भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते को लेकर देश के किसानों के मन में उठ रही चिंताओं और आशंकाओं को दूर करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ किया कि इस डील में किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक डिटेल वीडियो मैसेज जारी करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा से किसान हितैषी रहे हैं और इस समझौते में भी भारतीय कृषि क्षेत्र के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया गया है।

 

कृषि मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि जो लोग यह आशंका जता रहे हैं कि इस व्यापार समझौते से भारतीय किसानों को नुकसान होगा, उन्हें समझना चाहिए कि सरकार ने अत्यंत सावधानी के साथ इस समझौते की शर्तों को तय किया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डेयरी और पोल्ट्री जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों के लिए भारत ने अपने बाजार के दरवाजे बिल्कुल नहीं खोले हैं।

 

डेयरी और पोल्ट्री उद्योग रहेगा पूरी तरह सुरक्षित

 

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने विस्तृत बयान में सबसे पहले इस महत्वपूर्ण पहलू पर प्रकाश डाला कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में डेयरी और पोल्ट्री जैसे अत्यंत संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को पूरी तरह से सुरक्षित और संरक्षित रखा गया है।

 

करोड़ों किसानों की आजीविका से जुड़ा मामला: भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और देश भर में करोड़ों छोटे और मझोले किसान डेयरी उद्योग से अपनी आजीविका कमाते हैं। यदि अमेरिकी डेयरी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोल दिया जाता, तो स्थानीय छोटे डेयरी किसान अमेरिकी कंपनियों से मूल्य प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाते और उनका व्यवसाय चौपट हो जाता।

 

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़: डेयरी और पोल्ट्री क्षेत्र भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ है। लाखों परिवार इस क्षेत्र से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। इसलिए सरकार ने इन क्षेत्रों को पूर्णतः संरक्षित रखकर किसानों और पशुपालकों के हितों की मजबूत सुरक्षा सुनिश्चित की है।

 

कृषि मंत्री ने कहा कि यह निर्णय प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता और किसान हितैषी सोच का परिणाम है, जिन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि व्यापार समझौते में किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाए।

 

अनाज, मसाले और नकदी फसलों को मिलेंगे विशाल अवसर

 

जहां एक ओर संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को पूर्णतः सुरक्षित रखा गया है, वहीं दूसरी ओर भारत के कई प्रमुख कृषि उत्पादों के लिए विशाल अमेरिकी बाजार में असीमित नए अवसर खुले हैं। यह भारतीय किसानों के लिए एक सुनहरा मौका है।

 

अनाज निर्यात में होगी बंपर वृद्धि: विशेषकर भारतीय बासमती चावल के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है। अमेरिकी बाजार में भारतीय बासमती की विशेष मांग है और इस समझौते से चावल किसानों को अपने उत्पाद के बेहतर दाम मिल सकेंगे।

 

मसाला उद्योग को मिलेगा बूस्ट: भारत विश्व का सबसे बड़ा मसाला उत्पादक और निर्यातक देश है। इस समझौते के तहत हल्दी, लाल मिर्च, धनिया, जीरा, काली मिर्च जैसे प्रमुख मसालों के निर्यात को विशेष बढ़ावा मिलेगा। अमेरिकी बाजार में भारतीय मसालों की गुणवत्ता की अच्छी प्रतिष्ठा है।

 

चाय और कॉफी उत्पादकों के लिए सुनहरा मौका: असम, दार्जिलिंग और अन्य क्षेत्रों की प्रीमियम चाय तथा दक्षिण भारत की विश्वस्तरीय कॉफी के लिए अमेरिकी बाजार में मांग बढ़ने से हजारों छोटे चाय और कॉफी उत्पादकों को लाभ होगा।

 

कपास किसानों के खुलेंगे नए रास्ते: भारतीय कपास की गुणवत्ता विश्वभर में मान्य है। इस समझौते से कपास उत्पादकों को नए बाजार मिलेंगे और उन्हें अपने उत्पादों के बेहतर और प्रतिस्पर्धी दाम मिल सकेंगे।

 

ट्रेड सरप्लस 90 अरब डॉलर पार पहुंचने की संभावना

 

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता केवल कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक आर्थिक प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेंगे। एसबीआई की एक हालिया विश्लेषणात्मक रिपोर्ट के अनुसार, इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते से अमेरिका के साथ भारत का व्यापार अधिशेष 90 अरब डॉलर के पार पहुंच सकता है। यह भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और आर्थिक स्थिति को और मजबूत करेगा।कृषि के अतिरिक्त फार्मास्यूटिकल्स, आईटी सेवाओं, टेक्सटाइल्स, जेनेरिक दवाइयों और विनिर्माण क्षेत्रों को भी इस समझौते से महत्वपूर्ण लाभ होने की उम्मीद है।

 

विपक्ष और किसान संगठनों की आलोचना का दिया जवाब

 

कुछ विपक्षी दलों और किसान संगठनों द्वारा इस व्यापार समझौते को लेकर उठाई गई आशंकाओं पर कृषि मंत्री ने स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इन सभी चिंताओं को अत्यंत गंभीरता से लिया है और समझौते की शर्तों को तय करते समय इन सभी पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया है।

 

सरकार का स्पष्ट तर्क है कि आज की परस्पर निर्भर वैश्विक अर्थव्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय व्यापार अनिवार्य है, लेकिन यह ऐसा होना चाहिए जो दोनों पक्षों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी हो और जिसमें कमजोर वर्गों एवं छोटे किसानों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए।

 

आर्थिक विशेषज्ञों का पॉजिटिव रुख

 

अर्थशास्त्रियों और ट्रेड एक्सपर्ट ने भी इस समझौते को भारत के लिए एक संतुलित और दूरदर्शी कदम बताया है। उनका मानना है कि यह समझौता भारतीय कृषि उत्पादों के लिए विश्व के सबसे बड़े बाजारों में से एक में प्रवेश का सुनहरा अवसर प्रदान करता है।

 

विशेषज्ञों के अनुसार, संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षण देते हुए प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में अवसर खोलना एक बुद्धिमानीपूर्ण व्यापार रणनीति है जो दीर्घकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी।