आजकल फिटनेस लोगों की लाइफस्टाइल का बड़ा हिस्सा बन चुकी है। कोई जिम में घंटों पसीना बहा रहा है, तो कोई रोज रनिंग करता है। सोशल मीडिया पर भी फिटनेस वीडियो और ट्रांसफॉर्मेशन स्टोरीज की भरमार है। लेकिन क्या सिर्फ वर्कआउट करना ही फिट होने की निशानी है?

हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि असली फिटनेस सिर्फ बॉडी बनाने या वजन कम करने से साबित नहीं होती। कई बार लोग देखने में फिट लगते हैं, लेकिन शरीर की ताकत, बैलेंस, स्टैमिना और मोबिलिटी उतनी मजबूत नहीं होती। यही वजह है कि अब फिटनेस एक्सपर्ट्स कुछ ऐसे टेस्ट और एक्सरसाइज पर जोर दे रहे हैं जो शरीर की 'रियल फिटनेस' को सामने लाते हैं।

 

सिर्फ सिक्स पैक होना फिटनेस नहीं

बहुत से लोग मानते हैं कि अगर शरीर स्लिम है या मसल्स दिख रहे हैं, तो वे पूरी तरह फिट हैं। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार फिटनेस कई चीजों का मिश्रण होती है। इसमें ताकत, लचीलापन, संतुलन, हार्ट हेल्थ, स्टैमिना और रिकवरी क्षमता सब शामिल होते हैं। यानी अगर कोई व्यक्ति थोड़ी देर सीढ़ियां चढ़ने में ही थक जाए या शरीर का संतुलन ठीक से न बना पाए, तो सिर्फ जिम जाने से उसे पूरी तरह फिट नहीं माना जा सकता।

 

प्लैंक बताएगा आपकी कोर स्ट्रेंथ

फिटनेस विशेषज्ञों के अनुसार प्लैंक एक्सरसाइज शरीर की असली ताकत को समझने का अच्छा तरीका मानी जाती है। इस एक्सरसाइज में शरीर को सीधा रखते हुए कुछ समय तक टिके रहना होता है। इससे कोर मसल्स यानी पेट और कमर की ताकत का अंदाजा लगता है। अगर कोई व्यक्ति कुछ सेकंड में ही कांपने लगे या शरीर स्थिर न रख पाए, तो यह कमजोर कोर स्ट्रेंथ की निशानी हो सकती है।

 

पुश-अप से समझ आती है अपर बॉडी ताकत

पुश-अप को सबसे बेसिक लेकिन असरदार फिटनेस टेस्ट माना जाता है। इससे हाथ, कंधे, छाती और कोर स्ट्रेंथ का पता चलता है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर कोई व्यक्ति सही फॉर्म में लगातार पुश-अप नहीं कर पाता, तो इसका मतलब है कि अपर बॉडी स्ट्रेंथ पर और काम करने की जरूरत है।हालांकि फिटनेस ट्रेनर्स यह भी कहते हैं कि संख्या से ज्यादा सही तकनीक महत्वपूर्ण होती है।

 

स्क्वॉट से पता चलता है शरीर का बैलेंस

स्क्वॉट सिर्फ जिम एक्सरसाइज नहीं, बल्कि शरीर की फंक्शनल फिटनेस का बड़ा संकेत माना जाता है। इससे पैरों की ताकत, बैलेंस और मोबिलिटी का पता चलता है। अगर स्क्वॉट करते समय एड़ी ऊपर उठने लगे, पीठ झुक जाए या संतुलन बिगड़ जाए, तो यह शरीर की कमजोरी और स्टिफनेस का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक बैठने वाली लाइफस्टाइल का असर भी स्क्वॉट क्षमता पर दिखता है।

 

बैलेंस टेस्ट भी है बेहद जरूरी

आजकल लोग ताकत पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन संतुलन यानी बैलेंस को नजरअंदाज कर देते हैं। फिटनेस एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति एक पैर पर कुछ सेकंड तक स्थिर नहीं खड़ा रह सकता, तो यह शरीर के संतुलन और कोऑर्डिनेशन की कमी दिखा सकता है। बढ़ती उम्र में बैलेंस और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि इससे गिरने और चोट लगने का खतरा कम होता है।

 

कार्डियो फिटनेस की सच्चाई भी जरूरी

कई लोग भारी वजन उठा लेते हैं, लेकिन थोड़ी दौड़ लगाने पर सांस फूलने लगती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ कार्डियो फिटनेस को भी जरूरी मानते हैं। तेज चलना, रनिंग, सीढ़ियां चढ़ना और एचआईआईटी एक्सरसाइज हार्ट और फेफड़ों की क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करती हैं। अगर शरीर थोड़ी एक्टिविटी में ही ज्यादा थक जाए, तो यह कमजोर कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस का संकेत माना जा सकता है।

 

फ्लेक्सिबिलिटी को क्यों नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

आज की सेडेंटरी लाइफस्टाइल यानी लंबे समय तक बैठने की आदत शरीर को स्टिफ बना रही है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर कोई व्यक्ति आसानी से झुक नहीं पाता, हाथ ऊपर उठाने में दिक्कत होती है या शरीर में जकड़न रहती है, तो यह फ्लेक्सिबिलिटी की कमी हो सकती है। योग और पिलाटीज जैसी गतिविधियां इस समस्या को कम करने में मदद कर सकती हैं।

 

ज्यादा एक्सरसाइज भी बन सकती है समस्या

विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करना नुकसानदायक हो सकता है। सोशल मीडिया पर दिखने वाले कठिन वर्कआउट्स को देखकर कई लोग बिना तैयारी के भारी एक्सरसाइज करने लगते हैं। इससे जॉइंट्स और मसल्स पर दबाव बढ़ सकता है। फिटनेस ट्रेनर्स का कहना है कि सही फॉर्म और ग्रैजुअल प्रोग्रेस सबसे ज्यादा जरूरी है।

 

फिटनेस में रिकवरी भी उतनी ही जरूरी

बहुत से लोग सोचते हैं कि रोज ज्यादा देर जिम में रहना ही फिटनेस का राज है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार शरीर को आराम देना भी जरूरी है। वर्कआउट के दौरान मसल्स टूटती हैं और आराम के दौरान रिकवर होती हैं। अगर पर्याप्त नींद और रिकवरी न मिले, तो शरीर थका हुआ महसूस करने लगता है।

 

सोशल मीडिया ने बदल दी फिटनेस की कॉन्सेप्ट 

आजकल फिटनेस को अक्सर सिर्फ ‘दिखने’ से जोड़ दिया गया है। एब्स, मस्कुलर बॉडी और ट्रांसफॉर्मेशन वीडियोज लोगों को प्रभावित करते हैं। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि असली फिटनेस वह है जिसमें शरीर रोजमर्रा के काम आसानी से कर सके और व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ रहे।

 

शुरुआत कैसे करें?

अगर कोई व्यक्ति अपनी असली फिटनेस जांचना चाहता है, तो उसे छोटे-छोटे फंक्शनल एक्सरसाइज से शुरुआत करनी चाहिए। पुश-अप, स्क्वॉट, प्लैंक, वॉकिंग, स्ट्रेचिंग और बैलेंस एक्सरसाइज शरीर की वास्तविक स्थिति समझने में मदद कर सकती हैं।

फिटनेस एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि शुरुआत हमेशा धीरे करनी चाहिए और दूसरों से तुलना नहीं करनी चाहिए। कई अनुभवी फिटनेस यूजर्स भी बिगिनर्स को ‘लाइट स्टार्ट’ और ‘कंसिस्टेंट प्रोग्रेस’ की सलाह देते हैं।

 

फिटनेस का असली मतलब क्या है?

विशेषज्ञों के अनुसार फिटनेस का मतलब सिर्फ वजन कम करना या बॉडी बनाना नहीं है। असली फिटनेस वह है जिसमें शरीर मजबूत, संतुलित, ऊर्जावान और लंबे समय तक एक्टिव रह सके।

यानी अगर आप रोज वर्कआउट करते हैं, तो यह अच्छी बात है। लेकिन असली सवाल यह है कि आपका शरीर वास्तव में कितना सक्षम और संतुलित है। शायद यही आपकी ‘रियल फिटनेस’ की सबसे बड़ी पहचान है।