Angareshwar Mahadev Temple:  मध्यप्रदेश का उज्जैन शहर वैसे तो महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की वजह से पूरी दुनिया में जाना जाता है लेकिन इस पवित्र नगरी में एक और ऐसा अद्भुत मंदिर है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यह मंदिर है अंगारेश्वर महादेव मंदिर जो शिप्रा नदी के तट पर मंगलनाथ रोड पर सिद्धवट घाट के सामने स्थित है। इस मंदिर की खासियत सिर्फ इसकी प्राचीनता नहीं है बल्कि यहां से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं इसे पूरे भारत के शिव मंदिरों में एक अलग और बेहद खास दर्जा दिलाती हैं।

 

पहली बात तो यह कि इस मंदिर को पूरे ब्रह्मांड में मंगल ग्रह की जन्मस्थली माना जाता है। दूसरी बात यह कि यहां शिवलिंग के सामने नंदी की जगह भेड़ की प्रतिमा विराजमान है जो किसी भी शिव मंदिर में बेहद दुर्लभ बात है। और तीसरी बात यह कि देशभर के वो लोग जिनकी कुंडली में मांगलिक दोष होता है वे यहां आकर विशेष भात पूजा करते हैं और अपने दोष से मुक्ति पाते हैं। यही तीन वजहें इस मंदिर को उज्जैन का सबसे रहस्यमयी और चमत्कारी मंदिरों में से एक बनाती हैं।

 

Angareshwar Mahadev Temple:  मंदिर का ऐतिहासिक महत्व

 

उज्जैन में एक बेहद पुरानी और पवित्र परंपरा है जिसे 84 महादेव की परंपरा कहते हैं। मान्यता है कि उज्जैन नगरी में 84 प्राचीन शिव मंदिर हैं और इन सभी के दर्शन करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। अंगारेश्वर महादेव मंदिर इस पवित्र श्रृंखला में 43वें स्थान पर आता है। यह अपने आप में इस मंदिर की प्राचीनता और धार्मिक महत्व को साबित करता है।

 

शिप्रा नदी के किनारे बसा यह मंदिर सदियों पुराना है। शिप्रा नदी को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है और इसी नदी के तट पर हर बारह साल में सिंहस्थ कुंभ मेला भरता है। ऐसी पवित्र नदी के किनारे स्थित अंगारेश्वर महादेव मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा का अंदाजा लगाया जा सकता है। यहां आने वाले श्रद्धालु बताते हैं कि इस मंदिर में कदम रखते ही एक अलग तरह की शांति और सकारात्मक ऊर्जा का एहसास होता है। मत्स्य पुराण में भी इस स्थान का जिक्र मिलता है जो इसकी प्राचीनता को और पक्का करता है। पुराणों में वर्णित स्थानों का आज भी उसी रूप में मौजूद होना अपने आप में किसी चमत्कार से कम नहीं है।

 

स्कंद पुराण की वो कथा जो बताती है कैसे हुआ मंगल ग्रह का जन्म इसी स्थान पर

 

अंगारेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा स्कंद पुराण में विस्तार से बताई गई है और यह कथा इतनी रोचक और रहस्यमयी है कि इसे पढ़कर हर कोई दंग रह जाता है। कथा के अनुसार एक समय भगवान शिव और अंधकासुर नामक दैत्य के बीच भयंकर युद्ध हुआ। अंधकासुर कोई सामान्य राक्षस नहीं था। उसे एक अजीब वरदान मिला हुआ था कि उसके शरीर से जितनी भी रक्त की बूंदें जमीन पर गिरती थीं उनसे उतने ही नए अंधकासुर पैदा हो जाते थे। यानी उसे मारना लगभग नामुमकिन था।

 

इस भयंकर युद्ध के दौरान जब भगवान शिव अंधकासुर से लड़ रहे थे तो उनके ललाट यानी माथे से पसीने की बूंदें पृथ्वी पर गिरीं। इन पसीने की बूंदों से एक तेजस्वी बालक की उत्पत्ति हुई जिसका नाम अंगारक पड़ा। यही अंगारक आगे चलकर मंगल देव के नाम से जाने गए। इस बालक ने अपनी अद्भुत शक्ति से अंधकासुर के रक्त को शांत किया और उस दैत्य के नए रूपों को पैदा होने से रोका। इस तरह मंगल देव के जन्म ने ही उस युद्ध का पटाक्षेप किया।

 

जिस स्थान पर भगवान शिव के ललाट से पसीने की बूंदें गिरकर मंगल देव के रूप में प्रकट हुईं वही स्थान आज अंगारेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। इसीलिए इस मंदिर को मंगल ग्रह की जन्मस्थली कहा जाता है और यही वजह है कि यहां मंगल से जुड़े दोषों के निवारण के लिए पूजा की जाती है।

 

नंदी की जगह भेड़ की प्रतिमा और भात पूजा की अनोखी परंपरा जो बनाती है इस मंदिर को खास

 

अंगारेश्वर महादेव मंदिर में एक ऐसी चीज है जो इसे भारत के किसी भी और शिव मंदिर से अलग करती है। आमतौर पर हर शिव मंदिर में शिवलिंग के ठीक सामने नंदी महाराज यानी बैल की प्रतिमा होती है। नंदी को भगवान शिव का वाहन और द्वारपाल माना जाता है। लेकिन अंगारेश्वर महादेव मंदिर में शिवलिंग के सामने नंदी की जगह भेड़ यानी मेंढे की प्रतिमा विराजमान है। इसके पीछे मान्यता है कि भेड़ मंगल देव का वाहन है और चूंकि यह मंगल देव की जन्मस्थली है इसलिए यहां उनके वाहन को ही शिवलिंग के सामने स्थापित किया गया है।

 

इसके अलावा इस मंदिर में एक और अनोखी परंपरा है जिसे भात पूजा कहते हैं। भात पूजा यानी पके हुए चावल से की जाने वाली पूजा। यह पूजा खास तौर पर उन लोगों के लिए होती है जिनकी जन्म कुंडली में मांगलिक दोष होता है। मांगलिक दोष की वजह से अक्सर विवाह में देरी होती है, वैवाहिक जीवन में परेशानियां आती हैं या फिर कर्ज और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है। ऐसे लोग देशभर से यहां आकर भात पूजा करते हैं और मंगल देव से अपने दोष को शांत करने की प्रार्थना करते हैं।

 

यहां वैसे तो हर दिन पूजा और दर्शन होते हैं लेकिन मंगलवार के दिन इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मंगलवार को यहां दर्शन और अभिषेक का विशेष महत्व बताया जाता है। इस दिन दूर-दूर से श्रद्धालु आकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं और मंगल देव की प्रतिमा के सामने अपनी मन्नतें मांगते हैं। अगर आप भी कभी उज्जैन जाएं तो महाकालेश्वर के दर्शन के साथ-साथ इस अद्भुत और रहस्यमयी अंगारेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन जरूर करें।