अगर आपने कभी हॉलीवुड फिल्में देखी हैं या अमेरिका के घरों की तस्वीरें गौर से देखी हैं, तो शायद एक बात आपके दिमाग में जरूर आई होगी। भारत में जहां लगभग हर घर की छत पर पानी की टंकी दिखाई देती है, वहीं अमेरिका के ज्यादातर घरों की छतें बिल्कुल खाली नजर आती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वहां लोगों के घरों में पानी आता कैसे है? क्या अमेरिका में पानी की टंकियों की जरूरत नहीं पड़ती या फिर वहां कोई अलग तकनीक इस्तेमाल की जाती है? 

असल में इसके पीछे अमेरिका का मजबूत और आधुनिक वॉटर सप्लाई सिस्टम है। भारत और अमेरिका दोनों देशों में पानी पहुंचाने का तरीका काफी अलग है। यही वजह है कि भारत में टंकियां आम हैं, जबकि अमेरिका में वे लगभग न के बराबर दिखाई देती हैं। 

 

भारत में छत पर टंकी क्यों जरूरी होती है?

भारत के कई शहरों और कस्बों में पानी की सप्लाई पूरे दिन नहीं होती। कई जगहों पर सुबह या शाम कुछ घंटों के लिए ही पानी छोड़ा जाता है। ऐसे में लोग उस पानी को स्टोर करने के लिए टंकियों का इस्तेमाल करते हैं। आमतौर पर घरों में नीचे अंडरग्राउंड टैंक बनाया जाता है और फिर मोटर की मदद से पानी को छत पर रखी टंकी में चढ़ाया जाता है। इसके बाद गुरुत्वाकर्षण यानी ग्रैविटी के जरिए पानी घर के हर नल तक पहुंचता है। 

इसके अलावा कई इलाकों में पाइपलाइन का प्रेशर इतना मजबूत नहीं होता कि पानी सीधे ऊपरी मंजिलों तक पहुंच सके। इसलिए भी ओवरहेड टैंक की जरूरत पड़ती है। अगर बिजली चली जाए या कुछ घंटों तक पानी न आए, तब भी टंकी में जमा पानी लोगों की जरूरतें पूरी करता रहता है। 

 

अमेरिका में कैसे पहुंचता है हर घर तक पानी?

अमेरिका में स्थिति काफी अलग है। वहां ज्यादातर शहरों में नगर प्रशासन 24 घंटे और साल के 365 दिन लगातार पानी की सप्लाई देता है। पानी बड़ी-बड़ी ट्रीटमेंट प्लांट्स में साफ किया जाता है और फिर मजबूत पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए घरों तक पहुंचाया जाता है। सबसे खास बात यह है कि पूरे सिस्टम में पानी का दबाव यानी प्रेशर लगातार बनाए रखा जाता है। 

यही कारण है कि लोगों को अपने घरों में पानी जमा करने के लिए अलग से छत पर टंकी लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। नल खोलते ही पानी सीधे पाइपलाइन से घर में पहुंच जाता है। अमेरिका के अधिकांश इलाकों में लोगों को इस बात की चिंता नहीं रहती कि पानी कब आएगा या कब बंद होगा। 

 

क्या अमेरिका में पानी स्टोर ही नहीं किया जाता?

कई लोगों को लगता है कि अमेरिका में पानी स्टोर करने की व्यवस्था नहीं होती, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। फर्क सिर्फ इतना है कि वहां स्टोरेज व्यक्तिगत स्तर पर नहीं बल्कि सामूहिक स्तर पर किया जाता है। कई शहरों में बड़े-बड़े वॉटर टावर और विशाल रिजर्वायर बने होते हैं जो पूरे इलाके के लिए पानी संग्रहित करते हैं। 

ये वॉटर टावर केवल पानी जमा नहीं करते बल्कि पूरे नेटवर्क में स्थिर प्रेशर बनाए रखने में भी मदद करते हैं। जब किसी इलाके में अचानक पानी की मांग बढ़ती है, तब भी लोगों को पर्याप्त प्रेशर के साथ पानी मिलता रहता है। इस तरह एक टावर हजारों घरों की जरूरत पूरी कर सकता है। 

 

मौसम भी है एक बड़ी वजह

अमेरिका के कई हिस्सों में सर्दियों के दौरान तापमान शून्य से काफी नीचे चला जाता है। अगर वहां भारत की तरह छतों पर पानी की टंकियां रखी जाएं तो उनमें मौजूद पानी जम सकता है। इससे पाइप फटने और सप्लाई बाधित होने का खतरा बढ़ जाता है। 

इसी वजह से वहां की अधिकांश पाइपलाइनें जमीन के नीचे बिछाई जाती हैं। जमीन के अंदर तापमान अपेक्षाकृत स्थिर रहता है, जिससे पानी जमने की संभावना कम हो जाती है। यह व्यवस्था लंबे समय से वहां की जल आपूर्ति प्रणाली का अहम हिस्सा रही है। 

 

ऊंची इमारतों में क्या होता है?

हालांकि अमेरिका में आम घरों की छतों पर टंकियां नहीं होतीं, लेकिन कुछ पुराने शहरों, खासकर न्यूयॉर्क जैसी जगहों पर ऊंची इमारतों के ऊपर लकड़ी की पानी की टंकियां दिखाई देती हैं। इनका इस्तेमाल ऊपरी मंजिलों तक पानी पहुंचाने के लिए किया जाता रहा है। हालांकि नई इमारतों में अब आधुनिक पंप और प्रेशर सिस्टम का उपयोग ज्यादा किया जाता है। आज की आधुनिक इमारतों में शक्तिशाली बूस्टर पंप लगाए जाते हैं जो जरूरत के हिसाब से पानी को ऊपर तक पहुंचाते हैं। इससे छत पर भारी टंकी रखने की आवश्यकता काफी कम हो जाती है। 

 

क्या अमेरिका का सिस्टम भारत से बेहतर है?

इस सवाल का सीधा जवाब देना आसान नहीं है। अमेरिका का सिस्टम इसलिए सफल है क्योंकि वहां दशकों से पानी के इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश किया गया है। पाइपलाइन नेटवर्क मजबूत है, बिजली की उपलब्धता बेहतर है और पानी की सप्लाई लगातार बनी रहती है। 

वहीं भारत में आबादी बहुत ज्यादा है और कई शहरों में अभी भी जल आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई है। ऐसे में छत पर पानी की टंकी एक व्यावहारिक और भरोसेमंद समाधान साबित होती है। अगर किसी इलाके में कुछ घंटों के लिए पानी बंद हो जाए, तब भी टंकी में मौजूद पानी लोगों का काम चला देता है। 

अमेरिका के घरों की छतों पर पानी की टंकियां नहीं दिखाई देने का सबसे बड़ा कारण वहां की 24 घंटे चलने वाली हाई-प्रेशर वॉटर सप्लाई है। मजबूत पाइपलाइन नेटवर्क, बड़े वॉटर टावर, आधुनिक पंपिंग सिस्टम और ठंडा मौसम मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाते हैं जिसमें व्यक्तिगत टंकियों की जरूरत नहीं पड़ती। दूसरी तरफ भारत में अनियमित सप्लाई और कम प्रेशर की वजह से छत की टंकियां आज भी घरों का अहम हिस्सा बनी हुई हैं। 

 

हमारी राय

अमेरिका और भारत के वॉटर सिस्टम की तुलना केवल टंकियों के आधार पर नहीं की जानी चाहिए। दोनों देशों की भौगोलिक परिस्थितियां, आबादी, मौसम और इंफ्रास्ट्रक्चर अलग हैं। जहां अमेरिका का केंद्रीकृत और हाई-प्रेशर सिस्टम वहां की जरूरतों के हिसाब से बेहतर काम करता है, वहीं भारत में छत की टंकियां करोड़ों लोगों को पानी की अनिश्चितता से बचाने का आसान और कारगर तरीका हैं। भविष्य में अगर भारत में भी 24 घंटे पानी की निर्बाध सप्लाई सुनिश्चित हो जाए, तो संभव है कि छतों पर टंकियों की जरूरत धीरे-धीरे कम हो जाए। फिलहाल दोनों व्यवस्थाएं अपने-अपने हालात के मुताबिक उपयोगी और जरूरी हैं।