सावन का महीना आते ही चारों तरफ हरियाली, झूले, मेहंदी और तीज के गीतों का माहौल बन जाता है। इस मौसम में आने वाला हरियाली तीज का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। खासतौर पर जिन महिलाओं की नई-नई शादी हुई होती है, उनके लिए यह पहला हरियाली तीज व्रत काफी महत्वपूर्ण होता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली, पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

नई शादी के बाद पहली हरियाली तीज सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं होती, बल्कि यह ससुराल और मायके के बीच रिश्तों को मजबूत करने का भी एक खास अवसर माना जाता है। कई जगहों पर इस मौके पर बेटी को मायके बुलाने और उसे उपहार देने की भी परंपरा है। इसी वजह से पहली हरियाली तीज को लेकर महिलाओं में खास उत्साह देखने को मिलता है।

 

नई शादी के बाद पहली हरियाली तीज क्यों होती है खास?

शादी के बाद आने वाली पहली हरियाली तीज को शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन पूरे श्रद्धा भाव से व्रत रखने और माता पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और खुशहाली बनी रहती है। इसी वजह से नई दुल्हनें इस दिन पूरे सोलह श्रृंगार के साथ पूजा करती हैं। कई परिवारों में पहली तीज पर विशेष रस्में भी निभाई जाती हैं और इसे परिवार के बड़े-बुजुर्गों के आशीर्वाद से जोड़ा जाता है।

 

मायके जाने की परंपरा क्यों है?

हरियाली तीज से जुड़ी सबसे खूबसूरत परंपराओं में से एक है कि शादीशुदा बेटी को इस मौके पर मायके बुलाया जाता है। कई राज्यों में माता-पिता अपनी बेटी को कपड़े, चूड़ियां, मेहंदी, मिठाई और अन्य उपहार भेजते हैं। इसे कई जगह सिंजारा या सिंधारा भी कहा जाता है। इस परंपरा का मकसद सिर्फ उपहार देना नहीं होता, बल्कि बेटी को अपने परिवार के साथ समय बिताने का मौका देना भी होता है। यही वजह है कि पहली हरियाली तीज का इंतजार नई शादीशुदा महिलाओं को खास तौर पर रहता है।

 

हरियाली तीज का धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कई वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी घटना की याद में हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। इसलिए इस दिन विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित लड़कियां अच्छे जीवनसाथी की प्रार्थना करती हैं।

 

हरियाली तीज की पूजा कैसे की जाती है?

इस दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और साफ या नए कपड़े पहनती हैं। हरे रंग के कपड़े, चूड़ियां और मेहंदी का इस पर्व में विशेष महत्व माना जाता है। इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा में फूल, फल, बेलपत्र, धूप, दीप और मिठाई अर्पित की जाती है। कई महिलाएं हरियाली तीज की व्रत कथा भी सुनती हैं। पूजा के बाद परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है।

 

क्या कुंवारी लड़कियां भी रख सकती हैं व्रत?

जी हां। हरियाली तीज सिर्फ शादीशुदा महिलाओं का ही पर्व नहीं है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अविवाहित लड़कियां भी यह व्रत रख सकती हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ व्रत रखने पर माता पार्वती का आशीर्वाद मिलता है और योग्य जीवनसाथी मिलने की कामना पूरी होती है। यही कारण है कि कई जगहों पर बड़ी संख्या में कुंवारी लड़कियां भी इस व्रत में शामिल होती हैं।

 

हरियाली तीज पर झूले और मेहंदी का क्या महत्व है?

सावन का मौसम आते ही पेड़ों पर झूले डाले जाते हैं और महिलाएं पारंपरिक गीत गाते हुए झूला झूलती हैं। इसे सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सावन के उत्सव का हिस्सा माना जाता है। इसके अलावा हाथों में मेहंदी लगाना और हरे रंग की चूड़ियां पहनना भी इस त्योहार की पहचान है। माना जाता है कि मेहंदी और हरा रंग खुशहाली, प्रेम और सौभाग्य का प्रतीक हैं। इसलिए हरियाली तीज पर इनका विशेष महत्व होता है।

 

पहली तीज पर ससुराल और मायके की क्या भूमिका होती है?

कई परिवारों में पहली हरियाली तीज पर ससुराल और मायके दोनों जगह विशेष तैयारियां होती हैं। मायके से बेटी के लिए कपड़े, मिठाई, फल और श्रृंगार का सामान भेजा जाता है, जबकि ससुराल में पूजा और पारिवारिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इससे दोनों परिवारों के रिश्ते और मजबूत होते हैं और नई बहू को परिवार का हिस्सा होने का एहसास भी मिलता है।

 

व्रत रखते समय किन बातों का रखें ध्यान?

अगर आप हरियाली तीज का व्रत रख रही हैं, तो पूजा पूरे श्रद्धा भाव से करें। व्रत के नियम अपने परिवार की परंपरा और धार्मिक मान्यता के अनुसार अपनाएं। अगर किसी महिला को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, गर्भावस्था है या डॉक्टर ने लंबे समय तक भूखा रहने से मना किया है, तो अपनी सेहत को प्राथमिकता दें और जरूरत पड़ने पर परिवार के बुजुर्गों या विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही व्रत करें।

 

हरियाली तीज सिर्फ व्रत नहीं, एक उत्सव भी है

आज के समय में हरियाली तीज सिर्फ धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रह गई है। यह महिलाओं के मिलने-जुलने, पारंपरिक पहनावे, लोकगीत, नृत्य और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करने का भी अवसर बन चुकी है। यही वजह है कि देश के कई राज्यों में इस दिन मेले, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामूहिक तीज उत्सव भी आयोजित किए जाते हैं, जहां महिलाएं पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लेती हैं।

 

हमारी राय

हरियाली तीज आस्था, प्रेम और पारिवारिक रिश्तों का खूबसूरत पर्व है। खासकर नई शादीशुदा महिलाओं के लिए यह दिन नई शुरुआत, खुशहाल वैवाहिक जीवन और परिवार के साथ जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ यह त्योहार भारतीय संस्कृति, परंपराओं और पारिवारिक मूल्यों को भी मजबूत करता है। अगर व्रत पूरी श्रद्धा, सकारात्मक सोच और अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए रखा जाए, तो यह पर्व आध्यात्मिक और सामाजिक दोनों रूपों में खास अनुभव बन जाता है।