानु सप्तमी को लेकर श्रद्धालुओं के बीच खास उत्साह देखने को मिल रहा है। माना जाता है कि इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से जीवन में ऊर्जा, सफलता, स्वास्थ्य और आत्मविश्वास का आशीर्वाद मिलता है।
कब मनाई जाएगी अधिकमास भानु सप्तमी?
पंचांग के अनुसार अधिकमास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि 7 जून 2026 को तड़के 2 बजकर 40 मिनट से शुरू होगी और 8 जून को सुबह 3 बजकर 24 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर भानु सप्तमी का पर्व 7 जून, रविवार को मनाया जाएगा। यही वजह है कि इस बार रविवार और सप्तमी तिथि का विशेष संयोग बन रहा है।
ज्योतिष और धर्मशास्त्रों में उदया तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है। इसलिए जिस दिन सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि मौजूद रहती है, उसी दिन व्रत और पूजा का पालन किया जाता है।
आखिर भानु सप्तमी इतनी खास क्यों मानी जाती है?
भानु सप्तमी का संबंध सीधे भगवान सूर्य से माना जाता है। सूर्य देव को हिंदू धर्म में प्रत्यक्ष देवता कहा गया है, क्योंकि वे ऐसे देव हैं जिन्हें हर दिन देखा जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि भानु सप्तमी के दिन ही सूर्य देव ने अपने रथ पर सवार होकर पृथ्वी पर अवतार लिया था। इसी कारण इस दिन को सूर्य जयंती के रूप में भी देखा जाता है।
कई धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में सूर्य को जीवन, प्रकाश, ऊर्जा और चेतना का स्रोत बताया गया है। माना जाता है कि सूर्य की कृपा से व्यक्ति को मान-सम्मान, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि भानु सप्तमी के दिन सूर्य पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
अधिकमास में आने से क्यों बढ़ गया इसका महत्व?
अधिकमास हर साल नहीं आता। यह लगभग तीन साल में एक बार आता है और इसे बेहद पुण्यदायी महीना माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस महीने में किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में जब भानु सप्तमी जैसे सूर्य पूजा के विशेष पर्व का संयोग अधिकमास में बनता है तो श्रद्धालु इसे और भी शुभ मानते हैं।
धर्म विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिन सूर्य उपासना करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता बढ़ सकती है। कई लोग इस दिन विशेष व्रत रखते हैं और दान-पुण्य भी करते हैं।
भानु सप्तमी पर कैसे की जाती है सूर्य पूजा?
भानु सप्तमी के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठना शुभ माना जाता है। स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य देने के लिए तांबे के लोटे में जल भरकर उसमें लाल फूल, अक्षत और थोड़ा-सा रोली मिलाने की परंपरा भी कई जगहों पर देखने को मिलती है।
मान्यता है कि अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्रों का जाप करने से पूजा का फल बढ़ जाता है। कई श्रद्धालु इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र, गायत्री मंत्र और सूर्याष्टक का पाठ भी करते हैं। कुछ परंपराओं में सात आक के पत्ते और सात बेर का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इन्हें पूजा में शामिल करने से आरोग्यता और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
सूर्य पूजा को स्वास्थ्य से भी जोड़कर देखा जाता है
धार्मिक मान्यताओं के अलावा सूर्य उपासना को स्वास्थ्य के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। सुबह की धूप को शरीर के लिए लाभकारी बताया जाता है। कई योग और आयुर्वेद विशेषज्ञ भी सुबह सूर्य के सामने ध्यान और सूर्य नमस्कार करने की सलाह देते हैं।
सोशल मीडिया और धार्मिक समुदायों में भी कई लोग मानते हैं कि नियमित सूर्य उपासना से मानसिक मजबूती और सकारात्मक सोच विकसित होती है। कुछ श्रद्धालु इसे आत्मविश्वास बढ़ाने और जीवन में अनुशासन लाने से भी जोड़कर देखते हैं। हालांकि इन मान्यताओं को आस्था और व्यक्तिगत विश्वास के रूप में ही देखा जाता है।
इस दिन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भानु सप्तमी के दिन देर तक सोना शुभ नहीं माना जाता। सूर्योदय से पहले उठकर स्नान और पूजा करने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा इस दिन तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन से दूर रहने की परंपरा भी बताई गई है।
धर्मग्रंथों में यह भी कहा गया है कि इस दिन गुरुजनों, माता-पिता और बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए। कई परंपराओं में क्रोध, विवाद और नकारात्मक सोच से बचने की भी सलाह दी जाती है।
ज्योतिष में क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है सूर्य?
वैदिक ज्योतिष में सूर्य को आत्मा, आत्मविश्वास, पिता, सरकार, नेतृत्व और प्रतिष्ठा का कारक ग्रह माना गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य कमजोर हो तो उसे आत्मविश्वास की कमी, करियर में रुकावट या सम्मान से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
इसी वजह से कई ज्योतिषाचार्य रविवार और भानु सप्तमी के दिन सूर्य पूजा करने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि इससे व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत हो सकती है।
हमारी राय
अधिकमास में आने वाली भानु सप्तमी को धार्मिक दृष्टि से बेहद शुभ माना जा रहा है। आस्था रखने वाले लोगों के लिए यह दिन सूर्य देव की आराधना, आत्मचिंतन और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का अवसर हो सकता है। हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि पूजा-पाठ और व्रत का महत्व व्यक्ति की श्रद्धा और विश्वास से जुड़ा होता है। अगर कोई व्यक्ति इस दिन सूर्य को अर्घ्य देता है, अनुशासित दिनचर्या अपनाता है और सकारात्मक सोच के साथ जीवन में आगे बढ़ने का संकल्प लेता है, तो यह उसके मानसिक और आध्यात्मिक जीवन पर अच्छा प्रभाव डाल सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य को ऊर्जा और जीवन का प्रतीक माना गया है, इसलिए भानु सप्तमी को केवल एक पर्व नहीं बल्कि प्रकाश, अनुशासन और सकारात्मकता के संदेश के रूप में भी देखा जा सकता है।









