दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद इस समुद्री रास्ते को फिर से खोल दिया गया है। लंबे समय तक तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण यहां से जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई थी, लेकिन अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होते दिखाई दे रहे हैं। 

ताजा अपडेट के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से पहले दिन करीब 25 जहाज गुजरे हैं। हालांकि यह संख्या अभी भी उस सामान्य स्थिति से काफी कम है, जब जंग से पहले हर दिन करीब 130 जहाज इस रास्ते से गुजरते थे। 

यह रास्ता दुनिया के लिए इसलिए बेहद खास है क्योंकि खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ा हिस्सा तेल और गैस इसी समुद्री मार्ग से होकर दुनिया के दूसरे हिस्सों तक पहुंचता है। ऐसे में यहां की स्थिति का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट पर नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

 

अमेरिका-ईरान तनाव के बाद बंद हो गया था रास्ता

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पिछले कई महीनों से तनाव का केंद्र बना हुआ था। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े विवाद और सैन्य टकराव के बाद यहां जहाजों की आवाजाही पर बड़ा असर पड़ा था। कई शिपिंग कंपनियां सुरक्षा कारणों से इस रास्ते से जाने से बच रही थीं। 

इस स्थिति का सीधा असर तेल बाजार पर पड़ा। कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी और कई देशों को डर था कि अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहा तो ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है। लेकिन अब अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद स्थिति बदलती नजर आ रही है। समझौते के तहत अमेरिका ने नौसैनिक नाकाबंदी हटाने की बात कही और ईरान ने व्यापारिक जहाजों की आवाजाही की अनुमति दी। 

 

पहले दिन 25 जहाजों की आवाजाही क्यों है बड़ी बात?

हालांकि 25 जहाजों की संख्या सुनने में कम लग सकती है, लेकिन इसे एक शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। इतने लंबे तनाव के बाद सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि क्या कंपनियां दोबारा इस रास्ते का इस्तेमाल करने का भरोसा दिखाएंगी या नहीं।

पहले दिन जहाजों का गुजरना यह संकेत देता है कि समुद्री व्यापार धीरे-धीरे वापस पटरी पर आ सकता है। लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि सामान्य स्थिति लौटने में अभी समय लग सकता है क्योंकि कई कंपनियां सुरक्षा हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

 

जंग से पहले हर दिन गुजरते थे 130 जहाज

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की अहमियत इसी बात से समझी जा सकती है कि जंग से पहले यहां रोजाना बड़ी संख्या में जहाजों की आवाजाही होती थी। करीब 130 जहाज हर दिन इस रास्ते का इस्तेमाल करते थे।

इनमें तेल टैंकर, गैस कैरियर और दूसरे मालवाहक जहाज शामिल होते हैं। यही वजह है कि दुनिया के ऊर्जा बाजार की नजर हमेशा इस छोटे से समुद्री रास्ते पर बनी रहती है। अगर यहां आवाजाही पूरी तरह सामान्य हो जाती है तो तेल सप्लाई और कीमतों पर भी राहत देखने को मिल सकती है।

 

क्या अब तेल की कीमतों पर असर पड़ेगा?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने की खबर का असर तेल बाजार पर भी पड़ना तय माना जा रहा है। जब किसी बड़े सप्लाई रूट पर खतरा बढ़ता है तो तेल की कीमतों में तेजी आने लगती है।

अब अगर जहाजों की आवाजाही लगातार बढ़ती है तो सप्लाई को लेकर चिंता कम हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है। हालांकि पूरी तरह असर देखने के लिए यह जरूरी है कि आने वाले दिनों में कितने जहाज इस रास्ते से गुजरते हैं और क्या सुरक्षा स्थिति स्थिर रहती है।

 

ईरान अब जहाजों पर हमला क्यों नहीं कर रहा?

तनाव के दौरान सबसे बड़ी चिंता यही थी कि कहीं ईरान इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को निशाना न बनाए। लेकिन समझौते के बाद ईरान ने ऐसा कदम नहीं उठाया है। फिलहाल दोनों देशों के बीच हुए समझौते को लेकर शांति बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। अमेरिका और ईरान दोनों जानते हैं कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कोई भी नया विवाद पूरी दुनिया के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है। 

 

पूरी तरह सामान्य होने में लगेगा समय

हालांकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोल दिया गया है, लेकिन अभी भी कुछ चुनौतियां बनी हुई हैं। कई शिपिंग कंपनियां सुरक्षा को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। कुछ रिपोर्ट्स में समुद्री सुरक्षा और पुराने खतरे जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया गया है। यही वजह है कि जहाजों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ने की उम्मीद है। एकदम से पहले जैसी 130 जहाज रोजाना वाली स्थिति बनना आसान नहीं होगा।

 

दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए क्यों जरूरी है होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं है, बल्कि दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का बड़ा हिस्सा इसी से जुड़ा है।अगर यहां लंबे समय तक रुकावट आती है तो पेट्रोल, डीजल, गैस और दूसरी चीजों की कीमतों पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे बड़े तेल आयात करने वाले देशों के लिए भी इस रास्ते की स्थिरता काफी मायने रखती है। यही वजह है कि पूरी दुनिया इस घटनाक्रम पर नजर रख रही है।

 

आगे क्या होगा?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज आने वाले दिनों में पूरी तरह सामान्य हो पाएगा। पहले दिन 25 जहाजों की आवाजाही एक सकारात्मक संकेत जरूर है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब रोजाना बड़ी संख्या में जहाज बिना किसी डर के यहां से गुजरने लगेंगे। अगर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता लंबे समय तक बना रहता है तो यह रास्ता फिर से दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में शामिल हो सकता है।

 

हमारी राय

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुलना पूरी दुनिया के लिए राहत की खबर है। लंबे तनाव के बाद जहाजों की आवाजाही शुरू होना दिखाता है कि हालात धीरे-धीरे सुधर रहे हैं। अभी इसे पूरी तरह सामान्य स्थिति कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि भरोसा वापस आने में समय लगेगा। लेकिन अगर शांति बनी रहती है तो इसका फायदा सिर्फ मिडिल ईस्ट को नहीं बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को मिल सकता है। आने वाले कुछ हफ्ते इस बात के लिए बेहद अहम होंगे कि यह समुद्री रास्ता कितनी तेजी से अपनी पुरानी रफ्तार पकड़ता है।