Cyber Crime: देश में लगातार बढ़ते साइबर क्राइम और डिजिटल फ्रॉड के मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार ने कड़े कदम उठाने का फैसला लिया है। गृह मंत्री अमित शाह ने CBI और I4C द्वारा आयोजित दो दिवसीय वर्कशॉप में साइबर अपराध के पूरे इकोसिस्टम को जड़ से खत्म करने की रणनीति पर चर्चा की है। इस अहम बैठक में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों, सरकारी विभागों के अधिकारियों, बैंकिंग क्षेत्र के प्रतिनिधियों और टेलीकॉम कंपनियों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया।

 

सरकार की इस पहल के तहत अब KYC प्रक्रिया में बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य किया जाएगा। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय रोमिंग सेवाओं का उपयोग करने के लिए पासपोर्ट की अनिवार्यता पर भी सहमति बनी है। यह कदम विशेष रूप से उन साइबर अपराधियों को रोकने के लिए उठाया गया है जो विदेशों से भारतीय नागरिकों को निशाना बनाते हैं।

 

बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन होगा अनिवार्य

 

वर्कशॉप में लिए गए फैसलों के अनुसार, अब बैंकिंग सेवाओं और टेलीकॉम सेवाओं के लिए KYC अपडेट करते समय बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। यह कदम उन मामलों को रोकने के लिए उठाया गया है जहां साइबर अपराधी लोगों के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल करके फर्जी बैंक अकाउंट खोलते हैं या सिम कार्ड हासिल करते हैं।

 

बायोमैट्रिक सिस्टम लागू होने से व्यक्ति की पहचान की पुष्टि उसके फिंगरप्रिंट, आईरिस स्कैन या चेहरे की पहचान के जरिए की जा सकेगी। इससे किसी भी व्यक्ति के आधार कार्ड, पैन कार्ड या अन्य दस्तावेजों की चोरी करके उनका दुरुपयोग करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम म्यूल बैंक अकाउंट्स और फर्जी सिम कार्ड के इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाएगा।

 

अंतरराष्ट्रीय रोमिंग के लिए पासपोर्ट अनिवार्य

 

वर्कशॉप में एक महत्वपूर्ण निर्णय यह भी लिया गया है कि अंतरराष्ट्रीय मोबाइल रोमिंग सेवाओं को पासपोर्ट से लिंक किया जाएगा। यह कदम उन साइबर अपराधियों को रोकने के लिए है जो भारतीय सिम कार्ड लेकर विदेशों में जाते हैं और वहां से फ्रॉड कॉल करते हैं या डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं।

 

अब जब कोई व्यक्ति विदेश यात्रा पर जाएगा और अपने भारतीय सिम कार्ड का इस्तेमाल करना चाहेगा, तो उसे अपना पासपोर्ट दिखाना होगा। इससे यह ट्रैक करना आसान हो जाएगा कि कौन सा सिम कार्ड किस देश में एक्टिव है और उसका इस्तेमाल कौन कर रहा है। इंटरनेशनल रोमिंग प्रोफाइल को रेगुलेट करने पर भी विचार किया गया है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत नजर रखी जा सकेगी।

 

तीन स्तंभों पर आधारित रणनीति

 

साइबर क्राइम इकोसिस्टम को तोड़ने के लिए तीन प्रमुख क्षेत्रों पर फोकस किया जा रहा है। पहला है फाइनेंशियल पिलर, जिसमें म्यूल अकाउंट्स और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकना शामिल है। साइबर अपराधी अक्सर धोखाधड़ी से प्राप्त पैसे को कई बैंक अकाउंट्स के माध्यम से ट्रांसफर करते हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।

 

दूसरा है टेलीकॉम पिलर, जिसके अंतर्गत सिम कार्ड के गलत इस्तेमाल और eSIM के जरिए होने वाली धोखाधड़ी को रोकने पर काम किया जा रहा है। हाल के वर्षों में eSIM का उपयोग तेजी से बढ़ा है और साइबर अपराधी इसका फायदा उठा रहे हैं। तीसरा है ह्यूमन पिलर, जो साइबर स्लेवरी और मानव तस्करी के जरिए फैलाए जा रहे स्कैम से निपटने पर केंद्रित है।

 

VPN के जरिए बैंकिंग एक्सेस पर निगरानी

 

वर्कशॉप में एक और महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा हुई - VPN के माध्यम से भारतीय बैंक अकाउंट्स तक विदेश से पहुंच बनाना। कई साइबर अपराधी VPN का इस्तेमाल करके अपनी असली लोकेशन छुपाते हैं और भारतीय बैंक अकाउंट्स को विदेश से ऑपरेट करते हैं। इस पर रेगुलेशन लाने की योजना है ताकि संदिग्ध ट्रांजेक्शन को तुरंत पहचाना जा सके।

 

बैंकिंग सेक्टर के प्रतिनिधियों ने इस बात पर सहमति जताई है कि जियोलोकेशन ट्रैकिंग और एडवांस्ड फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम को और मजबूत बनाया जाएगा। इससे अगर किसी अकाउंट में असामान्य गतिविधि होती है, तो उसे तुरंत फ्लैग किया जा सकेगा और कार्रवाई की जा सकेगी।

 

साइबर क्राइम की भयावह स्थिति

 

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत के सामने पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, भारत में साइबर फ्रॉड से लगभग 54,000 करोड़ रुपये की चोरी होने का अनुमान है। यह राशि देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका है और आम नागरिकों की मेहनत की कमाई पर सीधा प्रहार है।

 

गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में बताया कि साइबर क्राइम केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। झारखंड का जामतारा, राजस्थान का भरतपुर और हरियाणा का मेवात जैसे छोटे शहर भी साइबर अपराध के बड़े केंद्र बन गए हैं। इन इलाकों से बड़े पैमाने पर फिशिंग, ऑनलाइन लॉटरी स्कैम और बैंक फ्रॉड जैसे मामले सामने आते रहे हैं।

 

अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और चुनौतियां

 

साइबर अपराध की समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं है। कंबोडिया, थाईलैंड और म्यांमार जैसे देशों से भारतीय नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है। इन देशों में साइबर फ्रॉड सेंटर स्थापित हैं जहां से बड़े पैमाने पर डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी स्कैम और बैंक फ्रॉड को अंजाम दिया जाता है।

 

कई मामलों में भारतीय युवाओं को नौकरी के झांसे में इन देशों में ले जाया जाता है और उन्हें जबरन साइबर अपराध में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है। यह साइबर स्लेवरी का एक गंभीर रूप है जिस पर सरकार गंभीरता से काम कर रही है। विदेश मंत्रालय इन देशों की सरकारों के साथ समन्वय करके ऐसे फ्रॉड सेंटरों को बंद करवाने का प्रयास कर रहा है।

 

हेल्पलाइन 1930 को मजबूत बनाने की योजना

 

साइबर क्राइम की शिकायतों के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। गृह मंत्री ने सभी राज्यों की पुलिस को सजग रहने और इस हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

 

इस हेल्पलाइन को 24x7 सक्रिय रखा जाता है और यहां साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी, डिजिटल अरेस्ट और अन्य प्रकार के साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। सरकार का लक्ष्य है कि शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर प्राथमिक कार्रवाई शुरू की जाए और पीड़ित को राहत प्रदान की जाए।

 

डिजिटल अरेस्ट पर खास फोकस

 

हाल के महीनों में डिजिटल अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़े हैं। इसमें ठग खुद को पुलिस, CBI, नारकोटिक्स ब्यूरो या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उनसे वीडियो कॉल पर बात करके पैसे वसूलते हैं। कई बार तो लोग घंटों तक वीडियो कॉल पर बंधक बना दिए जाते हैं और उन्हें मनोवैज्ञानिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।

 

सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए किसी को गिरफ्तार नहीं करती है। पुलिस और अन्य एजेंसियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे इस बारे में जनजागरूकता फैलाएं और लोगों को ऐसे स्कैम से बचने के तरीके बताएं।