Health Tips: रोजमर्रा की भागदौड़ में हम अक्सर शरीर के उन छोटे-छोटे संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं जो असल में कुछ बड़ा कहना चाहते हैं। ऐसा ही एक संकेत है बार-बार प्यास लगना या गला सूखते रहना। ज्यादातर लोग इसे थकान या पानी कम पीने की वजह मान लेते हैं और आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है तो यह डायबिटीज यानी मधुमेह का एक शुरुआती और बहुत अहम संकेत हो सकता है। डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जिसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। यह धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खोखला करती रहती है और अगर समय पर पहचानी न जाए तो जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसलिए बार-बार प्यास लगने जैसे मामूली लगने वाले लक्षण को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। खराब खानपान, बैठे रहने वाली जिंदगी और बढ़ता तनाव इसकी सबसे बड़ी वजहें हैं। ऐसे में जरूरी है कि हम अपने शरीर की बात सुनें और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत ध्यान दें।
Health Tips: बार-बार प्यास लगने और डायबिटीज का क्या है कनेक्शन
बार-बार प्यास लगने को मेडिकल भाषा में पॉलीडिप्सिया कहते हैं और यह डायबिटीज के सबसे पहले दिखने वाले लक्षणों में से एक है। इसके पीछे एक पूरी साइंटिफिक प्रक्रिया होती है जिसे समझना बहुत जरूरी है। जब किसी को डायबिटीज होती है तो उनके खून में शुगर यानी ब्लड शुगर का लेवल सामान्य से बहुत ज्यादा हो जाता है। इस एक्स्ट्रा शुगर को शरीर से बाहर निकालने के लिए किडनी को बहुत ज्यादा काम करना पड़ता है। किडनी इस शुगर को छानने की प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में पानी का इस्तेमाल करती है। इससे बार-बार पेशाब आती है और शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन होने लगती है। जब डिहाइड्रेशन होती है तो बार-बार प्यास लगती है और मुंह सूखता रहता है। यही चक्र बार-बार चलता रहता है। इसलिए अगर किसी को बार-बार पेशाब आने के साथ-साथ अधिक प्यास भी लग रही है तो यह दोनों मिलकर डायबिटीज का एक मजबूत संकेत बन जाते हैं जिसे बिल्कुल भी इग्नोर नहीं करना चाहिए।
सिर्फ प्यास नहीं, ये लक्षण भी देते हैं डायबिटीज का इशारा
बार-बार प्यास लगने के अलावा डायबिटीज के कई और लक्षण भी होते हैं जिन पर ध्यान देना जरूरी है। अगर इनमें से एक या एक से ज्यादा लक्षण एक साथ दिख रहे हों तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। हर वक्त भूख लगते रहना डायबिटीज का एक बड़ा संकेत है। इसकी वजह यह है कि जब शरीर में इंसुलिन की कमी होती है या वह सही से काम नहीं करता तो ग्लूकोज सेल्स तक नहीं पहुंच पाता। शरीर को एनर्जी नहीं मिलती और इसलिए भूख लगती रहती है। अचानक वजन का तेजी से घटना भी डायबिटीज का एक अहम लक्षण है। जब शरीर एनर्जी के लिए ग्लूकोज का इस्तेमाल नहीं कर पाता तो वह मसल्स और फैट को तोड़कर एनर्जी लेने लगता है जिससे वजन घटता है।
हमेशा थकान और कमजोरी महसूस होना भी इस बीमारी का एक आम लक्षण है। आंखों से धुंधला दिखाई देना यानी ब्लर विजन भी डायबिटीज की एक वॉर्निंग साइन है। हाई ब्लड शुगर आंखों की ब्लड वेसेल्स को प्रभावित करती है जिससे नजर कमजोर होने लगती है। इसके अलावा चोट या घाव का बहुत देर से भरना भी डायबिटीज की निशानी है क्योंकि ज्यादा शुगर शरीर की इम्युनिटी को कमजोर कर देती है। हाथ-पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन महसूस होना भी इस बीमारी का संकेत हो सकता है।
डायबिटीज होती क्यों है, जानें इसकी असली वजह
डायबिटीज मुख्यतः दो तरह की होती है। टाइप वन डायबिटीज में शरीर इंसुलिन बिल्कुल नहीं बना पाता। यह ज्यादातर बचपन या कम उम्र में होती है और इसमें बाहर से इंसुलिन लेना जरूरी होता है। टाइप टू डायबिटीज में शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या उसका सही से उपयोग नहीं कर पाता। भारत में सबसे ज्यादा टाइप टू डायबिटीज देखी जाती है।
टाइप टू डायबिटीज के पीछे सबसे बड़ी वजहें हैं गलत खानपान, जंक फूड ज्यादा खाना, शारीरिक रूप से इनएक्टिव रहना, मोटापा और तनाव। इसके अलावा फैमिली हिस्ट्री यानी अगर माता-पिता को डायबिटीज है तो बच्चों को भी इसका रिस्क ज्यादा होता है। आजकल की डेस्क जॉब और घंटों स्क्रीन के सामने बैठे रहने की आदत ने भी इस बीमारी को तेजी से बढ़ाया है। दिल्ली और दूसरे बड़े शहरों में जहां लोग बाहर का खाना ज्यादा खाते हैं और फिजिकल एक्टिविटी कम है, वहां डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
ये लक्षण दिखें तो तुरंत करें यह काम, देर बिल्कुल न करें
अगर आपको बार-बार प्यास लगना, गला सूखना, बहुत ज्यादा पेशाब आना, हमेशा थकान रहना, अचानक वजन घटना, आंखें ब्लर होना या हाथ-पैरों में झनझनाहट जैसे एक या एक से ज्यादा लक्षण महसूस हो रहे हैं तो बिल्कुल देर न करें। तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर से मिलें और ब्लड शुगर की जांच करवाएं।
फास्टिंग ब्लड शुगर और एचबीए१सी टेस्ट से डायबिटीज का पता लगाया जा सकता है। यह टेस्ट आसानी से किसी भी लैब में होती हैं और इनकी कीमत भी ज्यादा नहीं होती। समय पर जांच होने पर डायबिटीज को बड़ी आसानी से कंट्रोल में रखा जा सकता है और इसकी वजह से होने वाली तमाम कॉम्प्लिकेशन से बचा जा सकता है।
डायबिटीज से बचाव के लिए अपनी डाइट में बदलाव करें। मीठी और प्रोसेस्ड चीजें कम खाएं। रोज कम से कम तीस मिनट की वॉकिंग या एक्सरसाइज करें। वजन को कंट्रोल में रखें और तनाव कम लें। खूब पानी पिएं और नींद पूरी लें। याद रखें कि डायबिटीज एक लाइफस्टाइल डिजीज है और लाइफस्टाइल सुधारकर इससे काफी हद तक बचा जा सकता है। शरीर के हर छोटे-छोटे संकेत पर ध्यान दें और किसी भी लक्षण को छोटा समझकर इग्नोर न करें।









