आज के समय में ईमेल सिर्फ मैसेज भेजने का जरिया नहीं रह गया है। नौकरी के ऑफर, बैंकिंग अपडेट, सरकारी नोटिस, स्कूल-कॉलेज की जानकारी, ऑनलाइन शॉपिंग के अपडेट और ऑफिस के जरूरी दस्तावेज तक ईमेल के जरिए ही आते हैं। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि जिस ईमेल का हमें सबसे ज्यादा इंतजार होता है, वही Gmail के स्पैम फोल्डर में पहुंच जाता है। नतीजा यह होता है कि जरूरी जानकारी समय पर नहीं मिल पाती और कई बार बड़ा नुकसान भी हो सकता है।
हाल के दिनों में कई Gmail यूजर्स ने शिकायत की है कि उनके महत्वपूर्ण ईमेल सीधे स्पैम फोल्डर में जा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि कई बार यूजर किसी ईमेल को 'Not Spam' भी मार्क कर देता है, लेकिन फिर भी उसी सेंडर के अगले ईमेल स्पैम में पहुंच जाते हैं। Gmail की ओर से भी इस समस्या को लेकर कुछ समाधान बताए गए हैं, जिनकी मदद से इस परेशानी को काफी हद तक दूर किया जा सकता है।
आखिर Gmail जरूरी ईमेल को स्पैम क्यों समझ लेता है?
Gmail का पूरा सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर काम करता है। इसका मकसद यूजर्स को फिशिंग, धोखाधड़ी और अनचाहे ईमेल से बचाना होता है। लेकिन कभी-कभी यही सिस्टम किसी असली और जरूरी ईमेल को भी गलती से स्पैम मान लेता है। अगर सेंडर आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में नहीं है, पहले कभी उसके ईमेल को स्पैम मार्क किया गया है या Gmail को किसी वजह से ईमेल संदिग्ध लगता है, तो वह उसे सीधे स्पैम फोल्डर में भेज सकता है।
रेडिट और Gmail कम्युनिटी फोरम पर भी कई यूजर्स ने बताया है कि स्कूल, ऑफिस और न्यूजलेटर जैसे वैध स्रोतों से आने वाले ईमेल भी कभी-कभी स्पैम में पहुंच जाते हैं। ऐसे मामलों में Gmail को दोबारा यह सिखाना पड़ता है कि कौन-से ईमेल भरोसेमंद हैं।
स्टेप 1: स्पैम फोल्डर से ईमेल निकालकर ‘Not Spam’ करें
अगर कोई जरूरी ईमेल पहले से स्पैम फोल्डर में पड़ा हुआ है तो सबसे पहले उसे वहां से निकालना जरूरी है। कई यूजर सिर्फ ईमेल पढ़ लेते हैं लेकिन उसे स्पैम से बाहर नहीं निकालते। इससे Gmail को यह संकेत नहीं मिलता कि वह ईमेल सुरक्षित है।
इसके लिए Gmail में Spam फोल्डर खोलें और संबंधित ईमेल को चुनें। इसके बाद ‘Not Spam’ विकल्प पर क्लिक करें। ऐसा करने से ईमेल वापस इनबॉक्स में आ जाएगा और Gmail भविष्य में उस तरह के ईमेल को बेहतर तरीके से पहचानने लगेगा। Google का कहना है कि जब यूजर किसी ईमेल को 'Not Spam' मार्क करता है तो सिस्टम उसकी पसंद को सीखता है और भविष्य में उसी हिसाब से ईमेल को वर्गीकृत करता है।
हालांकि कई विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि सिर्फ एक बार ऐसा करना काफी नहीं होता। अगर किसी खास सेंडर के ईमेल लगातार स्पैम में जा रहे हों तो कुछ बार' Not Spam' मार्क करने से Gmail का सिस्टम बेहतर तरीके से सीखता है।
स्टेप 2: भरोसेमंद सेंडर को कॉन्टैक्ट्स में जोड़ें
Gmail में किसी ईमेल एड्रेस को कॉन्टैक्ट्स में सेव करना एक बेहद आसान लेकिन असरदार तरीका माना जाता है। जब आप किसी सेंडर को अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट में जोड़ते हैं तो Gmail को यह संकेत मिलता है कि आप उस व्यक्ति या संस्था को जानते हैं और उसके ईमेल आपके लिए महत्वपूर्ण हैं।
अगर आपको किसी बैंक, कंपनी, स्कूल, कॉलेज या ऑफिस से नियमित रूप से ईमेल आते हैं तो उनके आधिकारिक ईमेल एड्रेस को Google Contacts में सेव कर लेना चाहिए। Google की सपोर्ट गाइडलाइन भी यही सलाह देती है कि भरोसेमंद सेंडर्स को कॉन्टैक्ट्स में जोड़ने से उनके ईमेल के स्पैम में जाने की संभावना काफी कम हो जाती है।
रेडिट पर कई यूजर्स ने भी बताया कि सिर्फ कॉन्टैक्ट्स में ईमेल एड्रेस जोड़ने से उनकी समस्या काफी हद तक हल हो गई। खासकर उन मामलों में जहां किसी एक ही सेंडर के ईमेल बार-बार स्पैम में जा रहे थे।
स्टेप 3: Gmail में फिल्टर बनाकर ‘Never Send to Spam’ सेट करें
अगर किसी खास सेंडर के ईमेल आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, तो Gmail का फिल्टर फीचर सबसे मजबूत समाधान माना जाता है। इसकी मदद से आप Gmail को स्पष्ट निर्देश दे सकते हैं कि किसी विशेष ईमेल एड्रेस से आने वाले संदेश कभी भी स्पैम में न भेजे जाएं।
इसके लिए Gmail की Settings में जाएं और 'Filters and Blocked Addresses' सेक्शन खोलें। यहां ‘Create a New Filter’ पर क्लिक करें। जिस सेंडर के ईमेल को सुरक्षित रखना चाहते हैं, उसका ईमेल एड्रेस डालें और आगे बढ़ें। इसके बाद ‘Never Send it to Spam’ ऑप्शन को चुनकर फिल्टर सेव कर दें।
इस सेटिंग के बाद Gmail उस सेंडर के भविष्य के ईमेल को सीधे इनबॉक्स में पहुंचाने की कोशिश करेगा। कई तकनीकी एक्सपर्ट्स भी इसे सबसे प्रभावी उपाय मानते हैं, खासकर तब जब किसी खास कंपनी, संस्थान या व्यक्ति के ईमेल बार-बार स्पैम में पहुंच रहे हों।
मोबाइल यूजर्स भी कर सकते हैं ये काम
अक्सर लोगों को लगता है कि ये सभी सेटिंग्स सिर्फ कंप्यूटर पर ही की जा सकती हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। Android और iPhone पर Gmail ऐप के जरिए भी स्पैम फोल्डर में जाकर ईमेल को ‘Not Spam’ मार्क किया जा सकता है। इसके अलावा Google Contacts ऐप की मदद से किसी भी सेंडर को कॉन्टैक्ट लिस्ट में जोड़ा जा सकता है। हालांकि फिल्टर बनाने का विकल्प मोबाइल पर थोड़ा सीमित हो सकता है, इसलिए इसके लिए वेब ब्राउजर या कंप्यूटर का इस्तेमाल ज्यादा सुविधाजनक माना जाता है।
सेंडर की गलती भी हो सकती है वजह
कई बार समस्या यूजर की तरफ नहीं बल्कि ईमेल भेजने वाले की तरफ होती है। अगर किसी कंपनी या वेबसाइट के ईमेल सर्वर सही तरीके से कॉन्फिगर नहीं किए गए हैं, तो Gmail उन्हें संदिग्ध मान सकता है। तकनीकी विशेषज्ञों के मुताबिक SPF, DKIM और DMARC जैसी सुरक्षा सेटिंग्स सही न होने पर वैध ईमेल भी स्पैम में पहुंच सकते हैं। यही वजह है कि कई बार एक ही कंपनी के ईमेल कुछ लोगों के इनबॉक्स में पहुंचते हैं जबकि दूसरों के स्पैम फोल्डर में चले जाते हैं।
हमारी राय
Gmail का स्पैम फिल्टर दुनिया के सबसे उन्नत सिस्टम में से एक माना जाता है, लेकिन कोई भी तकनीक सौ फीसदी परफेक्ट नहीं होती। अगर आपके जरूरी ईमेल स्पैम में जा रहे हैं तो घबराने की जरूरत नहीं है। ‘Not Spam’ मार्क करना, भरोसेमंद सेंडर्स को कॉन्टैक्ट्स में जोड़ना और फिल्टर बनाना जैसे तीन आसान उपाय इस समस्या को काफी हद तक खत्म कर सकते हैं। साथ ही समय-समय पर स्पैम फोल्डर भी चेक करते रहना चाहिए, क्योंकि कई बार कोई महत्वपूर्ण ईमेल वहां छिपा हुआ मिल सकता है। थोड़ी-सी सावधानी आपको नौकरी के अवसर, बैंकिंग अलर्ट या किसी जरूरी सूचना को मिस करने से बचा सकती है।









