भारत में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच अब ऑटोमोबाइल कंपनियां वैकल्पिक ईंधन पर तेजी से काम कर रही हैं। इलेक्ट्रिक और CNG के बाद अब Flex Fuel तकनीक चर्चा में है। इसी कड़ी में Tata Motors ने संकेत दिए हैं कि कंपनी 2026 के अंत तक अपनी पहली Flex Fuel SUV लॉन्च कर सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह SUV एथेनॉल आधारित ईंधन पर भी चल सकेगी। ऑटो सेक्टर के जानकारों का मानना है कि अगर यह तकनीक सफल रहती है, तो भारत के फ्यूल मार्केट और कार इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

 

आखिर क्या होती है Flex Fuel कार?

Flex Fuel Vehicle यानी FFV ऐसी गाड़ी होती है जो पेट्रोल और एथेनॉल के मिश्रण पर चल सकती है। कई Flex Fuel गाड़ियां E20 से लेकर E85 और यहां तक कि E100 तक ईंधन मिश्रण को सपोर्ट कर सकती हैं।

एथेनॉल एक बायोफ्यूल है, जिसे गन्ना, मक्का और कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसे पेट्रोल के मुकाबले अपेक्षाकृत पर्यावरण के लिए बेहतर माना जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार Flex Fuel तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि गाड़ी अलग-अलग ईंधन मिश्रण के हिसाब से खुद को एडजस्ट कर लेती है।

 

Tata की कौन-सी SUV हो सकती है पहली Flex Fuel कार?

रिपोर्ट्स के मुताबिक Tata Punch कंपनी की पहली Flex Fuel SUV बन सकती है। Tata Motors पहले ही Bharat Mobility Expo 2025 में Punch Flex Fuel कॉन्सेप्ट दिखा चुकी है। बताया जा रहा है कि इसमें 1.2 लीटर पेट्रोल इंजन का मॉडिफाइड वर्जन इस्तेमाल किया जा सकता है, जो ज्यादा एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर भी काम करेगा।हालांकि कंपनी ने अभी तक आधिकारिक लॉन्च डेट और फाइनल स्पेसिफिकेशन की पूरी जानकारी नहीं दी है।

 

सरकार क्यों दे रही है एथेनॉल पर जोर?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में विदेशों से आयात करता है। ऐसे में पेट्रोलियम आयात देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा दबाव बनाता है। सरकार पिछले कुछ सालों से एथेनॉल ब्लेंडिंग पर जोर दे रही है ताकि विदेशी तेल पर निर्भरता कम हो सके। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ज्यादा वाहन एथेनॉल आधारित ईंधन अपनाते हैं, तो इससे फ्यूल इंपोर्ट बिल कम करने में मदद मिल सकती है।

 

Flex Fuel कारें क्यों मानी जा रही हैं खास?

ऑटो उद्योग के जानकार Flex Fuel तकनीक को ‘ट्रांजिशन टेक्नोलॉजी’ मानते हैं। यानी यह पेट्रोल और पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों के बीच एक विकल्प के रूप में उभर सकती है। भारत में अभी EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर हर जगह मजबूत नहीं है। ऐसे में Flex Fuel वाहन उन लोगों के लिए विकल्प बन सकते हैं जो पारंपरिक पेट्रोल गाड़ियों से आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन EV अपनाने को लेकर अभी असमंजस में हैं।

 

क्या पेट्रोल से सस्ता होगा एथेनॉल?

विशेषज्ञों के अनुसार एथेनॉल की कीमत कई बार पेट्रोल के मुकाबले कम हो सकती है। यही वजह है कि सरकार इसे बढ़ावा दे रही है। हालांकि माइलेज का सवाल भी महत्वपूर्ण है। एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से थोड़ी कम मानी जाती है, इसलिए कुछ मामलों में माइलेज कम हो सकता है। फिर भी अगर कीमत कम रहती है, तो कुल ईंधन खर्च में राहत मिल सकती है।

 

Tata की Multi Powertrain स्ट्रेटजी 

Tata Motors फिलहाल EV, CNG, पेट्रोल और डीजल सभी सेगमेंट में मौजूद है। अब Flex Fuel तकनीक को जोड़कर कंपनी अपनी Multi Powertrain Strategy को और मजबूत करना चाहती है। Tata पहले ही भारतीय EV बाजार में मजबूत पकड़ बना चुकी है। अब कंपनी वैकल्पिक ईंधन तकनीकों पर भी फोकस बढ़ा रही है।

 

सिर्फ Tata ही नहीं, दूसरी कंपनियां भी तैयारी में

भारत में सिर्फ Tata Motors ही नहीं, बल्कि दूसरी कंपनियां भी Flex Fuel तकनीक पर काम कर रही हैं।Maruti Suzuki पहले ही WagonR और Fronx के Flex Fuel मॉडल्स को शोकेस कर चुकी है। वहीं Toyota ने भी Ethanol Hybrid तकनीक को लेकर प्रोटोटाइप पेश किए हैं। यानी आने वाले वर्षों में भारतीय बाजार में Flex Fuel गाड़ियों की संख्या बढ़ सकती है।

 

किसानों को भी हो सकता है फायदा

एथेनॉल उत्पादन मुख्य रूप से कृषि आधारित होता है। गन्ना और मक्का जैसी फसलों से एथेनॉल तैयार किया जाता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर एथेनॉल की मांग बढ़ती है, तो किसानों को भी अप्रत्यक्ष फायदा मिल सकता है। यही कारण है कि सरकार इसे ऊर्जा और कृषि दोनों से जोड़कर देख रही है।

 

क्या पूरी तरह बदल जाएगा भारतीय ऑटो बाजार?

ऑटो एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल Flex Fuel तकनीक भारत में शुरुआती दौर में है। EV की तरह इसके लिए भी इंफ्रास्ट्रक्चर और फ्यूल सप्लाई नेटवर्क मजबूत करना जरूरी होगा। अगर देशभर में E85 या E100 फ्यूल आसानी से उपलब्ध नहीं होगा, तो Flex Fuel वाहनों का फायदा सीमित रह सकता है।

 

पर्यावरण के लिए कितना बेहतर?

एथेनॉल को अपेक्षाकृत क्लीन फ्यूल माना जाता है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में कुछ हद तक मदद मिल सकती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि पर्यावरणीय प्रभाव पूरी सप्लाई चेन और उत्पादन प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

 

EV vs Flex Fuel की बहस

भारत में फिलहाल EV को भविष्य माना जा रहा है, लेकिन Flex Fuel तकनीक को भी मजबूत विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भारत में कई प्रकार की तकनीकें साथ-साथ चलेंगी। यानी EV, Hybrid, CNG और Flex Fuel सभी का मिश्रित बाजार बन सकता है।

 

आने वाले समय में क्या हो सकता है?

अगर Tata की पहली Flex Fuel SUV सफल रहती है, तो दूसरी कंपनियां भी इस सेगमेंट में तेजी से उतर सकती हैं। बढ़ती पेट्रोल कीमतों, सरकार की एथेनॉल नीति और वैकल्पिक ईंधन की मांग को देखते हुए Flex Fuel तकनीक आने वाले वर्षों में भारतीय बाजार में बड़ी भूमिका निभा सकती है।