आजकल जब महंगाई लगातार बढ़ रही है, तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि बुढ़ापे में कमाई कैसे होगी और जिंदगी कैसे चलेगी। खासकर उन लोगों के लिए जो असंगठित सेक्टर में काम करते हैं जैसे कि रिक्शा चलाने वाले, दिहाड़ी मजदूर, घरेलू काम करने वाले या छोटे दुकानदार। इन्हीं लोगों के लिए सरकार ने एक बहुत ही खास स्कीम शुरू की है जिसका नाम है प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PMSYM)। इस योजना की सबसे बड़ी बात ये है कि इसमें बहुत ही कम पैसे जमा करके बुढ़ापे में हर महीने पेंशन मिलती है। इस लेख में हम इसी योजना को आसान भाषा में समझेंगे।

 

यह योजना आखिर है क्या?

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना एक सरकारी पेंशन स्कीम है जो खासकर असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए बनाई गई है। इसका मकसद है कि जो लोग सरकारी या प्राइवेट नौकरी में नहीं हैं और जिनके पास PF या पेंशन जैसी सुविधा नहीं है, उन्हें बुढ़ापे में आर्थिक सहारा मिल सके। इस योजना के तहत जब व्यक्ति की उम्र 60 साल हो जाती है, तो उसे हर महीने 3000 रुपये की पेंशन दी जाती है। यह योजना 2019 में शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य करोड़ों मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा देना है। 

 

कितनी उम्र और आय वाले लोग ले सकते हैं फायदा?

इस योजना का फायदा वही लोग ले सकते हैं जो असंगठित सेक्टर में काम करते हैं और जिनकी उम्र 18 से 40 साल के बीच है। इसके अलावा उनकी मासिक आमदनी 15,000 रुपये या उससे कम होनी चाहिए। साथ ही, व्यक्ति EPFO, ESIC या NPS जैसी किसी दूसरी सरकारी पेंशन स्कीम का हिस्सा नहीं होना चाहिए। मतलब साफ है कि यह योजना खास तौर पर उन लोगों के लिए है जिनके पास कोई और पेंशन सुरक्षा नहीं है। 

 

हर महीने कितना पैसा जमा करना पड़ता है?

इस योजना की सबसे खास बात यही है कि इसमें बहुत कम पैसे से शुरुआत हो जाती है। अगर कोई व्यक्ति 18 साल की उम्र में इस योजना से जुड़ता है तो उसे सिर्फ करीब 55 रुपये महीना जमा करना होता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, यह राशि भी थोड़ी बढ़ जाती है, लेकिन फिर भी यह बहुत ज्यादा नहीं होती। सरकार भी आपके बराबर योगदान देती है, यानी जितना आप जमा करते हैं उतना ही सरकार भी जोड़ती है। इस तरह धीरे-धीरे एक फंड बनता है जिससे आगे चलकर पेंशन मिलती है। 

 

60 साल के बाद कैसे मिलती है पेंशन?

जब व्यक्ति 60 साल की उम्र पूरी कर लेता है, तो उसे हर महीने 3000 रुपये की निश्चित पेंशन मिलनी शुरू हो जाती है। यह पेंशन सीधे उसके बैंक अकाउंट में आती है। इसका फायदा यह होता है कि बुढ़ापे में रोजमर्रा के खर्चों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। खासकर उन लोगों के लिए यह बहुत मददगार है जिनकी कोई फिक्स इनकम नहीं होती। सरकार की तरफ से यह एक तरह की गारंटी होती है कि बुढ़ापे में कम से कम एक तय राशि हर महीने मिलती रहेगी।

 

इस योजना में और क्या-क्या फायदे मिलते हैं?

इस स्कीम में सिर्फ पेंशन ही नहीं, बल्कि कुछ और भी फायदे जुड़े हैं। अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु पेंशन शुरू होने के बाद हो जाती है तो उसके पति या पत्नी को भी कुछ हिस्सा मिलता है। इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति बीच में योजना छोड़ना चाहता है तो उसके योगदान के हिसाब से उसे पैसा वापस भी मिल सकता है। इसका मतलब यह है कि यह स्कीम पूरी तरह नुकसान वाली नहीं है, बल्कि लचीली भी है। ऐसे नियम इसे और ज्यादा भरोसेमंद बनाते हैं।

 

कैसे कर सकते हैं इस योजना में रजिस्ट्रेशन?

इस योजना में जुड़ना बहुत मुश्किल नहीं है। इसके लिए नजदीकी Common Service Centre (CSC) पर जाकर रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। वहां आधार कार्ड, बैंक पासबुक और मोबाइल नंबर की जरूरत होती है। रजिस्ट्रेशन के बाद आपका बैंक अकाउंट ऑटो-डेबिट से जुड़ जाता है और हर महीने अपने आप पैसे कट जाते हैं। इससे किसी तरह की भागदौड़ या झंझट नहीं होता और सिस्टम पूरी तरह ऑटोमैटिक रहता है।

 

असंगठित मजदूरों के लिए क्यों जरूरी है यह योजना?

भारत में करोड़ों लोग ऐसे हैं जो दिन-रात मेहनत करते हैं लेकिन उनके पास कोई फिक्स सैलरी या भविष्य की सुरक्षा नहीं होती। जब ये लोग बूढ़े हो जाते हैं तो आमदनी रुक जाती है और मुश्किलें बढ़ जाती हैं। ऐसे में यह योजना उनके लिए एक बड़ी राहत की तरह है। कम कमाई वाले लोग भी धीरे-धीरे छोटा-छोटा निवेश करके अपने बुढ़ापे को सुरक्षित बना सकते हैं। यही वजह है कि सरकार इसे एक सामाजिक सुरक्षा मिशन की तरह देखती है।

 

इस योजना से जुड़ी कुछ हकीकत और सीमाएं

हालांकि यह योजना अच्छी है, लेकिन इसमें कुछ सीमाएं भी हैं। सबसे पहली बात यह है कि बहुत सारे लोगों को इसके बारे में पूरी जानकारी नहीं होती, इसलिए वे इसका फायदा नहीं उठा पाते। दूसरी बात यह कि कुछ लोग समय पर योगदान नहीं कर पाते, जिससे उनका अकाउंट एक्टिव नहीं रहता। इसके अलावा 3000 रुपये की पेंशन आज के समय में बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन फिर भी यह एक बेसिक सपोर्ट जरूर है।

 

हमारी राय

हमारी राय में प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना एक अच्छी और जरूरी पहल है, खासकर उन लोगों के लिए जो असंगठित सेक्टर में काम करते हैं और जिनके पास कोई स्थायी भविष्य सुरक्षा नहीं है। भले ही 3000 रुपये की पेंशन बहुत बड़ी रकम नहीं है, लेकिन यह बुढ़ापे में एक बेसिक सपोर्ट जरूर देती है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें सरकार भी योगदान देती है, जिससे आम आदमी पर पूरा बोझ नहीं पड़ता। हालांकि, अगर भविष्य में इस पेंशन राशि को महंगाई के हिसाब से बढ़ाया जाए और ज्यादा लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाई जाए, तो यह योजना और भी ज्यादा असरदार बन सकती है।