देश में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने पर सरकार लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में E20 पेट्रोल को बढ़ावा दिया जा रहा है। E20 यानी ऐसा पेट्रोल जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिला होता है। लेकिन अब E20 को लेकर उन लोगों के लिए एक जरूरी जानकारी सामने आई है, जिनके पास 2016 से पहले बनी BS-3 गाड़ियां हैं।

संसद में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि ऐसी कुछ पुरानी BS-3 गाड़ियों में E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर कुछ रबर पार्ट्स और गैस्केट बदलने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि इसके लिए इंजन में किसी बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होगी।

 

क्या होता है E20 पेट्रोल?

E20 ऐसा ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता है। एथेनॉल गन्ने, मक्का और दूसरे कृषि उत्पादों से तैयार होने वाला बायोफ्यूल है। सरकार का मानना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, किसानों को फायदा मिलेगा और प्रदूषण भी घटेगा। भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। कई नई गाड़ियां पहले से ही E20 फ्यूल के हिसाब से तैयार की जा रही हैं।

 

किन गाड़ियों पर ज्यादा असर पड़ सकता है?

सरकार के मुताबिक, यह मामला खास तौर पर 1 अप्रैल 2005 के बाद लागू BS-3 मानकों वाली और 2016 से पहले बनी कुछ गाड़ियों से जुड़ा है। इन वाहनों में E20 पेट्रोल के लंबे इस्तेमाल के दौरान कुछ रबर के पार्ट्स और गैस्केट पर असर पड़ सकता है। हालांकि यह समस्या हर वाहन में नहीं होगी और न ही इसे बहुत बड़ी तकनीकी दिक्कत माना गया है।

 

कौन-कौन से पार्ट्स बदलने पड़ सकते हैं?

गडकरी ने संसद में बताया कि कुछ पुराने वाहनों में फ्यूल सिस्टम से जुड़े रबर कंपोनेंट्स और गैस्केट समय के साथ बदलने पड़ सकते हैं। अच्छी बात यह है कि यह काम नियमित सर्विसिंग के दौरान आसानी से किया जा सकता है। यानी इसके लिए इंजन खोलने या कोई बड़ा मैकेनिकल बदलाव करने की जरूरत नहीं होगी।

 

क्या इंजन में कोई बदलाव करना होगा?

इस सवाल को लेकर काफी समय से लोगों के मन में चिंता थी। लेकिन सरकार ने साफ किया है कि पुरानी गाड़ियों के इंजन में किसी तरह के बड़े मॉडिफिकेशन की जरूरत नहीं है। इंडियन ऑयल (IOCL), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP), SIAM और ARAI द्वारा किए गए संयुक्त अध्ययन में पाया गया कि E20 पेट्रोल के कारण इंजन की परफॉर्मेंस या टिकाऊपन पर कोई बड़ा नकारात्मक असर नहीं देखा गया।

 

क्या माइलेज कम हो जाएगा?

E20 पेट्रोल को लेकर सबसे ज्यादा सवाल माइलेज को लेकर पूछे जाते हैं। इस पर भी सरकार ने अपना पक्ष रखा है। नितिन गडकरी ने कहा कि किसी भी वाहन का माइलेज सिर्फ ईंधन के प्रकार पर निर्भर नहीं करता। ड्राइविंग स्टाइल, ट्रैफिक, सड़क की स्थिति, टायर प्रेशर, वाहन की सर्विसिंग और इंजन की हालत जैसे कई दूसरे कारण भी माइलेज को प्रभावित करते हैं। इसलिए हर माइलेज की कमी का कारण सिर्फ E20 पेट्रोल को नहीं माना जा सकता।

 

स्टडी में क्या सामने आया?

सरकार ने बताया कि इस विषय पर व्यापक परीक्षण किए गए हैं। इसमें दोपहिया और चारपहिया दोनों तरह के वाहनों को शामिल किया गया। स्टडी में पाया गया कि E20 इस्तेमाल करने पर ड्राइविंग, गाड़ी स्टार्ट होने, धातु के पार्ट्स और प्लास्टिक कंपोनेंट्स की कार्यक्षमता में कोई बड़ी समस्या नहीं मिली। साथ ही इंजन में असामान्य घिसाव भी देखने को नहीं मिला।

 

सरकार E20 को इतना बढ़ावा क्यों दे रही है?

सरकार का लक्ष्य पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना है। भारत हर साल बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है, जिस पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च होती है। अगर पेट्रोल में ज्यादा एथेनॉल मिलाया जाएगा तो आयात कम होगा। इसके अलावा एथेनॉल का उत्पादन बढ़ने से किसानों को भी फायदा मिल सकता है, क्योंकि इसे गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। साथ ही कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

 

पुराने वाहन मालिकों को क्या करना चाहिए?

अगर आपके पास 2016 से पहले की BS-3 गाड़ी है तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले अपने वाहन की नियमित सर्विस कराते रहें। अगर सर्विस सेंटर यह सलाह दे कि कुछ रबर पाइप, सील या गैस्केट बदलने की जरूरत है, तो उसे समय पर बदलवा लें। इससे भविष्य में किसी तरह की दिक्कत से बचा जा सकता है। साथ ही अपने वाहन निर्माता की सलाह का पालन करना भी जरूरी है।

 

क्या नई गाड़ियों को कोई परेशानी होगी?

नई BS-6 और E20-कंप्लायंट गाड़ियों को खास तौर पर इस ईंधन के हिसाब से डिजाइन किया गया है। ऐसे वाहनों में E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने को लेकर सरकार और वाहन निर्माता दोनों आश्वस्त हैं। यही वजह है कि अब लगभग सभी प्रमुख कंपनियां E20 के अनुकूल नए मॉडल बाजार में उतार रही हैं।

 

हमारी राय

E20 पेट्रोल को लेकर पुरानी BS-3 गाड़ियों के मालिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार और विशेषज्ञों के अनुसार इंजन में किसी बड़े बदलाव की आवश्यकता नहीं है। सिर्फ कुछ रबर पार्ट्स और गैस्केट समय के साथ बदलने पड़ सकते हैं, जिन्हें सामान्य सर्विसिंग के दौरान आसानी से बदला जा सकता है। अगर वाहन की नियमित देखभाल की जाए और समय पर सर्विस कराई जाए, तो E20 पेट्रोल का इस्तेमाल बिना किसी बड़ी परेशानी के किया जा सकता है।