दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में हाल ही में सामने आए विवाद और सुरक्षा संबंधी सवालों के बाद एक बार फिर Fire NOC यानी फायर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट चर्चा में आ गया है। जब भी किसी होटल, मॉल, अस्पताल, स्कूल, ऑफिस बिल्डिंग या बड़े कमर्शियल परिसर में आग लगने की घटना सामने आती है, तो सबसे पहले यही सवाल उठता है कि क्या उस इमारत के पास Fire NOC था या नहीं।

अक्सर लोग Fire NOC का नाम तो सुनते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को पता होता है कि यह आखिर होता क्या है, इसे कौन जारी करता है और इसे प्राप्त करने के लिए किन नियमों का पालन करना पड़ता है। यही वजह है कि हर बड़ी आगजनी की घटना के बाद इस सर्टिफिकेट को लेकर बहस शुरू हो जाती है।

 

क्या होता है Fire NOC?

Fire NOC का पूरा नाम Fire No Objection Certificate है। यह एक आधिकारिक प्रमाणपत्र होता है जिसे फायर विभाग जारी करता है। इसका मतलब यह होता है कि संबंधित इमारत या परिसर में आग से बचाव के लिए जरूरी सुरक्षा इंतजाम मौजूद हैं और वह निर्धारित नियमों का पालन कर रहा है।

सरल भाषा में कहें तो Fire NOC यह प्रमाणित करता है कि किसी भवन में आग लगने की स्थिति में लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था की गई है। इसमें फायर अलार्म, अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकास मार्ग, स्प्रिंकलर सिस्टम और अन्य सुरक्षा उपकरणों की जांच की जाती है।

किसी भी बड़े भवन को संचालन की अनुमति मिलने से पहले अक्सर Fire NOC हासिल करना जरूरी होता है। इसके बिना कई प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां शुरू नहीं की जा सकतीं।

 

किन इमारतों के लिए जरूरी होता है Fire NOC?

Fire NOC मुख्य रूप से उन इमारतों के लिए जरूरी होता है जहां बड़ी संख्या में लोग आते-जाते हैं। इसमें होटल, रेस्टोरेंट, शॉपिंग मॉल, अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, मल्टीप्लेक्स, बैंक, ऑफिस कॉम्प्लेक्स और ऊंची आवासीय इमारतें शामिल होती हैं।

इसके अलावा कई राज्यों में एक निश्चित ऊंचाई से अधिक वाली इमारतों के लिए भी Fire NOC अनिवार्य कर दिया गया है। वजह साफ है। जितनी बड़ी इमारत होगी, आग लगने की स्थिति में जोखिम भी उतना ही ज्यादा होगा। इसलिए सुरक्षा मानकों का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है।

 

Fire NOC हासिल करने की प्रक्रिया क्या है?

किसी भी भवन मालिक या संस्थान को Fire NOC प्राप्त करने के लिए संबंधित राज्य के फायर विभाग में आवेदन करना पड़ता है। आवेदन के साथ भवन का नक्शा, निर्माण से जुड़ी जानकारी और सुरक्षा उपकरणों का पूरा विवरण जमा किया जाता है।

इसके बाद फायर विभाग की टीम मौके पर जाकर निरीक्षण करती है। अधिकारी यह जांचते हैं कि भवन में आग से बचाव के लिए सभी जरूरी उपकरण मौजूद हैं या नहीं। अगर किसी तरह की कमी पाई जाती है तो उसे दूर करने के निर्देश दिए जाते हैं।

सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद ही Fire NOC जारी किया जाता है। कई मामलों में यह सर्टिफिकेट एक निश्चित अवधि के लिए वैध होता है और समय-समय पर इसका नवीनीकरण भी कराना पड़ता है।

 

किन सुरक्षा इंतजामों की होती है जांच?

Fire NOC जारी करने से पहले फायर विभाग कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच करता है। सबसे पहले यह देखा जाता है कि भवन में पर्याप्त संख्या में अग्निशमन यंत्र मौजूद हैं या नहीं। इसके अलावा फायर अलार्म सिस्टम, स्मोक डिटेक्टर, स्प्रिंकलर सिस्टम और पानी की उपलब्धता भी जांची जाती है।

आपातकालीन निकास मार्ग यानी इमरजेंसी एग्जिट भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। अधिकारी यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी आपदा की स्थिति में लोग आसानी से भवन से बाहर निकल सकें।

इसके साथ ही बिजली की वायरिंग, गैस पाइपलाइन और अन्य संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों की भी समीक्षा की जाती है। अगर इनमें कोई खामी मिलती है तो NOC जारी नहीं किया जाता।

 

दिल्ली और मुंबई में क्या हैं नियम?

दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में Fire NOC के नियम काफी सख्त माने जाते हैं। इन शहरों में आबादी घनी है और बड़ी संख्या में बहुमंजिला इमारतें मौजूद हैं। इसलिए सुरक्षा मानकों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

दिल्ली में Fire NOC के लिए आवेदन ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से किया जा सकता है। फायर विभाग भवन के आकार, उपयोग और क्षमता के आधार पर सुरक्षा मानकों का मूल्यांकन करता है।

मुंबई में भी इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जाती है। यहां विशेष रूप से ऊंची इमारतों और व्यावसायिक परिसरों के लिए अतिरिक्त सुरक्षा मानकों का पालन करना जरूरी होता है। कई मामलों में नियमित निरीक्षण भी किए जाते हैं ताकि सुरक्षा व्यवस्था लगातार बनी रहे।

 

Fire NOC होने के बावजूद हादसे क्यों हो जाते हैं?

यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि अगर किसी इमारत के पास Fire NOC है, तो फिर आग लगने की घटनाएं क्यों होती हैं। इसका जवाब यह है कि केवल NOC प्राप्त कर लेना ही पर्याप्त नहीं होता।

कई बार भवन मालिक सुरक्षा उपकरण तो लगवा लेते हैं, लेकिन उनका रखरखाव ठीक से नहीं करते। कुछ जगहों पर आपातकालीन निकास मार्ग को सामान रखकर बंद कर दिया जाता है। वहीं कई बार फायर अलार्म या स्प्रिंकलर सिस्टम समय पर काम नहीं करते।

यही वजह है कि एक्सपर्ट्स केवल NOC हासिल करने पर नहीं बल्कि नियमित सुरक्षा ऑडिट और रखरखाव पर भी जोर देते हैं। सुरक्षा व्यवस्था लगातार सक्रिय रहनी चाहिए, तभी उसका वास्तविक फायदा मिलता है।

 

आम लोगों के लिए क्यों जरूरी है इसकी जानकारी?

आज के समय में अधिकांश लोग किसी न किसी बहुमंजिला इमारत, ऑफिस, होटल या मॉल में आते-जाते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि जिस भवन में आप मौजूद हैं, वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम हैं या नहीं।

अगर किसी इमारत में बार-बार सुरक्षा नियमों की अनदेखी हो रही हो या आपातकालीन निकास मार्ग बंद दिखाई दे, तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी जा सकती है। जागरूक नागरिक भी हादसों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आग से जुड़ी अधिकांश दुर्घटनाएं सही तैयारी और समय पर रखरखाव से रोकी जा सकती हैं। इसलिए Fire NOC केवल एक सरकारी दस्तावेज नहीं बल्कि लोगों की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण साधन है।

 

हमारी राय

मालवीय नगर जैसे मामलों के बाद Fire NOC की अहमियत और भी बढ़ जाती है। किसी भी भवन की भव्यता या आधुनिक सुविधाओं से ज्यादा महत्वपूर्ण वहां मौजूद सुरक्षा व्यवस्था होती है। Fire NOC यह सुनिश्चित करने का एक तरीका है कि इमारत में आग से बचाव के जरूरी इंतजाम मौजूद हैं। हालांकि केवल सर्टिफिकेट हासिल कर लेना काफी नहीं है। नियमित निरीक्षण, उपकरणों का रखरखाव और सुरक्षा नियमों का ईमानदारी से पालन भी उतना ही जरूरी है। अगर भवन मालिक, प्रशासन और आम नागरिक सभी इस दिशा में जिम्मेदारी निभाएं, तो कई बड़े हादसों को होने से पहले ही रोका जा सकता है।