महाशिवरात्रि का पावन पर्व आज पूरे देश में बड़ी धूम-धाम से मनाया जा रहा है। देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ आज देखने को मिल रही है। इस बार महाशिवरात्रि पर भक्तों में रुद्राष्टाध्यायी पाठ को लेकर खास उत्सुकता देखी जा रही है। इस प्राचीन वैदिक पाठ का महाशिवरात्रि पर विशेष महत्व है।

 

क्यों खास है रुद्राष्टाध्यायी का पाठ?

 

हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के कई प्रकार बताए गए हैं, लेकिन रुद्राष्टाध्यायी को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। शुक्ल यजुर्वेद से लिए गए इस पवित्र पाठ में आठ अध्याय शामिल हैं, जिनमें महादेव के अनगिनत रूपों और उनकी महिमा का गुणगान किया गया है।

 

काशी के वरिष्ठ पुरोहित पंडित रामनारायण शुक्ला बताते हैं, "वैदिक काल से ही रुद्राष्टाध्यायी को सबसे प्रभावशाली और चमत्कारी पाठ माना गया है। जब कोई भक्त पूरी श्रद्धा से इसका पाठ करता है तो उसके जीवन में अद्भुत परिवर्तन आते हैं।

 

आठों अध्यायों में छिपा है अलौकिक ज्ञान

 

रुद्राष्टाध्यायी के प्रत्येक अध्याय की अपनी विशेषता है। पहला अध्याय शिव संकल्प सूक्त से शुरू होता है, जिसमें मन की शुद्धता पर बल दिया गया है। दूसरे अध्याय में पुरुष सूक्त के माध्यम से सृष्टि के रहस्य को उजागर किया गया है। तीसरा अध्याय अप्रतिरथ सूक्त है जो शिव की अपराजेय शक्ति का वर्णन करता है।

 

चौथे अध्याय में सूर्य सूक्त के जरिए ऊर्जा और तेज की प्रार्थना की गई है। पांचवां अध्याय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, जिसमें प्रसिद्ध रुद्र सूक्त या नील सूक्त आता है। छठे अध्याय में त्र्यम्बक यजन और महामृत्युंजय मंत्र का समावेश है। सातवां अध्याय जटा अध्याय कहलाता है और आठवां अध्याय चमक प्रश्न से संबंधित है।

 

महामृत्युंजय मंत्र की शक्ति

 

रुद्राष्टाध्यायी में वर्णित महामृत्युंजय मंत्र को सबसे शक्तिशाली मंत्रों में गिना जाता है। त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् से शुरू होने वाला यह मंत्र असाध्य रोगों, अकाल मृत्यु के भय और मानसिक व्याधियों से मुक्ति दिलाने में सक्षम माना गया है।

 

इन परिस्थितियों में जरूरी है पाठ

 

धर्म ग्रंथों के अनुसार, जीवन में कुछ विशेष परिस्थितियों में रुद्राष्टाध्यायी का पाठ अवश्य करना चाहिए। गंभीर बीमारी से ग्रस्त होने पर, व्यापार या नौकरी में लगातार असफलता मिलने पर, परिवार में कलह और अशांति होने पर, या किसी अनहोनी का भय महसूस होने पर इस पाठ से लाभ मिलता है।

 

इसके अलावा ग्रह दोष, विशेषकर राहु-केतु या शनि की साढ़ेसाती से पीड़ित लोगों को भी यह पाठ करना चाहिए। मानसिक अशांति, डिप्रेशन या नकारात्मक विचारों से परेशान व्यक्तियों के लिए भी यह पाठ लाभकारी सिद्ध होता है।

 

ऐसे करें पाठ की तैयारी

 

रुद्राष्टाध्यायी का पाठ करने से पहले कुछ जरूरी तैयारियां करनी होती हैं। सबसे पहले प्रातःकाल स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें। यदि संभव हो तो ब्रह्म मुहूर्त में पाठ करना सबसे उत्तम रहता है। महाशिवरात्रि की रात्रि में यह पाठ करना विशेष फलदायी माना गया है।

 

पूजा स्थल को साफ करके शिवलिंग की स्थापना करें। यदि शिवलिंग न हो तो शिव की प्रतिमा के सामने भी पाठ किया जा सकता है। रुद्राक्ष की माला, गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल का मिश्रण), बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, चंदन और धूप-दीप की व्यवस्था करें।

 

पाठ की सही विधि

 

पाठ शुरू करने से पहले भगवान गणेश और अपने गुरु का स्मरण करें। फिर संकल्प लें कि आप किस उद्देश्य से यह पाठ कर रहे हैं। संकल्प में अपना नाम, गोत्र और निवास स्थान बताते हुए मनोकामना व्यक्त करें।

 

पाठ करते समय प्रत्येक अध्याय के मंत्रों से शिवलिंग पर जल, दूध या गंगाजल चढ़ाएं। बेलपत्र अवश्य अर्पित करें क्योंकि यह भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। पाठ के दौरान मन को एकाग्र रखें और किसी प्रकार की बातचीत न करें।

 

मिलते हैं ये लाभ

 

नियमित रूप से रुद्राष्टाध्यायी का पाठ करने से अनेक लाभ मिलते हैं। स्वास्थ्य में सुधार होता है और रोग-व्याधियां दूर होती हैं। मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक विचार समाप्त होते हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और व्यापार में वृद्धि होती है।

 

पारिवारिक जीवन में सुख-शांति आती है और रिश्तों में मधुरता बढ़ती है। शत्रुओं से रक्षा होती है और भय का नाश होता है। आध्यात्मिक उन्नति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

 

सावधानियां भी हैं जरूरी

 

पाठ करते समय कुछ सावधानियां भी रखनी चाहिए। पाठ के दौरान किसी से बात न करें और मोबाइल फोन बंद रखें। शुद्ध उच्चारण पर ध्यान दें, गलत उच्चारण से मंत्र का प्रभाव कम हो सकता है। यदि उच्चारण में संशय हो तो किसी जानकार पंडित से सीखकर ही पाठ करें।

 

पाठ के समय तामसिक भोजन, मांस, शराब और अन्य नशीले पदार्थों का सेवन वर्जित है। पाठ समाप्त होने तक उपवास रखना उत्तम रहता है। यदि पूर्ण उपवास संभव न हो तो फलाहार किया जा सकता है।
महाशिवरात्रि पर रुद्राष्टाध्यायी पाठ का विशेष महत्व है। यदि आप भी इस बार महाशिवरात्रि पर यह पवित्र पाठ करना चाहते हैं तो पहले से तैयारी शुरू कर दें और किसी जानकार व्यक्ति से मार्गदर्शन अवश्य लें।