पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का पहला चरण बेहद अहम माना जा रहा है। 23 अप्रैल को शुरू हुए इस चरण में 16 जिलों की 152 सीटों पर मतदान हो रहा है, जहां कुल 1400 से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में हैं। यह सिर्फ चुनाव का पहला पड़ाव नहीं है, बल्कि पूरे चुनाव का टोन सेट करने वाला चरण है। खास बात यह है कि कई हाई-प्रोफाइल सीटों पर बड़े नेताओं की सीधी टक्कर देखने को मिल रही है, जिससे मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प हो गया है।

 

क्यों खास है पहला चरण?

पहले चरण को इसलिए अहम माना जाता है क्योंकि यहीं से चुनावी रुझान तय होने लगते हैं। इस बार मुकाबला मुख्य रूप से ममता बनर्जी की पार्टी TMC और भारतीय जनता पार्टी के बीच है, लेकिन कांग्रेस और अन्य दल भी कुछ इलाकों में मजबूत चुनौती दे रहे हैं। चुनाव में विकास, पहचान (identity politics), महिला वोटर्स, और नागरिकता जैसे मुद्दे छाए हुए हैं।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में जिन सीटों की सबसे ज्यादा चर्चा है, उनमें नंदीग्राम, सिलीगुड़ी, रेजिनगर, बहारामपुर और खड़गपुर सदर शामिल हैं। इन सीटों पर अलग-अलग पार्टियों के बीच सीधी या बहुकोणीय टक्कर देखने को मिल रही है।

 

नंदीग्राम

अगर इस चरण की सबसे चर्चित सीट की बात करें, तो वह है नंदीग्राम जो सबसे बड़ी और हाई-प्रोफाइल सीट मानी जाती है। यहां BJP से सुवेंदु अधिकारी और TMC के पबित्रा कर के बीच सीधी टक्कर है। नंदीग्राम वही सीट है जहां 2021 में सुवेंदु अधिकारी ने खुद ममता बनर्जी को हराया था। इस बार मुकाबला और दिलचस्प इसलिए है क्योंकि दोनों नेता कभी एक ही राजनीतिक खेमे में थे, लेकिन अब आमने-सामने हैं।

 

खड़गपुर सदर

एक और अहम सीट है खड़गपुर सदर, जहां BJP के दिग्गज नेता दिलीप घोष मैदान में हैं। दिलीप घोष राज्य में BJP का बड़ा चेहरा माने जाते हैं और इस सीट पर उनका प्रदर्शन पार्टी की स्थिति को काफी हद तक तय कर सकता है। इस सीट पर मुकाबला कड़ा है, क्योंकि TMC भी यहां अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। TMC से प्रदीप सरकार यहां से ताल ठोक रहे हैं।

 

बहारामपुर  

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी इस बार बहारामपुर सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। यह सीट कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई है, क्योंकि अधीर रंजन चौधरी लंबे समय बाद विधानसभा चुनाव में उतर रहे हैं। उनकी छवि एक मजबूत और आक्रामक नेता की रही है, इसलिए इस सीट पर मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है। यहां इनकी टक्कर BJP प्रत्याशी सुब्रत मैत्रा (कंचन) से है।

 

रेजिनगर

रेजिनगर सीट भी इस चरण की चर्चित सीटों में शामिल है। यहां कई पार्टियों के उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय हो गया है। इस तरह की सीटों पर अक्सर वोटों का बंटवारा होता है, जिससे नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं। रेजिनगर में मुकाबला थोड़ा जटिल है क्योंकि यहां कई पार्टियों के उम्मीदवार आमने-सामने हैं। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला आम जनता उन्नयन पार्टी के हुमायूं कबीर और TMC के अताउर रहमान के बीच होगा। BJP ने बापन घोष को अपना उम्मीदवार बनाया, वहीं CPIM से मोहम्मद सैफुल इस्लाम मुकाबले में शामिल हैं। इस सीट पर कांग्रेस भी अपना प्रभाव दिखाने की कोशिश कर रही है, इसलिए यह सीट बहुकोणीय मुकाबले का उदाहरण बन गई है।

 

सिलीगुड़ी और उत्तर बंगाल की सीटें

उत्तर बंगाल की सीटें भी इस बार काफी अहम हैं। यह इलाका पारंपरिक रूप से राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है और यहां BJP ने पिछले चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया था। इस बार TMC यहां अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

सिलीगुड़ी में मुकाबला काफी दिलचस्प है, जहां शंकर  घोष BJP से उम्मीदवार हैं और उनका सामना TMC के गौतम देब से हो रहा है। यह सीट उत्तर बंगाल की राजनीति का बड़ा केंद्र मानी जाती है। यहां बीजेपी और टीएमसी के बीच सीधी टक्कर है, जबकि वाम दल (CPIM) भी अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय रंग ले सकता है।

 

BJP Vs TMC: सीधी टक्कर

इस चुनाव में मुख्य मुकाबला TMC और BJP के बीच ही है। TMC जहां अपने ‘वेलफेयर मॉडल’ और महिला वोटर्स पर भरोसा कर रही है, वहीं BJP ‘परिवर्तन’ और पहचान की राजनीति पर जोर दे रही है। दोनों पार्टियां हर सीट पर पूरी ताकत लगा रही हैं, जिससे चुनाव काफी कड़ा हो गया है।

 

चुनावी मुद्दे क्या हैं?

इस बार चुनाव में कई बड़े मुद्दे छाए हुए हैं। सबसे बड़ा मुद्दा है मतदाता सूची का, जिसमें नाम हटाए जाने का विवाद सामने आया है। इसके अलावा रोजगार, विकास, महिला सुरक्षा, और धार्मिक पहचान जैसे मुद्दे भी चुनाव को प्रभावित कर रहे हैं।

 

क्या कहती है राजनीतिक तस्वीर?

पहले चरण में जिन सीटों पर मतदान हो रहा है, वे पूरे राज्य की राजनीतिक दिशा तय कर सकती हैं। अगर BJP इन सीटों पर अच्छा प्रदर्शन करती है, तो उसे आगे के चरणों में फायदा मिल सकता है। वहीं अगर TMC अपनी पकड़ बनाए रखती है, तो यह उसके लिए बड़ी बढ़त होगी।

 

क्यों कहा जा रहा ‘हॉट सीट्स’?

इन सीटों को “हॉट सीट्स” इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यहां बड़े नेता खुद मैदान में हैं और मुकाबला सीधा है। नंदीग्राम, खड़गपुर, बहारामपुर जैसी सीटों पर न सिर्फ स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर की नजरें टिकी हुई हैं। इन सीटों के नतीजे पूरे चुनाव की दिशा तय कर सकते हैं।

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 का पहला चरण सिर्फ शुरुआत नहीं, बल्कि एक बड़ा सियासी संकेत है। सुवेंदु अधिकारी, दिलीप घोष और अधीर रंजन चौधरी जैसे दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने इस चरण को बेहद हाई-वोल्टेज बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि इन हॉट सीट्स पर जनता किसे चुनती है, क्योंकि यही तय करेगा कि बंगाल की सत्ता की कुर्सी पर कौन बैठेगा।

इसके साथ ही पहले चरण का वोटिंग प्रतिशत और जनता का रुझान आगे के चरणों के लिए माहौल तैयार करेगा। अगर किसी एक दल को यहां बढ़त मिलती है, तो वह चुनावी मनोविज्ञान पर असर डाल सकती है और बाकी चरणों में उसकी रणनीति और आक्रामक हो सकती है। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था, केंद्रीय बलों की तैनाती और चुनाव आयोग की निगरानी भी इस चरण में काफी अहम मानी जा रही है। अगर मतदान शांतिपूर्ण और निष्पक्ष रहता है, तो यह लोकतंत्र के लिए सकारात्मक संकेत होगा और आगे के चरणों में मतदाताओं का भरोसा और मजबूत होगा।