अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के जवाबी कार्रवाई में ईरान ने भी साउदी अरब, यूएई में यूएस के सैन्यू ठिकानों पर हमले किए है, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है। यह तनाव अचानक नहीं आया। सालों से यह सवाल दुनिया के सामने खड़ा है कि आखिर अमेरिका और इजरायल क्यों नहीं चाहते कि ईरान परमाणु हथियार बनाए। इसके पीछे सिर्फ एक नहीं बल्कि कई बड़ी और गंभीर वजहें हैं जिन्हें समझना जरूरी है। आइए एक-एक करके जानते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और अभी हालात कहां तक पहुंच चुके हैं।
इजरायल के लिए यह सिर्फ राजनीति नहीं, अपने वजूद की लड़ाई है
इजरायल एक ऐसा देश है जो हमेशा से अपने चारों तरफ दुश्मनों से घिरा हुआ महसूस करता है। लेकिन ईरान का परमाणु कार्यक्रम उसके लिए बाकी सभी खतरों से अलग और बहुत बड़ा है। इजरायल इसे अपने अस्तित्व के लिए सीधा खतरा मानता है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि ईरान के नेता अतीत में कई बार खुलेआम इजरायल को नक्शे से मिटाने की बात कह चुके हैं। जब कोई देश इस तरह की बातें करता है और साथ में परमाणु हथियार बनाने की कोशिश भी करता है तो इजरायल के लिए यह दोहरा खतरा बन जाता है। इजरायली नेतृत्व का मानना है कि अगर ईरान के हाथ में परमाणु बम आ गया तो वह दिन दूर नहीं जब इजरायल पर इसका इस्तेमाल हो सकता है। यही डर इजरायल को ईरान के खिलाफ हर कदम पर आगे रहने के लिए मजबूर करता है। इजरायल के लिए यह लड़ाई किसी और देश की जमीन या संसाधन के लिए नहीं बल्कि अपने लोगों की जिंदगी और अपने देश के वजूद के लिए है।
अमेरिका को डर है कि पूरा मध्य पूर्व बन जाएगा परमाणु बारूद का ढेर
अमेरिका की चिंता थोड़ी अलग लेकिन उतनी ही गंभीर है। अमेरिका को यह डर सता रहा है कि अगर ईरान परमाणु बम बना लेता है तो मध्य पूर्व के दूसरे देश भी चुप नहीं बैठेंगे। सऊदी अरब, मिस्र और तुर्की जैसे देश जो पहले से ही ईरान को अपना प्रतिद्वंदी मानते हैं, वे भी परमाणु हथियार हासिल करने की दौड़ में कूद पड़ेंगे।
एक बार यह होड़ शुरू हो गई तो पूरा इलाका बेहद खतरनाक हो जाएगा। जिस मध्य पूर्व में पहले से ही कई जंगें चल रही हैं, जहां पहले से ही अस्थिरता है, वहां अगर कई देशों के पास परमाणु हथियार आ गए तो किसी एक गलती या गलतफहमी से पूरी दुनिया को बड़ी तबाही झेलनी पड़ सकती है। अमेरिका इस स्थिति को किसी भी कीमत पर रोकना चाहता है क्योंकि इसका सीधा असर उसके अपने हितों और उसके दोस्त देशों की सुरक्षा पर पड़ेगा।
परमाणु छाते में छुपकर और खतरनाक हो जाएगा ईरान
अमेरिका और इजरायल दोनों का एक और बड़ा डर यह है कि परमाणु हथियार मिलने के बाद ईरान और ज्यादा बेखौफ हो जाएगा। अभी भी ईरान हिजबुल्ला और हमास जैसे समूहों को पैसा, हथियार और ट्रेनिंग देता है जो इजरायल और दूसरे देशों पर हमले करते हैं। लेकिन अभी ईरान एक हद तक सावधान रहता है क्योंकि उसे पता है कि बहुत ज्यादा उकसावे पर उस पर सीधा हमला हो सकता है।
लेकिन अगर ईरान के पास परमाणु बम आ गया तो यह स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी। परमाणु हथियार एक तरह की ढाल बन जाते हैं जिसके पीछे छुपकर कोई भी देश ज्यादा आक्रामक हो सकता है। ईरान इस ढाल का फायदा उठाकर अपने प्रॉक्सी समूहों के जरिए पूरे इलाके में और ज्यादा हमले करवा सकता है। दूसरे देश भी उस पर सीधी कार्रवाई करने से डरेंगे क्योंकि परमाणु हथियार संपन्न देश पर हमला करना बहुत बड़ा जोखिम होता है। यही सोच अमेरिका और इजरायल को सबसे ज्यादा परेशान करती है।
ट्रंप ने कहा, परमाणु ईरान अमेरिकी जमीन के लिए भी खतरा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में साफ शब्दों में कहा है कि परमाणु हथियारों से लैस ईरान सिर्फ मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी सैनिकों के लिए ही खतरा नहीं होगा। उनका कहना है कि ईरान की लंबी दूरी की मिसाइलें इतनी ताकतवर हो चुकी हैं कि परमाणु बम मिलने के बाद वे सीधे अमेरिकी मुख्य भूमि को भी निशाना बना सकती हैं। यह बयान बताता है कि अमेरिका इस मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है। यह सिर्फ मध्य पूर्व की समस्या नहीं रही, यह अब अमेरिका की अपनी सुरक्षा का मामला बन चुका है।
फरवरी-मार्च 2026 में क्या हुआ, हमले से कैसे शुरू हुई जंग
अब बात करते हैं उन घटनाओं की जिन्होंने इस पूरे तनाव को एक खुले सैन्य संघर्ष में बदल दिया। 28 फरवरी और 1 मार्च 2026 को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और ऑपरेशन रोअरिंग लायन नाम दिया गया। यह हमले अचानक और बड़े पैमाने पर किए गए जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई और कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। यह खबर पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा झटका थी क्योंकि खामेनेई दशकों से ईरान की सत्ता के केंद्र में थे और उनके जाने से ईरान में एक बड़ा राजनीतिक और सैन्य शून्य पैदा हो गया है।
ईरान ने किया पलटवार
अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने भी चुप बैठना मंजूर नहीं किया। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और खाड़ी के देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। इन हमलों की जद में कतर, बहरीन और यूएई में स्थित अमेरिकी अड्डे आए।
इस पलटवार ने साफ कर दिया कि यह तनाव अब सिर्फ बातों और धमकियों तक सीमित नहीं रहा, यह एक असली और खतरनाक जंग का रूप ले चुका है। मध्य पूर्व में इस वक्त जो हालात हैं वे पूरी दुनिया के लिए चिंता का सबब बन गए हैं। तेल की कीमतें, वैश्विक बाजार और दुनिया भर के देश इस संघर्ष के नतीजों पर करीब से नजर रखे हुए हैं। आने वाले दिनों में यह तनाव किस मोड़ पर जाता है यह देखना बाकी है।









