भारत में नोटों को लेकर एक बड़ी चर्चा फिर शुरू हो गई है। वजह है रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा का हालिया बयान, जिसमें उन्होंने संकेत दिया है कि देश में पॉलीमर यानी प्लास्टिक करेंसी नोट लाने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। हालांकि अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है, लेकिन RBI के इस संकेत के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले वर्षों में भारतीयों की जेब में कागज की जगह प्लास्टिक के नोट दिखाई देंगे। 

दरअसल, प्लास्टिक नोट कोई नई अवधारणा नहीं है। दुनिया के कई देशों में ये पहले से इस्तेमाल किए जा रहे हैं। भारत में भी करीब एक दशक पहले इस दिशा में कोशिशें हुई थीं, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई। अब RBI द्वारा दोबारा इस विकल्प पर विचार किए जाने से उम्मीदें बढ़ गई हैं कि देश की मुद्रा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

 

आखिर क्या होते हैं प्लास्टिक या पॉलीमर नोट?

प्लास्टिक नोट को तकनीकी भाषा में पॉलीमर बैंकनोट कहा जाता है। ये सामान्य कागजी नोटों की तरह नहीं होते। इन्हें विशेष प्रकार की पतली और लचीली प्लास्टिक सामग्री पर छापा जाता है। देखने और इस्तेमाल करने में ये काफी हद तक सामान्य नोटों जैसे ही होते हैं, लेकिन उनकी मजबूती कहीं ज्यादा होती है। 

पॉलीमर नोट आसानी से फटते नहीं हैं, पानी से खराब नहीं होते और गंदगी का असर भी इन पर अपेक्षाकृत कम पड़ता है। यही कारण है कि इनकी उम्र कागजी नोटों से कई गुना ज्यादा मानी जाती है। 

 

RBI आखिर क्यों कर रहा है विचार?

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि प्लास्टिक नोटों को लेकर चर्चा शुरुआती स्तर पर है और अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि इसके पीछे कुछ बड़े कारण बताए जा रहे हैं। 

सबसे बड़ा कारण नोटों की बढ़ती छपाई लागत है। देश में करेंसी की मांग लगातार बढ़ रही है। बड़ी संख्या में नोट खराब भी हो जाते हैं, जिन्हें समय-समय पर वापस लेकर नए नोट छापने पड़ते हैं। ऐसे में नोट छापने पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। अगर प्लास्टिक नोट लागू होते हैं तो उनकी उम्र ज्यादा होगी और बार-बार नए नोट छापने की जरूरत कम पड़ेगी। इससे लंबे समय में लागत घट सकती है। 

 

नकली नोटों पर भी लग सकती है रोक

प्लास्टिक नोटों का एक बड़ा फायदा सुरक्षा को लेकर भी माना जाता है। इनमें कई आधुनिक सिक्योरिटी फीचर्स जोड़े जा सकते हैं, जिन्हें नकली बनाना बेहद मुश्किल होता है।

पारदर्शी विंडो, माइक्रो-ऑप्टिक फीचर्स, विशेष स्याही और कई अन्य सुरक्षा तकनीकों के कारण पॉलीमर नोट नकली नोटों की समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं। भारत में समय-समय पर नकली नोटों की समस्या सामने आती रही है। ऐसे में यह कदम सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

 

भारत पहले भी कर चुका है कोशिश

दिलचस्प बात यह है कि भारत पहली बार प्लास्टिक नोटों पर विचार नहीं कर रहा है। वर्ष 2012 में सरकार ने पॉलीमर नोटों का परीक्षण शुरू किया था। उस समय अलग-अलग मौसम और परिस्थितियों वाले पांच शहरों में ट्रायल की योजना बनाई गई थी। 

उस दौरान मुख्य उद्देश्य नोटों की उम्र बढ़ाना था। लेकिन तकनीकी और संचालन संबंधी कुछ चुनौतियों के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस समय ATM मशीनों और अन्य उपकरणों को पॉलीमर नोटों के अनुरूप ढालना आसान नहीं था। अब तकनीक पहले से कहीं अधिक उन्नत हो चुकी है। इसलिए RBI एक बार फिर इस विकल्प को गंभीरता से देख रहा है।

 

किन देशों में पहले से चल रहे हैं प्लास्टिक नोट?

दुनिया के 60 से अधिक देशों में पॉलीमर करेंसी का इस्तेमाल हो रहा है। इस सूची में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम और रोमानिया जैसे देश शामिल हैं। 

ऑस्ट्रेलिया को पॉलीमर नोटों का अग्रणी देश माना जाता है। वहां 1988 में पहली बार प्लास्टिक नोट जारी किए गए थे। इसके बाद कई देशों ने इस तकनीक को अपनाया और सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। इन देशों का अनुभव बताता है कि पॉलीमर नोट अधिक समय तक चलते हैं और नकली नोटों की चुनौती को कम करने में भी मदद करते हैं।

 

क्या सभी नोट बदल दिए जाएंगे?

फिलहाल ऐसा कोई संकेत नहीं है कि भारत एक साथ सभी कागजी नोटों को हटाकर प्लास्टिक नोट लागू कर देगा। रिपोर्ट्स के अनुसार अगर योजना आगे बढ़ती है तो शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट से की जा सकती है।

संभावना जताई जा रही है कि सबसे पहले 10 और 20 रूपए जैसे छोटे नोटों पर प्रयोग किया जा सकता है, क्योंकि ये सबसे ज्यादा इस्तेमाल होते हैं और जल्दी खराब भी हो जाते हैं। पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद ही बड़े स्तर पर निर्णय लिया जाएगा। 

 

डिजिटल पेमेंट के दौर में भी क्यों जरूरी हैं नोट?

आज UPI और डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद नकदी का महत्व खत्म नहीं हुआ है। RBI के आंकड़ों के अनुसार देश में करेंसी का उपयोग अभी भी बड़े पैमाने पर हो रहा है। छोटे व्यापारियों और ग्रामीण इलाकों में नकद लेनदेन आज भी प्रमुख माध्यम बना हुआ है। यही वजह है कि RBI मुद्रा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और किफायती बनाने के विकल्प तलाश रहा है। प्लास्टिक नोट उसी दिशा में एक संभावित कदम माना जा रहा है। 

 

हमारी राय

भारत में प्लास्टिक नोटों की चर्चा नई नहीं है, लेकिन इस बार RBI गवर्नर के संकेत के बाद मामला फिर गंभीरता से सामने आया है। पॉलीमर नोटों के कई फायदे हैं—वे ज्यादा टिकाऊ होते हैं, नकली नोटों पर रोक लगाने में मदद कर सकते हैं और लंबे समय में छपाई की लागत भी कम कर सकते हैं। हालांकि किसी भी बड़े बदलाव से पहले व्यापक परीक्षण और तकनीकी तैयारियां जरूरी होंगी। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारतीय जेबों में प्लास्टिक नोट कब आएंगे, लेकिन इतना जरूर है कि RBI इस विकल्प को गंभीरता से देख रहा है और आने वाले समय में देश की मुद्रा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।