जिन परिवारों में शादी की तैयारियां रुकी हुई हैं, उनके लिए अच्छी खबर है। जून 2026 के मध्य में मलमास यानी अधिकमास समाप्त होने जा रहा है और इसके साथ ही एक बार फिर शहनाइयां बजने लगेंगी। पिछले एक महीने से जिन घरों में शादी, सगाई, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लगा हुआ था, वहां अब तैयारियां तेज होने वाली हैं। लेकिन इस बार एक दिलचस्प स्थिति भी है। मलमास खत्म होने के बाद शादी के लिए ज्यादा लंबा समय नहीं मिलेगा क्योंकि जुलाई के अंत में चातुर्मास शुरू हो जाएगा। ऐसे में शादी की योजना बना रहे परिवारों के पास सीमित मुहूर्त ही उपलब्ध रहेंगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मलमास को भगवान विष्णु की उपासना का महीना माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, दान, जप और तप को विशेष महत्व दिया जाता है, लेकिन विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। यही कारण है कि लाखों लोग मलमास समाप्त होने का इंतजार करते हैं।
आखिर क्या होता है मलमास?
हिंदू पंचांग में जब किसी चंद्र मास के दौरान सूर्य का राशि परिवर्तन नहीं होता तो उस महीने को अधिकमास या मलमास कहा जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह महीना बेहद पवित्र माना जाता है, लेकिन सांसारिक और मांगलिक कार्यों के लिए इसे उपयुक्त नहीं माना जाता।
इसी वजह से इस दौरान विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन और नामकरण जैसे शुभ कार्य स्थगित कर दिए जाते हैं। हालांकि पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए यह महीना अत्यंत शुभ माना जाता है।
कब खत्म होगा मलमास?
साल 2026 में मलमास 15 जून को समाप्त हो रहा है। इसके बाद विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों पर लगी रोक हट जाएगी। लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर शादी समारोहों की रौनक देखने को मिलेगी।
शादी उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि मलमास समाप्त होते ही बैंक्वेट हॉल, होटल, मैरिज गार्डन और कैटरिंग सेवाओं की मांग अचानक बढ़ सकती है। क्योंकि कई परिवार पहले से ही तारीखों का इंतजार कर रहे हैं।
जून 2026 में कब-कब हैं शादी के शुभ मुहूर्त?
मलमास खत्म होने के बाद जून महीने में शादी के लिए कई शुभ तिथियां उपलब्ध हैं। 21 जून से विवाह मुहूर्तों की शुरुआत होगी। इसके बाद 22, 23, 24, 25, 26, 27 और 29 जून को भी विवाह के शुभ संयोग बन रहे हैं। यानी जून के आखिरी दिनों में लगातार कई शुभ तिथियां उपलब्ध रहेंगी। यही वजह है कि इन तारीखों पर शादी समारोहों की संख्या काफी अधिक रहने की संभावना है। जो परिवार इस दौरान विवाह करना चाहते हैं, उन्हें पहले से तैयारी शुरू करनी पड़ सकती है।
जुलाई में कितने दिन मिलेंगे शादी के लिए?
जुलाई 2026 में भी कुछ महत्वपूर्ण विवाह मुहूर्त उपलब्ध हैं। 1 जुलाई, 6 जुलाई, 7 जुलाई, 11 जुलाई और 12 जुलाई को विवाह के लिए शुभ समय माना गया है। हालांकि जुलाई में मुहूर्तों की संख्या जून की तुलना में कम है। इसलिए जिन परिवारों की शादी जुलाई में प्रस्तावित है, उन्हें उपलब्ध तारीखों के अनुसार योजना बनानी होगी।
फिर शुरू हो जाएगा चातुर्मास
मलमास समाप्त होने की खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं रहने वाली क्योंकि 25 जुलाई 2026 से चातुर्मास शुरू हो जाएगा। देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और इसी के साथ चातुर्मास की शुरुआत मानी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास के दौरान विवाह और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। यह अवधि लगभग चार महीने तक चलती है। इसके बाद देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के साथ फिर से शादी-विवाह का दौर शुरू होता है।
भड़ली नवमी को क्यों माना जाता है खास?
चातुर्मास शुरू होने से पहले भड़ली नवमी का विशेष महत्व होता है। इसे अबूझ मुहूर्त कहा जाता है। यानी इस दिन किसी अलग मुहूर्त की जरूरत नहीं मानी जाती और विवाह समेत कई शुभ कार्य किए जा सकते हैं।बसंत पंचमी, अक्षय तृतीया और देवउठनी एकादशी की तरह भड़ली नवमी को भी बेहद शुभ माना जाता है। यही वजह है कि कई परिवार इस दिन विवाह करना पसंद करते हैं।
इस बार भड़ली नवमी पर क्यों नहीं होंगे विवाह?
हालांकि इस साल स्थिति थोड़ी अलग है। 22 जुलाई 2026 को भड़ली नवमी पड़ रही है, लेकिन ज्योतिषीय कारणों से इस दिन विवाह नहीं होंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समय गुरु तारा अस्त रहेगा, जिसके कारण विवाह के लिए यह दिन उपयुक्त नहीं माना गया है। यानी जिस दिन को सामान्य तौर पर अबूझ मुहूर्त माना जाता है, उस दिन भी इस वर्ष शादी नहीं की जाएगी। यह बात कई लोगों के लिए हैरानी की वजह बन सकती है।
शादी उद्योग को मिलेगा बड़ा फायदा
जून और जुलाई के सीमित मुहूर्तों के कारण शादी उद्योग में अचानक तेजी आने की संभावना है। होटल, मैरिज हॉल, डेकोरेशन कंपनियां, कैटरर्स और बैंड-बाजा व्यवसाय से जुड़े लोग पहले से तैयारियां कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि लगातार कई शुभ तिथियां होने के कारण जून के अंतिम सप्ताह में विवाह समारोहों की संख्या काफी ज्यादा रह सकती है। इससे स्थानीय कारोबार को भी अच्छा फायदा मिल सकता है।
परिवारों के सामने क्या चुनौती होगी?
इस बार सबसे बड़ी चुनौती सीमित समय की है। मलमास खत्म होने के बाद और चातुर्मास शुरू होने से पहले मुश्किल से कुछ ही सप्ताह का समय मिलेगा। ऐसे में शादी की तैयारी, स्थल बुकिंग, खानपान और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर जल्दबाजी भी देखने को मिल सकती है। जो परिवार पहले से तैयारी कर चुके हैं, उनके लिए स्थिति आसान रहेगी। लेकिन जो लोग अंतिम समय में योजना बनाएंगे, उन्हें तारीख और व्यवस्था दोनों को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
हमारी राय
मलमास के समाप्त होने के साथ ही शादी-ब्याह का सीजन फिर से शुरू होने जा रहा है और लाखों परिवारों को इसका इंतजार था। हालांकि इस बार खुशी के साथ थोड़ी जल्दबाजी भी जुड़ी हुई है क्योंकि जुलाई के अंत में चातुर्मास शुरू हो जाएगा। जून और जुलाई में उपलब्ध सीमित मुहूर्तों के कारण शादी उद्योग में काफी व्यस्तता देखने को मिल सकती है। यदि आपके घर में भी शादी की तैयारी चल रही है तो तारीखों को लेकर देर करने के बजाय समय रहते योजना बनाना बेहतर रहेगा। वहीं धार्मिक मान्यताओं में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अगले चार महीनों तक फिर विवाह जैसे मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा।









