ग्रेटर नोएडा और आसपास का रियल एस्टेट मार्केट इन दिनों तेजी से बदल रहा है। सबसे बड़ी वजह है नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट यानी जेवर एयरपोर्ट, जिसके शुरू होने से पहले ही पूरे इलाके में प्रॉपर्टी की कीमतों में जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। हाल ही में ग्रेटर नोएडा इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (GNIDA) ने सभी कैटेगरी की प्रॉपर्टी अलॉटमेंट रेट्स में करीब 3.5% की बढ़ोतरी कर दी है। इससे साफ संकेत मिलता है कि यहां डिमांड लगातार बढ़ रही है और आने वाले समय में यह इलाका रियल एस्टेट का बड़ा हॉटस्पॉट बनने वाला है। 

 

एयरपोर्ट की वजह से क्यों बढ़ रही है प्रॉपर्टी की मांग?

जेवर एयरपोर्ट सिर्फ एक हवाई अड्डा नहीं है, बल्कि यह पूरे NCR की तस्वीर बदलने वाला प्रोजेक्ट माना जा रहा है। जैसे-जैसे इसका काम पूरा होने के करीब पहुंच रहा है, वैसे-वैसे निवेशकों की नजर ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे कॉरिडोर पर टिक गई है। ऐसा माना जा रहा है कि एयरपोर्ट शुरू होने के बाद यहां लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा, और उसके साथ ही रहने, काम करने और बिजनेस करने की जरूरतें भी बढ़ेंगी। यही वजह है कि पहले जहां लोग इस इलाके को दूर-दराज मानते थे, अब वही लोग इसे भविष्य का “गोल्डन इन्वेस्टमेंट ज़ोन” मान रहे हैं। रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद यहां हाउसिंग, कमर्शियल और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बड़ी ग्रोथ देखने को मिल सकती है।

 

GNIDA के नए रेट्स का क्या मतलब है?

GNIDA द्वारा की गई 3.5% की बढ़ोतरी अपने आप में बहुत बड़ी नहीं लगती, लेकिन इसका संकेत बड़ा है। इसका मतलब साफ है कि अथॉरिटी को उम्मीद है कि आने वाले समय में यहां जमीन और प्रॉपर्टी की डिमांड और तेजी से बढ़ेगी। अब कमर्शियल प्रॉपर्टी के रेट करीब 98,000 रुपये प्रति वर्गमीटर तक पहुंच गए हैं, जबकि रेजिडेंशियल प्लॉट्स की कीमत भी 50,000 रुपये प्रति वर्गमीटर के आसपास हो गई है। यह बदलाव सिर्फ सरकारी रेट्स तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे मार्केट प्राइस, रजिस्ट्रेशन कॉस्ट और कुल निवेश बजट पर भी असर पड़ता है। यानी अगर कोई अब निवेश करता है, तो उसे पहले से ज्यादा पैसा लगाना होगा, लेकिन साथ ही लॉन्ग टर्म में रिटर्न की उम्मीद भी बढ़ जाती है।

 

निवेशकों की नजर क्यों ग्रेटर नोएडा पर टिकी है?

अगर पिछले कुछ सालों के ट्रेंड देखें तो ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे इलाके में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। कई रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि एयरपोर्ट के असर से यहां प्रॉपर्टी की कीमतों में 15% से लेकर 25% तक की बढ़ोतरी पहले ही हो चुकी है, और आने वाले समय में इसमें और उछाल आ सकता है। निवेशक इस इलाके को इसलिए भी पसंद कर रहे हैं क्योंकि यहां अभी भी दिल्ली और गुरुग्राम के मुकाबले प्राइस कम हैं, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से डेवलप हो रहा है। एक्सप्रेसवे, मेट्रो, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और अब एयरपोर्ट, ये सारे फैक्टर मिलकर इस पूरे क्षेत्र को एक मजबूत रियल एस्टेट हब बना रहे हैं।

 

किन-किन इलाकों में सबसे ज्यादा असर दिख रहा है?

ग्रेटर नोएडा और आसपास कई ऐसे सेक्टर्स हैं जहां एयरपोर्ट का सीधा असर दिखने लगा है। खासकर यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे, जेवर के आसपास, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और टेक जोन जैसे इलाकों में प्रॉपर्टी की डिमांड तेजी से बढ़ी है। पहले जहां लोग सिर्फ अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए यहां आते थे, अब यहां प्रीमियम प्रोजेक्ट्स भी तेजी से लॉन्च हो रहे हैं। बड़े डेवलपर्स भी अब यहां निवेश करने लगे हैं क्योंकि उन्हें लग रहा है कि आने वाले 5–10 साल में यह इलाका दिल्ली-एनसीआर का सबसे तेजी से बढ़ने वाला रियल एस्टेट मार्केट बन सकता है।

 

क्या यह सिर्फ हाइप है या असली ग्रोथ?

अक्सर लोग सोचते हैं कि एयरपोर्ट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के नाम पर सिर्फ मार्केटिंग होती है, लेकिन यहां स्थिति थोड़ी अलग है। जेवर एयरपोर्ट पहले से ही फेज़ में डेवलप हो रहा है और इसे देश के सबसे बड़े एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा है। इसके साथ-साथ सरकार की तरफ से इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स हब और एक्सप्रेसवे नेटवर्क को भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है। इसका सीधा मतलब है कि यहां सिर्फ प्रॉपर्टी नहीं, बल्कि रोजगार और बिजनेस दोनों बढ़ेंगे, और जब ऐसा होता है तो रियल एस्टेट की ग्रोथ लंबे समय तक टिकती है।

 

अभी निवेश करना सही रहेगा या इंतजार करना चाहिए?

यह सबसे बड़ा सवाल है जो हर खरीदार और निवेशक के मन में आता है। सच यह है कि अभी कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन अभी भी ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे का रेट दिल्ली और गुरुग्राम के मुकाबले काफी कम है। अगर कोई लॉन्ग टर्म सोच के साथ निवेश करता है तो उसे अच्छे रिटर्न मिल सकते हैं। लेकिन अगर कोई शॉर्ट टर्म में जल्दी प्रॉफिट की उम्मीद कर रहा है, तो उसे थोड़ा रिस्क भी समझना होगा क्योंकि रियल एस्टेट मार्केट हमेशा एक जैसा नहीं चलता।

 

किन लोगों के लिए यह सही मौका हो सकता है?

यह इलाका खासकर उन लोगों के लिए अच्छा माना जा रहा है जो पहली बार घर खरीदना चाहते हैं या लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट की सोच रहे हैं। इसके अलावा जो लोग किराये की इनकम या भविष्य में प्रॉपर्टी वैल्यू बढ़ने का फायदा लेना चाहते हैं, उनके लिए भी यह अच्छा समय माना जा रहा है। क्योंकि जब एयरपोर्ट पूरी तरह शुरू हो जाएगा, तब यहां फ्लैट्स, प्लॉट्स और कमर्शियल स्पेस की डिमांड और ज्यादा बढ़ सकती है।

 

आने वाले समय में क्या बदलाव देखने को मिल सकते हैं?

आने वाले 2–3 साल ग्रेटर नोएडा और जेवर के लिए काफी अहम रहने वाले हैं। जैसे-जैसे एयरपोर्ट चालू होगा, वैसे-वैसे यहां होटल, ऑफिस, शॉपिंग मॉल, वेयरहाउस और इंडस्ट्रियल यूनिट्स की डिमांड बढ़ेगी। इसके साथ ही किराये के मकानों की डिमांड भी बढ़ सकती है क्योंकि यहां नौकरी और बिजनेस के अवसर बढ़ेंगे। इसका सीधा असर प्रॉपर्टी की कीमतों पर पड़ेगा और रियल एस्टेट मार्केट और मजबूत हो सकता है।

 

हमारी राय

ग्रेटर नोएडा और जेवर एयरपोर्ट के आसपास का इलाका फिलहाल ट्रांजिशन फेज में है, यानी यह अभी पूरी तरह डेवलप नहीं हुआ है लेकिन तेजी से बदल रहा है। ऐसे समय में निवेश करने का फायदा यह होता है कि एंट्री प्राइस अभी भी अपेक्षाकृत कम है। लेकिन साथ ही यह भी समझना जरूरी है कि हर निवेश में समय लगता है। यहां जल्दबाजी में फैसला लेना सही नहीं होगा। अगर कोई लंबी अवधि के लिए सोचकर, सही लोकेशन और सही प्रोजेक्ट चुनकर निवेश करता है, तो आने वाले वर्षों में अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना मजबूत दिखती है।