देश के सबसे बड़े मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम NEET UG 2026 को रद्द कर दिया गया है। National Testing Agency यानी NTA ने यह फैसला पेपर लीक के आरोपों और शुरुआती जांच में सामने आए चौंकाने वाले खुलासों के बाद लिया। अब इस मामले की जांच CBI को सौंप दी गई है। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर वही बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर भारत में पेपर लीक रुक क्यों नहीं रहे?
NEET सिर्फ एक परीक्षा नहीं है। यह लाखों छात्रों के सपनों, सालों की मेहनत और परिवारों की उम्मीदों से जुड़ा एग्जाम है। हर साल करीब 24 लाख छात्र इसमें शामिल होते हैं। लेकिन अब लगातार दूसरे बड़े विवाद ने छात्रों का भरोसा हिला दिया है।
कैसे खुला पूरा मामला?
इस बार मामला एक कथित 'गेस पेपर' से शुरू हुआ। शुरुआत में इसे सामान्य प्रैक्टिस पेपर माना गया, लेकिन बाद में जांच में सामने आया कि उसमें मौजूद 100 से ज्यादा सवाल असली NEET पेपर से मेल खा रहे थे। राजस्थान SOG को जब इसकी जानकारी मिली तो जांच शुरू हुई।
जांच में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई कि इस मामले का कनेक्शन कई राज्यों तक फैला हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक केरल में MBBS की पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने अपने पिता को मोबाइल पर वह गेस पेपर भेजा था। मैसेज में कथित तौर पर लिखा था, ‘पापा यही पेपर आएगा, हॉस्टल की लड़कियों को दे देना।’
बताया गया कि आरोपी का पिता राजस्थान के सीकर में PG हॉस्टल चलाता है। वहां रह रहे छात्रों के बीच यह पेपर बांटा गया। बाद में जब असली परीक्षा हुई तो बड़ी संख्या में सवाल मेल खाते पाए गए। यहीं से यह साफ होने लगा कि पेपर लीक सिर्फ लोकल लेवल का मामला नहीं, बल्कि एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है जिसमें कई लोग जुड़े हुए हैं।
आखिर कहां हुई सबसे बड़ी चूक?
NEET जैसी परीक्षा में सुरक्षा के कई स्तर होते हैं। पेपर सेट होने से लेकर प्रिंटिंग प्रेस, ट्रांसपोर्ट और एग्जाम सेंटर तक हर जगह निगरानी रखी जाती है। NTA ने इस बार GPS ट्रैकिंग, AI आधारित CCTV मॉनिटरिंग, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और 5G जैमर तक इस्तेमाल करने का दावा किया था। इसके बावजूद पेपर लीक होना दिखाता है कि सिस्टम के अंदर कहीं न कहीं बड़ा छेद मौजूद था।
जांच एजेंसियों को शक है कि पेपर प्रिंटिंग और वितरण के दौरान जानकारी बाहर निकली हो सकती है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि कथित गेस पेपर परीक्षा से कई दिन पहले छात्रों तक पहुंच चुका था। यानी तकनीक मजबूत थी, लेकिन इंसानी नेटवर्क उससे ज्यादा तेज निकला।
भारत में पेपर लीक कितना बड़ा संकट बन चुका है?
अगर सिर्फ 2025 और 2026 की बात करें तो कई बड़ी परीक्षाएं विवादों में रही हैं। NEET UG 2026 के अलावा CUET, UGC-NET, SSC, रेलवे भर्ती, DSSSB, राज्य लोक सेवा आयोगों और कई पुलिस भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी या पेपर लीक के आरोप लगे।
एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में देश के लगभग 15 राज्यों में 40 से ज्यादा बड़े पेपर लीक मामले सामने आए हैं। इनसे करीब 1.5 करोड़ उम्मीदवार प्रभावित हुए। 2025 में भी कई राज्यों की भर्ती परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी थीं। कहीं बायोमेट्रिक सिस्टम फेल हुआ तो कहीं एग्जाम से पहले ही पेपर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। 2026 में आते-आते यह संकट और बड़ा दिखने लगा है।
आखिर पेपर लीक होता कैसे है?
आमतौर पर लोग सोचते हैं कि पेपर सिर्फ एग्जाम सेंटर से लीक होता होगा, लेकिन असलियत इससे कहीं ज्यादा जटिल है। जांच एजेंसियों के मुताबिक इसमें कई स्तर पर लोग शामिल हो सकते हैं। पेपर सेटिंग टीम, प्रिंटिंग प्रेस, ट्रांसपोर्ट, डेटा हैंडलिंग स्टाफ, कोचिंग माफिया और टेक्निकल नेटवर्क तक इस चेन का हिस्सा बन जाते हैं।
कुछ मामलों में एग्जाम से पहले ही व्हाट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप्स पर कथित पेपर घूमने लगते हैं। कई बार गेस पेपर के नाम पर असली प्रश्न बेचे जाते हैं। लाखों रुपये लेकर छात्रों को पेपर उपलब्ध कराने के आरोप पहले भी सामने आते रहे हैं। जानकार मानते हैं कि भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव इतना ज्यादा है कि इसने एक पूरा 'एग्जाम माफिया' खड़ा कर दिया है। लाखों उम्मीदवार कम सीटों के लिए लड़ते हैं, और इसी का फायदा ऐसे गिरोह उठाते हैं।
सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
बार-बार हो रहे पेपर लीक को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2024 में बड़ा कानून बनाया था। इसका नाम है 'Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act, 2024' यानी एंटी-पेपर लीक कानून। यह कानून जून 2024 से लागू हुआ।
इस कानून के तहत पेपर लीक, फर्जी परीक्षा, सॉल्वर गैंग और संगठित धोखाधड़ी को गैर-जमानती अपराध बनाया गया है। दोषियों को 3 से 10 साल तक की जेल और 10 लाख से 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना हो सकता है।
सरकार ने कई परीक्षाओं में AI आधारित CCTV निगरानी, बायोमेट्रिक एंट्री, GPS ट्रैकिंग, जैमर और एन्क्रिप्टेड डिजिटल सिस्टम भी शुरू किए हैं। कुछ राज्यों ने QR कोड वाले प्रश्नपत्र भी लागू किए हैं ताकि लीक का स्रोत पता लगाया जा सके।
फिर भी क्यों नहीं रुक रहे पेपर लीक?
सबसे बड़ा कारण है सिस्टम में अंदर तक फैला भ्रष्ट नेटवर्क। तकनीक मजबूत होने के बावजूद अगर अंदर के लोग ही शामिल हों तो सुरक्षा टूट जाती है। कई बार स्थानीय प्रशासन और परीक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी भी सामने आती है। इसके अलावा भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव बहुत ज्यादा है।
लाखों युवा कुछ हजार सीटों के लिए तैयारी करते हैं। ऐसे में कुछ लोग गलत रास्ता अपनाने लगते हैं और माफिया इसका फायदा उठाते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ कानून बना देने से समस्या खत्म नहीं होगी। जब तक परीक्षा प्रक्रिया में शामिल हर स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसे मामले सामने आते रहेंगे।
अब आगे क्या करने की जरूरत है?
अब सिर्फ पारंपरिक एग्जाम सिस्टम से काम नहीं चलेगा। ज्यादा से ज्यादा परीक्षाओं को सुरक्षित Computer Based Test यानी CBT मोड में ले जाना होगा। पेपर तक पहुंच रखने वाले लोगों की संख्या कम करनी होगी और हर स्टेप की लाइव मॉनिटरिंग जरूरी होगी। इसके अलावा परीक्षा एजेंसियों को पूरी तरह जवाबदेह बनाना होगा। अगर किसी परीक्षा में लीक होता है तो सिर्फ छोटे आरोपियों पर नहीं, बल्कि सिस्टम के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। कई शिक्षा विशेषज्ञ यह भी सुझाव दे रहे हैं कि एक ही हाई-स्टेक परीक्षा पर पूरा भविष्य तय करने के बजाय मल्टी-अटेम्प्ट सिस्टम लागू किया जाए। इससे छात्रों पर दबाव कम होगा और पेपर लीक माफिया की ताकत भी घटेगी।
फिलहाल NEET UG 2026 रद्द होने से लाखों छात्र फिर तनाव में हैं। लेकिन यह मामला सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा सिस्टम पर भरोसे का बन चुका है। अगर अब भी सख्त और ईमानदार सुधार नहीं हुए, तो आने वाले समय में छात्रों का विश्वास पूरी तरह टूट सकता है।









