उत्तर प्रदेश में परिवहन और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा जाने वाला है। योगी आदित्यनाथ सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के तहत राज्य में तीन बड़े एक्सप्रेसवे आने वाले कुछ महीनों में यातायात के लिए खोले जाने की तैयारी में हैं। ये प्रोजेक्ट न केवल राज्य के विभिन्न शहरों के बीच की दूरी को कम करेंगी, बल्कि यात्रा को अधिक आरामदायक और सुरक्षित भी बनाएंगी।

 

राज्य सरकार ने 22 एक्सप्रेसवे का एक विशाल नेटवर्क तैयार करने की योजना बनाई है, जिसके तहत कई प्रमुख प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इन एक्सप्रेसवे के चालू होने से व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।

 

गंगा एक्सप्रेसवे: मेरठ से प्रयागराज का सफर होगा आधे समय में

 

उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स में से एक गंगा एक्सप्रेसवे अपनी पूर्णता के करीब पहुंच चुकी है। यह प्रोजेक्ट राज्य के परिवहन ढांचे में एक क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली है। गंगा एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 594 किलोमीटर है, जो मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाती है। यह राज्य के 12 प्रमुख जिलों - मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज से होकर गुजरेगी।

 

इस एक्सप्रेसवे को 6-लेन के एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसमें भविष्य में 8 लेन तक विस्तार की सुविधा है। एक्सेस-कंट्रोल्ड होने का मतलब है कि इस पर नियंत्रित प्रवेश और निकास बिंदु होंगे, जो सुरक्षा और गति दोनों को बढ़ाएंगे।

 

निर्माण की प्रगति

 

प्रोजेक्ट के निर्माण में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मुख्य कैरिजवे का 96 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है। सड़क निर्माण के साथ-साथ आधुनिक सुविधाओं का भी काम चल रहा है। FASTag आधारित टोल सिस्टम का सफल परीक्षण भी किया जा चुका है, जो बिना रुके टोल भुगतान की सुविधा प्रदान करेगा। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, यह एक्सप्रेसवे मार्च 2026 के अंत तक पूरी तरह से जनता के लिए खोल दिया जाएगा। यह समयसीमा परियोजना की तीव्र प्रगति को दर्शाती है।

 

यात्रा समय में भारी कटौती

 

गंगा एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा लाभ यात्रा समय में भारी कमी होगी। वर्तमान में मेरठ से प्रयागराज की यात्रा में 10 से 12 घंटे लगते हैं, लेकिन इस एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद यही दूरी केवल 5 से 6 घंटे में तय की जा सकेगी। यह आधे से भी कम समय में यात्रा पूरी करने का अवसर देगा।

 

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे: 35 मिनट में पहुंचें गंतव्य तक

 

राजधानी लखनऊ और औद्योगिक नगरी कानपुर के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना को राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे-6 (NE-6) के नाम से भी जाना जाता है। इस एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई लगभग 63 किलोमीटर है और इसे 6-लेन के रूप में विकसित किया गया है। हालांकि लंबाई में यह अन्य एक्सप्रेसवे से छोटा है, लेकिन इसकी इंजीनियरिंग और डिजाइन अत्याधुनिक है।

 

इस प्रोजेक्ट की सबसे खास विशेषता इसका 18 से 19 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड सेक्शन है, जो इसे उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एलिवेटेड एक्सप्रेसवे बनाता है। एलिवेटेड सेक्शन का मतलब है कि सड़क का यह हिस्सा जमीन से ऊपर उठाकर बनाया गया है, जो भूमि अधिग्रहण की समस्या को कम करता है और शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक प्रवाह को सुचारू बनाता है।

 

समय और लागत

 

वर्तमान में लखनऊ से कानपुर की यात्रा में 2.5 से 3 घंटे का समय लगता है, जबकि नए एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद यह दूरी महज 35 से 45 मिनट में तय हो सकेगी। यह समय की बचत व्यापारियों और दैनिक यात्रियों दोनों के लिए वरदान साबित होगी। लगभग 4700 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस परियोजना का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसे मार्च 2026 के अंत या अप्रैल 2026 की शुरुआत में आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।

 

गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे: राज्य की सबसे लंबी प्रोजेक्ट

 

गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की सबसे विशाल और दूरगामी परियोजनाओं में से एक है, जो पूर्वांचल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे जोड़ेगी। यह परियोजना लगभग 750 किलोमीटर लंबी है, जो इसे उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे बनाती है। यह कुल 22 जिलों से होकर गुजरेगी और पूर्वांचल के गोरखपुर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली से सीधा संपर्क प्रदान करेगी।

 

यह एक्सप्रेसवे राज्य के सबसे अलग-थलग क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम करेगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश के विकास में यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी।

 

वर्तमान स्थिति

 

परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पूरी हो चुकी है और जमीन अधिग्रहण का कार्य तेज गति से जारी है। निर्माण कार्य 2026-27 में शुरू होने की संभावना है। हालांकि यह परियोजना अन्य दो एक्सप्रेसवे की तुलना में शुरुआती चरण में है, लेकिन सरकार इसे प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है।

 

राज्य के विकास में एक्सप्रेसवे की भूमिका

 

इन तीनों एक्सप्रेसवे के बनने से उत्तर प्रदेश में कई तरह के सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है:

 

आर्थिक विकास: बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा मिलेगा। माल परिवहन की लागत कम होगी और समय की बचत होगी।

 

रोजगार सृजन: निर्माण के दौरान और बाद में इन एक्सप्रेसवे के आसपास रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

 

पर्यटन को बढ़ावा: आसान और तेज यात्रा से पर्यटन उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा, खासकर प्रयागराज, गोरखपुर जैसे धार्मिक स्थलों के लिए।

 

औद्योगिक विकास: कानपुर, मेरठ जैसे औद्योगिक केंद्रों की कनेक्टिविटी बढ़ने से नए उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा।

 

क्षेत्रीय असमानता में कमी: पिछड़े क्षेत्रों को बेहतर सड़क संपर्क मिलने से विकास में संतुलन आएगा।

 

योगी सरकार की 22 एक्सप्रेसवे की महत्वाकांक्षी योजना राज्य के भविष्य को नया आकार देने वाली है। ये परियोजनाएं न केवल भौतिक अवसंरचना में सुधार करेंगी, बल्कि उत्तर प्रदेश को देश के सबसे विकसित राज्यों में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।