Holi 2026: होली का त्योहार बस आने ही वाला है। रंगों के साथ-साथ ठंडाई में भांग मिलाकर पीने की परंपरा भी कई जगहों पर देखने को मिलती है। लोग इसे मजेदार और पुरानी रिवाज के तौर पर लेते हैं। लेकिन भांग का सेवन करने से पहले कई सवाल आते हैं। भांग और गांजा में क्या फर्क है? इसका नशा कितने समय तक रहता है? अगर ज्यादा हो जाए तो क्या करें? इन सवालों के जवाब जानना जरूरी है क्योंकि भांग एक मादक पदार्थ है और इसका असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग होता है।

 

Holi 2026: भांग क्या है और होली से इसका क्या संबंध है

 

भांग कैनाबिस पौधे से बनती है। यह मुख्य रूप से पौधे की पत्तियों से तैयार की जाती है। भारत में होली और महाशिवरात्रि जैसे त्योहारों पर भांग का इस्तेमाल बहुत पुरानी परंपरा है। लोग इसे ठंडाई, लस्सी या मीठे पदार्थों में मिलाकर पीते हैं। भांग को भगवान शिव से जोड़ा जाता है इसलिए कई लोग इसे धार्मिक मानते हैं। होली पर रंग खेलने के साथ ठंडाई में भांग डालकर पीना आम बात हो गई है। लेकिन इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए।

 

Holi 2026: गांजा क्या है और भांग से कैसे अलग है

 

भांग और गांजा दोनों ही कैनाबिस पौधे से आते हैं लेकिन इनमें बड़ा फर्क है। भांग पौधे की पत्तियों से बनती है जबकि गांजा पौधे के फूलों और रेजिन यानी गोंद से तैयार होता है। गांजा में THC की मात्रा ज्यादा होती है इसलिए इसका असर बहुत तेज और शक्तिशाली होता है। भांग का असर धीरे-धीरे चढ़ता है और आमतौर पर कम तीव्र होता है। गांजा ज्यादातर धूम्रपान करके लिया जाता है जबकि भांग को पीने या खाने के रूप में इस्तेमाल करते हैं। भांग का नशा लंबे समय तक रह सकता है लेकिन गांजा का असर जल्दी शुरू होता है और जल्दी उतर भी जाता है।

 

भांग का नशा कैसे शुरू होता है और कितनी देर रहता है

 

भांग पीने के बाद इसका असर धीरे-धीरे आता है। आमतौर पर 30 मिनट से 2 घंटे में असर दिखना शुरू होता है। इसका नशा 6 से 12 घंटे तक रह सकता है। कुछ लोगों में हल्का असर 24 घंटे तक भी महसूस होता है। असर व्यक्ति की उम्र, वजन, सेहत और ली गई मात्रा पर निर्भर करता है। ज्यादा मात्रा में लेने पर चक्कर आना, उल्टी होना, बेचैनी या भ्रम जैसी समस्या हो सकती है। इसलिए शुरुआत में बहुत कम मात्रा से शुरू करना चाहिए।

 

भांग ठीक से कैसे तैयार करें

 

भांग तैयार करने का पारंपरिक तरीका है। सूखी पत्तियों को अच्छे से साफ करें। फिर सिलबट्टे पर थोड़ा पानी डालकर बारीक पीसें। इसमें काली मिर्च, सौंफ, इलायची जैसे मसाले मिला सकते हैं। बाद में इसे दूध या ठंडाई में मिलाकर छान लें। मात्रा हमेशा बहुत कम रखें। ज्यादा डालने से समस्या बढ़ सकती है। घर पर बनाते समय साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।

 

किन लोगों को भांग से दूर रहना चाहिए

 

भांग हर किसी के लिए सही नहीं है। गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को इससे पूरी तरह बचना चाहिए। दिल के मरीज, हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग, मानसिक समस्या जैसे डिप्रेशन या एंग्जायटी से पीड़ित व्यक्ति भी इसका सेवन न करें। 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए यह बिल्कुल नहीं है। अगर कोई दवा चल रही है तो डॉक्टर से पूछकर ही लें। इन स्थितियों में भांग लेने से हालत बिगड़ सकती है।

 

भांग का नशा उतारने के घरेलू उपाय

 

अगर भांग का असर ज्यादा हो जाए तो कुछ घरेलू तरीके मदद कर सकते हैं। सबसे पहले नींबू पानी पिएं। नींबू में विटामिन सी होता है जो शरीर को ताजगी देता है और नशा कम करने में सहायक होता है। मीठी चीजें जैसे शक्कर या मिठाई खाने से भी ब्लड शुगर बढ़ता है और चक्कर कम हो सकता है। 2-3 दाने काली मिर्च चबाने से राहत मिलती है क्योंकि इसमें पिपेरिन नाम का तत्व पाचन तेज करता है। ठंडा पानी या नारियल पानी पीना भी फायदेमंद है। नारियल पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं जो शरीर को हाइड्रेट रखते हैं। शांत जगह पर लेटकर गहरी सांस लेने से भी असर धीरे-धीरे कम होता है।

 

भांग का नशा उतारने के लिए क्या खाना चाहिए

 

नशा उतारने में खान-पान का बड़ा रोल है। खट्टे फल जैसे संतरा और नींबू बहुत अच्छे हैं। इनमें विटामिन सी नशे को कम करने में मदद करता है। दही या छाछ पीना भी फायदेमंद होता है। हल्का खाना जैसे खिचड़ी या दलिया खाएं। नारियल पानी और सादा बिस्कुट या टोस्ट भी ठीक रहता है। भारी या तला-भुना खाना बिल्कुल न लें क्योंकि इससे हालत और खराब हो सकती है। खूब पानी पीते रहें ताकि शरीर डिहाइड्रेट न हो।

 

भांग के फायदे और नुकसान क्या हैं

 

भांग को आयुर्वेद में कुछ फायदों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जैसे पाचन सुधारना या नींद लाना। लेकिन ज्यादा सेवन से नुकसान ज्यादा हैं। इससे बेचैनी, घबराहट, सिरदर्द या उल्टी हो सकती है। लंबे समय तक इस्तेमाल करने से आदत लग सकती है। इसलिए त्योहार पर भी सीमित मात्रा में ही लें। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि मादक पदार्थों से दूर रहना सबसे बेहतर है। अगर परंपरा के नाम पर लेना है तो बहुत कम और जिम्मेदारी से लें।