भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच हुआ कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) अब लागू हो चुका है। इस समझौते को दोनों देशों के बीच अब तक के सबसे बड़े व्यापारिक समझौतों में से एक माना जा रहा है। इस डील के लागू होने के बाद जहां भारत के कई उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में आसान पहुंच मिलेगी, वहीं भारत में ब्रिटिश कारों और प्रीमियम शराब पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी भी चरणबद्ध तरीके से कम होगी। सरकार का मानना है कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा, निवेश आएगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

 

क्या है भारत-UK CETA?

CETA यानी Comprehensive Economic and Trade Agreement एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को आसान बनाना, आयात-निर्यात पर लगने वाली कई शुल्क बाधाओं को कम करना और कारोबार को बढ़ावा देना है। करीब तीन साल तक चली बातचीत के बाद यह समझौता लागू हुआ है। इसके तहत कई सेक्टरों को फायदा मिलने की उम्मीद है। 

 

भारतीय एक्सपोर्ट को मिलेगा बड़ा फायदा

इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारतीय निर्यातकों को मिलने वाला है। करीब 99 प्रतिशत भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में ड्यूटी-फ्री या बेहद कम शुल्क के साथ पहुंच मिलेगी। इससे कपड़ा, चमड़ा, जेम्स एंड ज्वेलरी, इंजीनियरिंग सामान, समुद्री उत्पाद, फूड प्रोडक्ट्स और फार्मास्यूटिकल्स जैसे सेक्टरों का कंपटीशन बढ़ेगा। इससे भारतीय कंपनियों के लिए ब्रिटेन में कारोबार करना पहले के मुकाबले आसान हो जाएगा। 

 

ब्रिटिश कारें हो सकती हैं सस्ती

इस ट्रेड डील की सबसे ज्यादा चर्चा ऑटोमोबाइल सेक्टर को लेकर हो रही है। समझौते के तहत ब्रिटेन से आने वाली कुछ कारों पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी चरणबद्ध तरीके से कम की जाएगी। हालांकि यह सुविधा तय कोटा (TRQ) के तहत ही मिलेगी और सभी गाड़ियों पर एक साथ लागू नहीं होगी। सरकार ने इसके लिए अलग नियम भी जारी किए हैं ताकि घरेलू ऑटो इंडस्ट्री पर ज्यादा असर न पड़े। 

 

प्रीमियम शराब भी होगी सस्ती

अगर आप स्कॉच व्हिस्की या ब्रिटिश जिन जैसी प्रीमियम शराब खरीदते हैं, तो आने वाले समय में इनकी कीमतों में भी कमी देखने को मिल सकती है। समझौते के तहत इन उत्पादों पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी धीरे-धीरे कम की जाएगी। हालांकि कीमत में कितनी कमी आएगी, यह टैक्स, राज्य सरकारों की नीतियों और कंपनियों की प्राइसिंग पर भी निर्भर करेगा। 

 

भारतीय प्रोफेशनल्स को भी मिलेगा फायदा

यह समझौता सिर्फ सामान के व्यापार तक सीमित नहीं है। आईटी सेक्टर, प्रोफेशनल सर्विसेज और कुछ अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले भारतीयों को भी बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच सामाजिक सुरक्षा (Double Contribution Convention) से जुड़े प्रावधानों में भी राहत दी गई है, जिससे विदेश में काम करने वाले कुछ पेशेवरों को फायदा मिल सकता है। 

 

सरकार को क्यों है इस समझौते से उम्मीद?

सरकार का मानना है कि इस समझौते से भारत का निर्यात बढ़ेगा, विदेशी निवेश आकर्षित होगा और घरेलू उद्योगों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलेगी। ब्रिटेन दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे में वहां भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ने से कई उद्योगों को नई रफ्तार मिल सकती है। 

 

किन सेक्टरों पर रहेगा सबसे ज्यादा असर?

एक्सपर्ट्स के अनुसार इस समझौते का सबसे ज्यादा असर इन सेक्टरों पर पड़ सकता है—

  • ऑटोमोबाइल
  • टेक्सटाइल
  • लेदर
  • जेम्स एंड ज्वेलरी
  • फूड प्रोसेसिंग
  • फार्मास्यूटिकल्स
  • आईटी और सर्विस सेक्टर
  • प्रीमियम बेवरेज

इन क्षेत्रों में कारोबार बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

 

क्या सभी चीजें तुरंत सस्ती हो जाएंगी?

नहीं। कई लोगों को लगता है कि समझौता लागू होते ही कारें और शराब काफी सस्ती हो जाएंगी, लेकिन ऐसा तुरंत नहीं होगा। कई प्रावधान चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे। कुछ मामलों में कोटा सिस्टम लागू रहेगा और कई उत्पादों पर शुल्क धीरे-धीरे कम होगा। इसलिए कीमतों में बदलाव भी समय के साथ दिखाई देगा। 

 

घरेलू उद्योग का भी रखा गया है ध्यान

सरकार ने इस समझौते में भारत के संवेदनशील क्षेत्रों का भी ध्यान रखा है। कुछ उत्पादों को पूरी तरह शुल्क मुक्त नहीं किया गया है और ऑटो सेक्टर में कोटा आधारित व्यवस्था रखी गई है, ताकि घरेलू कंपनियों को अचानक प्रतिस्पर्धा का सामना न करना पड़े। इसके अलावा नियमों में "रूल्स ऑफ ओरिजिन" जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं ताकि किसी तीसरे देश के उत्पाद गलत तरीके से इस समझौते का फायदा न उठा सकें। 

 

भारत और UK के रिश्ते होंगे मजबूत

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। इससे दोनों देशों के बीच निवेश, तकनीक, सेवाओं और उद्योगों में सहयोग भी बढ़ेगा। आने वाले सालों में दोनों देशों के बीच व्यापार का स्तर पहले के मुकाबले काफी अधिक होने की उम्मीद जताई जा रही है। 

 

हमारी राय

भारत-UK CETA दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे भारतीय निर्यातकों को नए अवसर मिलेंगे, जबकि कुछ ब्रिटिश उत्पाद भारतीय ग्राहकों के लिए पहले से सस्ते हो सकते हैं। हालांकि इसका पूरा असर एक दिन में नहीं दिखेगा, क्योंकि कई प्रावधान चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे।

अगर आप कार खरीदने की योजना बना रहे हैं या अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े हैं, तो इस समझौते पर नजर रखना फायदेमंद रहेगा। आने वाले महीनों में इसके असर का सबसे स्पष्ट प्रभाव ऑटोमोबाइल, एक्सपोर्ट और प्रीमियम आयातित उत्पादों के बाजार में देखने को मिल सकता है।