Holika Dahan 2026: होली का त्योहार आते ही घर-घर में उत्साह और उमंग का माहौल बन जाता है। होलिका दहन की वह रात जब चारों तरफ आग की लपटें उठती हैं और लोग उसके चारों ओर घूमते हैं, यह नजारा सिर्फ देखने में ही खूबसूरत नहीं लगता बल्कि इसके पीछे एक गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक मतलब भी छुपा है। होलिका दहन की अग्नि के चारों तरफ परिक्रमा करना एक बहुत पुरानी परंपरा है जो सदियों से चली आ रही है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह परिक्रमा आखिर क्यों की जाती है, कितनी बार करनी चाहिए और इसका सही तरीका क्या है। अगर आप भी इस बारे में जानना चाहते हैं तो यह खबर आपके लिए है।
होलिका दहन में अग्नि की परिक्रमा करना सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं है। यह अपने मन और शरीर को शुद्ध करने का एक तरीका है, भगवान के प्रति कृतज्ञता जताने का एक मौका है और उस पुरानी कहानी को याद करने का वक्त है जो हमें सिखाती है कि सच और अच्छाई की हमेशा जीत होती है। आइए विस्तार से समझते हैं इस परंपरा का पूरा महत्व।
Holika Dahan 2026: 3 बार या 7 बार, कितनी परिक्रमा है सबसे शुभ?
यह सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि होलिका दहन की अग्नि की परिक्रमा कितनी बार करनी चाहिए। शास्त्रों और पुरानी मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन के वक्त अग्नि की 3 बार या 7 बार परिक्रमा करना सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है। इन दोनों संख्याओं का अपना-अपना एक खास मतलब है।
3 बार परिक्रमा करने को त्रिदेवों यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रति सम्मान का प्रतीक माना जाता है। हिंदू धर्म में यह तीनों देव सृष्टि के निर्माण, पालन और संहार के प्रतीक हैं। जब हम तीन बार परिक्रमा करते हैं तो दरअसल हम इन तीनों के प्रति अपनी श्रद्धा जताते हैं और उनसे अपने परिवार की रक्षा और खुशहाली की कामना करते हैं।
वहीं 7 बार परिक्रमा करने का भी एक गहरा मतलब है। यह जीवन के सात चक्रों की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है और सात वचनों से भी जुड़ा है। जो लोग 7 बार परिक्रमा करते हैं उनकी मान्यता होती है कि इससे जीवन के हर पहलू में शुद्धि आती है और भगवान की कृपा बनी रहती है। इन दोनों के अलावा कुछ लोग अपनी राशि के हिसाब से भी परिक्रमा करते हैं लेकिन आम तौर पर 3 या 7 बार परिक्रमा करना ही सबसे ज्यादा प्रचलित और मान्य है।
नकारात्मकता खत्म होती है, नई एनर्जी मिलती है
होलिका दहन की अग्नि की परिक्रमा करने के पीछे सबसे पहली और सबसे अहम वजह यह मानी जाती है कि इससे शरीर और मन के अंदर जमी नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाती है। जिस तरह आग हर चीज को जलाकर साफ कर देती है उसी तरह यह मान्यता है कि होलिका दहन की अग्नि के चारों तरफ घूमने से हमारे अंदर की बुरी भावनाएं, गुस्सा, जलन, डर और नकारात्मक सोच भी उस आग में जलकर राख हो जाती है।
जब पुरानी नकारात्मकता खत्म होती है तो उसकी जगह नई और सकारात्मक ऊर्जा आती है। यही वजह है कि होलिका दहन के बाद लोग खुद को हल्का और तरोताजा महसूस करते हैं। यह सिर्फ एक धार्मिक अनुभव नहीं है बल्कि मानसिक रूप से भी एक नई शुरुआत का एहसास है।
प्रह्लाद और होलिका की कहानी से जुड़ी है यह परंपरा
होलिका दहन की परिक्रमा सीधे तौर पर भक्त प्रह्लाद और होलिका की उस पुरानी कहानी से जुड़ी है जो हम सभी जानते हैं। होलिका को वरदान था कि वह आग में नहीं जलेगी लेकिन जब उसने भक्त प्रह्लाद को लेकर जलती आग में बैठने की कोशिश की तो उसका वरदान काम नहीं आया और वह खुद जलकर राख हो गई जबकि प्रह्लाद बिल्कुल सुरक्षित रहे।
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि सच्ची भक्ति और सत्य की राह पर चलने वाले इंसान को दुनिया की कोई ताकत नुकसान नहीं पहुंचा सकती और बुराई का अंत एक न एक दिन जरूर होता है। जब हम होलिका दहन की अग्नि की परिक्रमा करते हैं तो हम इसी सच को अपने मन में दोहराते हैं और खुद से यह वादा करते हैं कि हम भी हमेशा सच और अच्छाई की राह पर चलेंगे।
सुख और समृद्धि के लिए अर्पित करते हैं नई फसल
होलिका दहन की परिक्रमा के दौरान लोग अग्नि में कई चीजें अर्पित करते हैं। इनमें सबसे खास है नई फसल यानी गेहूं की बालियां, नारियल और अनाज। यह परंपरा इस भावना को दर्शाती है कि हम अपनी नई फसल का पहला हिस्सा भगवान को अर्पित कर रहे हैं और उनका शुक्रिया अदा कर रहे हैं कि उन्होंने इस साल भी हमें इतना दिया।
मान्यता है कि जो लोग इस तरह परिक्रमा करते हुए नई फसल और अनाज अर्पित करते हैं उनके घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती। भगवान उनके घर में हमेशा सुख और समृद्धि बनाए रखते हैं। यह परंपरा हमें यह भी याद दिलाती है कि जो कुछ हमारे पास है वह सब ऊपरवाले की देन है और हमें उसके लिए हमेशा कृतज्ञ रहना चाहिए।
विज्ञान भी मानता है फायदेमंद है होलिका दहन की आग
होलिका दहन की परिक्रमा का महत्व सिर्फ धार्मिक नजरिए से ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक नजरिए से भी है। होलिका दहन की अग्नि से आसपास के वातावरण का तापमान काफी बढ़ जाता है। इस बढ़े हुए तापमान की वजह से आसपास मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। सर्दी के मौसम के खत्म होने और गर्मी शुरू होने के इस संधिकाल में कई तरह के कीटाणु और वायरस सक्रिय होते हैं और होलिका दहन की आग इन्हें खत्म करने में मदद करती है। यही वजह है कि होलिका दहन के पास खड़े रहना और परिक्रमा करना स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा माना जाता है।
परिक्रमा का सही तरीका क्या है, जानिए पूरी विधि
परिक्रमा करने का तरीका भी उतना ही जरूरी है जितना कि परिक्रमा करना। सबसे पहली और सबसे जरूरी बात यह है कि परिक्रमा हमेशा घड़ी की दिशा में यानी clockwise करनी चाहिए। यही दिशा शास्त्रों में सही मानी गई है और यही परंपरा सदियों से चली आ रही है।
परिक्रमा करते वक्त मन में ओम होलिकायै नमः मंत्र का जाप करना बहुत फलदायी माना जाता है। इसके अलावा अहकूटा भयत्रस्तै: मंत्र का जाप भी परिक्रमा के दौरान किया जाता है। परिक्रमा करते वक्त मन शांत और एकाग्र रखें और सच्चे मन से भगवान से अपने परिवार की सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना करें। परिक्रमा के दौरान अगर आप गेहूं की बालियां या नारियल अग्नि को अर्पित करना चाहते हैं तो वह भी कर सकते हैं। यह छोटी सी परंपरा आपके दिल को एक अलग तरह की शांति और संतोष देगी और होली के इस पवित्र त्योहार को और भी यादगार बना देगी।









