हिंदू धर्म में कई ऐसे पर्व होते हैं, जो केवल धार्मिक आस्था ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक शक्ति और जीवन में सकारात्मक बदलाव का संदेश भी देते हैं। उन्हीं खास पर्वों में से एक है बगलामुखी जयंती। साल 2026 में यह पर्व 24 अप्रैल को मनाया जाएगा।
यह दिन मां बगलामुखी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां की पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं, शत्रुओं पर विजय मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही वजह है कि इस दिन का महत्व भक्तों के लिए बहुत खास होता है।
कौन हैं मां बगलामुखी?
मां बगलामुखी को हिंदू धर्म में दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या माना जाता है। ये शक्ति और तंत्र साधना की प्रमुख देवी हैं। इन्हें ‘पीताम्बरा देवी’ भी कहा जाता है, क्योंकि इन्हें पीला रंग बहुत प्रिय होता है।
धार्मिक कथाओं के अनुसार, मां बगलामुखी ने एक दैत्य का अंत किया था, जो अपनी वाणी से विनाश फैलाता था। मां ने उसकी शक्ति को रोक दिया और उसे पराजित किया। इसी वजह से मां को ‘शत्रु स्तंभन’ की देवी भी कहा जाता है, यानी ऐसी देवी जो शत्रु की शक्ति को रोक सकती हैं।
बगलामुखी जयंती 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
साल 2026 में बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि 23 अप्रैल की रात से शुरू होकर 24 अप्रैल की शाम तक रहेगी, इसलिए उदयातिथि के अनुसार 24 अप्रैल को ही जयंती मनाई जाएगी। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह लगभग 4:19 से 5:03 बजे तक रहेगा, जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर के आसपास रहेगा, जिसे पूजा के लिए बहुत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सही मुहूर्त में की गई पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
क्यों मनाई जाती है बगलामुखी जयंती?
यह पर्व मां बगलामुखी के पृथ्वी पर अवतरण का दिन माना जाता है। कहा जाता है कि जब संसार में बुराई और अधर्म बढ़ गया था, तब मां ने प्रकट होकर उसे खत्म किया। इस दिन मां की पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में स्थिरता आती है। खासकर जो लोग कोर्ट-कचहरी, राजनीति या प्रतियोगिता से जुड़े होते हैं, उनके लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन साधना और पूजा करने से व्यक्ति को आत्मबल और आत्मविश्वास भी मिलता है।
कैसे करें सरल तरीके से पूजा?
बगलामुखी जयंती के दिन पूजा बहुत विधि-विधान से की जाती है, लेकिन इसे सरल तरीके से भी किया जा सकता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। अगर संभव हो तो पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। इसके बाद व्रत का संकल्प लें और एक साफ जगह पर मां की तस्वीर या यंत्र स्थापित करें।
मां को पीले फूल, हल्दी, चंदन और पीले फल अर्पित करें। भोग में बेसन के लड्डू, हलवा या पीले चावल चढ़ाए जाते हैं। इसके बाद मां के मंत्र का जाप किया जाता है और अंत में आरती की जाती है। पूजा के दौरान मन को शांत रखना और पूरी श्रद्धा के साथ मां का ध्यान करना सबसे जरूरी माना जाता है।
बगलामुखी मंत्र का महत्व
बगलामुखी जयंती पर मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि इस दिन किया गया मंत्र जाप बहुत प्रभावी होता है और जल्दी फल देता है। मां बगलामुखी का बीज मंत्र विशेष रूप से शक्तिशाली माना जाता है, जो शत्रु बाधा को दूर करने और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करता है। धार्मिक मान्यता है कि अगर इस मंत्र का जाप सही तरीके से किया जाए, तो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं।
व्रत और साधना का महत्व
इस दिन कई भक्त व्रत रखते हैं और पूरे दिन मां की पूजा करते हैं। व्रत रखने से मन और शरीर दोनों शुद्ध होते हैं और ध्यान लगाने में आसानी होती है। कुछ लोग इस दिन विशेष साधना और हवन भी करते हैं, जिससे आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है। यह दिन तंत्र साधना के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए साधक इस दिन विशेष अनुष्ठान करते हैं।
किन लोगों के लिए खास है यह दिन?
बगलामुखी जयंती खास तौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, जो जीवन में संघर्ष या प्रतियोगिता का सामना कर रहे हैं। जैसे कि राजनीति, कानून, मीडिया या बिजनेस से जुड़े लोग इस दिन मां की पूजा करते हैं ताकि उन्हें सफलता और जीत मिल सके। इसके अलावा जो लोग मानसिक तनाव, डर या बाधाओं से परेशान हैं, उनके लिए भी यह दिन राहत और सकारात्मक ऊर्जा देने वाला माना जाता है।
देशभर के प्रमुख मंदिरों में खास आयोजन
बगलामुखी जयंती के दिन देश के कई प्रसिद्ध मंदिरों में विशेष पूजा और कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मध्य प्रदेश के दतिया स्थित पीताम्बरा पीठ और अन्य सिद्धपीठों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। यहां भव्य आरती, हवन और विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं, जिसमें दूर-दूर से लोग शामिल होते हैं।
जीवन में क्या बदलाव ला सकती है यह पूजा?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां बगलामुखी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आते हैं। इससे नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है, आत्मविश्वास बढ़ता है और व्यक्ति अपने लक्ष्यों की ओर तेजी से आगे बढ़ता है। सबसे खास बात यह है कि यह पूजा सिर्फ बाहरी सफलता ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति और आंतरिक शक्ति भी देती है।
बगलामुखी जयंती 2026 केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मबल, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। इस दिन मां बगलामुखी की पूजा करने से न सिर्फ जीवन की समस्याएं कम होती हैं, बल्कि व्यक्ति को आगे बढ़ने की नई ताकत भी मिलती है। अगर इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ पूजा की जाए, तो यह दिन जीवन में सुख, शांति और सफलता लेकर आ सकता है।









