भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश के लिए जनगणना केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि भविष्य की योजनाओं की नींव होती है। लंबे इंतज़ार के बाद, आज यानी 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश के साथ-साथ झारखंड में भी 'जनगणना 2027' की औपचारिक शुरुआत हो गई है।
सामान्य रूप से हर 10 साल में होने वाली यह प्रक्रिया इस बार 15 साल बाद आयोजित की जा रही है। 2021 में होने वाली जनगणना को कोरोना महामारी के कारण स्थगित करना पड़ा था. अब, एक नई ऊर्जा और तकनीक के साथ सरकार देश के प्रत्येक नागरिक और घर का ब्यौरा जुटाने के लिए मैदान में उतर चुकी है।
दो चरणों में संपन्न होगी महा-प्रक्रिया
जनगणना 2027 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे दो मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है, ताकि डेटा की सटीकता बनी रहे।
• प्रथम चरण (मकान सूचीकरण और आवास गणना): आज से शुरू हुआ यह चरण 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इसमें मुख्य रूप से मकानों की स्थिति, उनमें उपलब्ध सुविधाओं और परिवार के रहन-सहन के स्तर पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
• द्वितीय चरण (जनसंख्या और जाति गणना): इस चरण में व्यक्तियों की गणना की जाएगी। इस बार की जनगणना में 'जाति' को भी शामिल किया गया है, जो एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इस पूरी प्रक्रिया के बाद अंतिम रिपोर्ट वर्ष 2027 में जारी की जाएगी, इसीलिए इसे 'जनगणना 2027' का नाम दिया गया है।
पहले चरण के 33 सवाल: क्या पूछेगा प्रशासन?
पहले चरण के दौरान जनगणना-कर्मी घर-घर जाकर आपसे 33 महत्वपूर्ण सवाल पूछेंगे। इन सवालों को मुख्य रूप से चार श्रेणियों में बांटा गया है:
• मकान की जानकारी: इसमें मकान का नंबर, दीवारों और छत में इस्तेमाल की गई सामग्री (जैसे ईंट, सीमेंट, पत्थर या घास), और मकान के उपयोग (आवासीय या व्यावसायिक) के बारे में पूछा जाएगा।
• परिवार का विवरण: परिवार के मुखिया का नाम, उनकी जाति (SC/ST या अन्य विशेष समुदाय), और परिवार में रहने वाले सदस्यों की कुल संख्या दर्ज की जाएगी।
• बुनियादी सुविधाएं: घर में पीने के पानी का स्रोत क्या है, रोशनी के लिए बिजली है या सौर ऊर्जा, और शौचालय व रसोई की क्या व्यवस्था है, इन सब पर विस्तृत जानकारी ली जाएगी।
• डिजिटल और आधुनिक संपत्तियां: इस बार सरकार यह भी जानना चाहती है कि कितने परिवारों के पास इंटरनेट, लैपटॉप, स्मार्टफोन, कार, या साइकिल जैसे संसाधन उपलब्ध हैं।
डिजिटल जनगणना और नागरिकों की भूमिका
इस बार की जनगणना को आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल माध्यमों का भरपूर उपयोग किया जा रहा है। झारखंड सहित अन्य राज्यों में लोगों को यह विकल्प दिया गया है कि वे अपनी जानकारी ऑनलाइन स्वयं भी भर सकते हैं। हालांकि, डेटा की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए सरकारी कर्मी आपके घर आकर जानकारी का भौतिक सत्यापन यानी वेरिफिकेशन अवश्य करेंगे।
नागरिकों के लिए यह समझना आवश्यक है कि उनके द्वारा दी गई सही जानकारी ही भविष्य में सरकारी नीतियों, जैसे कि राशन वितरण, स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा योजनाओं के आवंटन का आधार बनती है। इसलिए, बिना किसी डर के जनगणना कर्मियों का सहयोग करना और सटीक तथ्य साझा करना हर देशवासी का कर्तव्य है।
खुद को कैसे करें वेरिफाई?
भारत में पहली बार हो रही डिजिटल जनगणना में नागरिकों को 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' (स्व-गणना) की सुविधा दी गई है। इसका मतलब है कि आप सरकारी कर्मी के घर आने से पहले खुद ऑनलाइन अपनी जानकारी भर सकते हैं।
ऑनलाइन फॉर्म भरने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया नीचे दी गई है:
स्टेप 1 - आधिकारिक पोर्टल पर जाएं
सबसे पहले जनगणना के आधिकारिक सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल se.census.gov.in पर जाएं। यह पोर्टल हिंदी, अंग्रेजी और 14 अन्य क्षेत्रीय भाषाओं (कुल 16 भाषाएं) में उपलब्ध है।
स्टेप 2 - लॉगिन और पंजीकरण
• पोर्टल पर अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें।
• आपके नंबर पर एक OTP (वन-टाइम पासवर्ड) आएगा, उसे भरकर लॉगिन करें।
• अपना राज्य, जिला, और स्थानीय पता (वार्ड/गांव) चुनें।
स्टेप 3 - मकान और परिवार का विवरण भरें
• लॉगिन करने के बाद, आपको मकान की स्थिति (जैसे दीवार/छत की सामग्री) और परिवार के सदस्यों से जुड़े 33 सवाल दिखाई देंगे।
• इन सवालों के जवाब सावधानीपूर्वक भरें। आप बीच में जानकारी को 'ड्राफ्ट' के रूप में सेव भी कर सकते हैं।
स्टेप 4 - सबमिशन और SE ID प्राप्त करना
• सभी जानकारी भरने के बाद, एक बार 'प्रीव्यू' (पूर्वावलोकन) कर लें ताकि कोई गलती न हो।
• फाइनल सबमिट बटन पर क्लिक करें। इसके बाद स्क्रीन पर एक 'सेल्फ-एन्यूमरेशन आईडी' (SE ID) जनरेट होगी।
• इस आईडी को कहीं लिख लें या इसका स्क्रीनशॉट ले लें। यह आईडी आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर SMS के जरिए भी भेजी जाएगी।
स्टेप 5 - सत्यापन
जब जनगणना कर्मी आपके घर आएंगे, तो आपको पूरा फॉर्म दोबारा भरने की जरूरत नहीं होगी। आपको बस उन्हें अपनी SE ID दिखानी होगी। वे अपने मोबाइल ऐप में इस आईडी को डालकर आपकी जानकारी का मिलान करेंगे और उसे डिजिटल रूप से प्रमाणित कर देंगे।
बता दें, सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा आमतौर पर फील्ड वर्क शुरू होने से 15 दिन पहले तक या राज्य द्वारा निर्धारित विशेष समय सीमा के भीतर ही उपलब्ध होती है।
जनगणना 2027 भारत के विकास पथ को निर्धारित करने वाला एक ऐतिहासिक दस्तावेज होगा। 15 साल के अंतराल के बाद हो रही यह गणना न केवल आबादी के सही आंकड़े देगी, बल्कि जातिगत समीकरणों और आधुनिक सुविधाओं की पहुंच का भी स्पष्ट आईना पेश करेगी। झारखंड से लेकर कन्याकुमारी तक, आज से शुरू हुआ यह अभियान एक विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है।









