देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच सीएनजी यानी कंप्रेस्ड नेचुरल गैस लंबे समय से लोगों के लिए राहत का बड़ा विकल्प बनी हुई थी। खासकर टैक्सी, ऑटो और रोजाना लंबी दूरी तय करने वाले लोग सीएनजी वाहनों को ज्यादा पसंद करते हैं, क्योंकि इसका रनिंग कॉस्ट पेट्रोल और डीजल के मुकाबले काफी कम पड़ता है। लेकिन अब सीएनजी भी लगातार महंगी होती जा रही है और कई शहरों में इसके दाम तेजी से बढ़े हैं। हाल ही में देश के कई हिस्सों में सीएनजी की कीमतों में फिर बढ़ोतरी हुई है। इसके बाद लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर भारत में सबसे सस्ती सीएनजी कहां मिल रही है और सबसे महंगी किस शहर में बिक रही है।
दिल्ली में पहली बार 80 रुपये के पार पहुंची CNG
देश की राजधानी दिल्ली में सीएनजी की कीमतों ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। हालिया बढ़ोतरी के बाद यहां सीएनजी का दाम 80.09 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। खास बात यह है कि सिर्फ तीन दिनों के अंदर दो बार कीमत बढ़ाई गई। पहले 2 रुपये प्रति किलो और फिर 1 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई। दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लाखों लोग रोजाना सीएनजी पर निर्भर हैं। ऑटो, टैक्सी और कैब सर्विस चलाने वालों के लिए यह बढ़ोतरी सीधा असर डाल रही है। यही वजह है कि अब किराए बढ़ने की भी चर्चा तेज हो गई है।
नोएडा, गाजियाबाद और कानपुर में और ज्यादा महंगी गैस
अगर दिल्ली से बाहर एनसीआर और उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों की बात करें तो वहां सीएनजी और ज्यादा महंगी हो चुकी है। नोएडा और गाजियाबाद में सीएनजी का दाम 88.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। वहीं कानपुर, हमीरपुर और फतेहपुर जैसे शहरों में यह कीमत 91.42 रुपये प्रति किलो तक जा चुकी है। इसका मतलब साफ है कि फिलहाल देश के कुछ हिस्सों में सीएनजी अब पेट्रोल के मुकाबले सस्ती जरूर है, लेकिन पहले जितनी किफायती नहीं रह गई। खासकर कमर्शियल वाहन चलाने वाले ड्राइवरों का कहना है कि लगातार बढ़ते दाम उनकी कमाई पर असर डाल रहे हैं।
मुंबई में भी लोगों को लगा महंगाई का झटका
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी सीएनजी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में यहां सीएनजी का दाम बढ़ाकर 84 रुपये प्रति किलो कर दिया गया। महानगर गैस लिमिटेड ने बढ़ती लागत और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में दबाव को इसका कारण बताया। मुंबई में हजारों टैक्सी और ऑटो सीएनजी पर चलते हैं। ऐसे में यहां भी लोगों की जेब पर असर साफ दिखाई देने लगा है। कई ड्राइवरों का कहना है कि पहले जहां सीएनजी उन्हें अच्छी बचत देती थी, अब वही फायदा धीरे-धीरे कम होता जा रहा है।
आखिर क्यों बढ़ रहे हैं CNG के दाम?
सीएनजी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मानी जा रही हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और सप्लाई चेन पर असर की वजह से गैस खरीदना महंगा हो गया है। सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि वे लंबे समय से नुकसान झेल रही थीं और अब कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया था। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी हाल में कहा था कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो तेल कंपनियों का मुनाफा खत्म हो सकता है।
सबसे सस्ती CNG कहां मिल रही है?
हालांकि देश के अलग-अलग राज्यों में सीएनजी की कीमतें अलग हैं, लेकिन अभी भी कुछ शहर ऐसे हैं जहां दाम बाकी जगहों के मुकाबले कम हैं। दिल्ली अभी भी बड़े महानगरों में अपेक्षाकृत सस्ती सीएनजी देने वाले शहरों में शामिल है, जहां रेट करीब 80 रुपये प्रति किलो है। इसके मुकाबले उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई शहरों में कीमतें 89 से 91 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी हैं। यानी फिलहाल दिल्ली और कुछ बड़े शहरों में सीएनजी अपेक्षाकृत सस्ती मानी जा सकती है, जबकि कानपुर जैसे शहरों में यह सबसे महंगी श्रेणी में पहुंच चुकी है।
क्या अब भी फायदे का सौदा है CNG?
बढ़ती कीमतों के बावजूद एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सीएनजी अभी भी पेट्रोल और डीजल के मुकाबले किफायती विकल्प बनी हुई है। खासकर वे लोग जो हर महीने ज्यादा दूरी तय करते हैं, उनके लिए सीएनजी वाहन अभी भी अच्छी बचत कर सकते हैं। सोशल मीडिया और ऑटोमोबाइल कम्युनिटी में भी इस पर लगातार चर्चा हो रही है। कई यूजर्स का कहना है कि सीएनजी की रनिंग कॉस्ट आज भी पेट्रोल से लगभग आधी पड़ती है। हालांकि अब पहले जितनी बचत नहीं हो रही। यही वजह है कि भारत में सीएनजी कारों की बिक्री लगातार बढ़ रही है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक देश में बिकने वाली लगभग हर तीन में से एक वैकल्पिक ईंधन वाली कार सीएनजी आधारित है।
ऑटो और टैक्सी किराए बढ़ने की आशंका
सीएनजी महंगी होने का सबसे बड़ा असर पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर पड़ सकता है। दिल्ली, मुंबई और दूसरे शहरों में ऑटो और टैक्सी यूनियनें पहले ही किराया बढ़ाने की मांग कर रही हैं। अगर आने वाले दिनों में गैस के दाम और बढ़ते हैं, तो इसका असर आम लोगों के रोजाना सफर पर भी दिख सकता है। ऑफिस जाने वाले लोग, स्कूल बसें और कैब सर्विस इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ सकते हैं।
आने वाले समय में क्या हो सकता है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें स्थिर नहीं हुईं, तो भारत में भी सीएनजी के दाम आगे बढ़ सकते हैं। हालांकि सरकार कोशिश कर रही है कि आम लोगों पर ज्यादा बोझ न पड़े। इसके बावजूद यह साफ दिख रहा है कि अब सस्ती सीएनजी वाला दौर धीरे-धीरे बदल रहा है। जो लोग सिर्फ कम खर्च के कारण सीएनजी वाहन खरीद रहे थे, उन्हें अब भविष्य की लागत भी ध्यान में रखनी होगी।
सीएनजी लंबे समय तक आम लोगों के लिए राहत का बड़ा जरिया रही, लेकिन अब लगातार बढ़ती कीमतों ने इसकी चमक थोड़ी कम कर दी है। फिर भी पेट्रोल और डीजल के मुकाबले यह अभी भी किफायती विकल्प बनी हुई है। फिलहाल दिल्ली जैसे शहरों में सीएनजी अपेक्षाकृत सस्ती है, जबकि कानपुर, नोएडा और गाजियाबाद जैसे शहरों में लोग ज्यादा कीमत चुका रहे हैं। आने वाले समय में वैश्विक बाजार और सरकारी नीतियां तय करेंगी कि सीएनजी लोगों को राहत देती रहेगी या फिर यह भी पेट्रोल-डीजल जितनी महंगी हो जाएगी।









