भारत का पेय पदार्थ बाजार यानी ड्रिंक्स इंडस्ट्री इन दिनों एक बड़े बदलाव से गुजर रहा है। खासकर जेन ज़ी यानी आज की युवा पीढ़ी की वजह से फ्लेवर्ड ड्रिंक्स की मांग तेजी से बढ़ी है। पहले जहां लोग सामान्य कोल्ड ड्रिंक, जूस या सादे पेय पर टिके रहते थे, अब वही युवा नए-नए फ्लेवर, रंग-बिरंगे ड्रिंक्स और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। यही वजह है कि कंपनियां भी अपने प्रोडक्ट्स में लगातार बदलाव कर रही हैं और नए-नए फ्लेवर मार्केट में ला रही हैं।
जेन ज़ी क्यों बदल रही है ड्रिंक्स की दुनिया?
जेन ज़ी यानी लगभग 1997 के बाद जन्मी पीढ़ी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पीढ़ी जल्दी बोर हो जाती है और हमेशा कुछ नया चाहती है। यही आदत अब फूड और बेवरेज सेक्टर में भी साफ दिख रही है। अब युवा सिर्फ प्यास बुझाने के लिए ड्रिंक नहीं लेते, बल्कि वो ऐसा पेय चाहते हैं जो देखने में अच्छा लगे, सोशल मीडिया पर शेयर किया जा सके और जिसका टेस्ट भी यूनिक हो। कंपनियों का कहना है कि आज का युवा बार-बार एक ही स्वाद नहीं चाहता। वह हर बार कुछ अलग, कुछ नया और थोड़ा हटकर अनुभव चाहता है। इसी वजह से फ्लेवर्ड ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स और मिक्स्ड बेवरेज की डिमांड तेजी से बढ़ी है। कई कंपनियों ने अपने प्रोडक्शन प्लांट्स को भी इस हिसाब से एडजस्ट करना शुरू कर दिया है ताकि नए फ्लेवर जल्दी लॉन्च किए जा सकें।
सिर्फ कोल्ड ड्रिंक नहीं, अब एक्सपीरियंस बन गया है बेवेरेज
पहले ड्रिंक का मतलब सिर्फ प्यास बुझाना होता था, लेकिन अब यह एक पूरा ‘एक्सपीरियंस’ बन चुका है। जेन ज़ी के लिए बेवेरेज सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उसमें विजुअल अपील, पैकेजिंग और सोशल मीडिया कनेक्शन भी बहुत मायने रखता है। अगर कोई ड्रिंक इंस्टाग्राम या रील्स में अच्छा दिखता है, तो उसकी मांग अपने आप बढ़ जाती है। यही वजह है कि कंपनियां अब रंगीन, लेयर वाले और यूनिक नाम वाले ड्रिंक्स पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं। कई ब्रांड तो खास तौर पर ऐसे ड्रिंक्स बना रहे हैं जो फोटो और वीडियो में आकर्षक लगें। इस ट्रेंड ने पूरे मार्केट की दिशा बदल दी है।
एनर्जी ड्रिंक्स और हेल्थ ड्रिंक्स की बढ़ती डिमांड
फ्लेवर्ड ड्रिंक्स के साथ-साथ एनर्जी ड्रिंक्स और हेल्दी बेवरेज की मांग भी तेजी से बढ़ी है। जेन ज़ी फिटनेस और एक्टिव लाइफस्टाइल को लेकर काफी जागरूक है, इसलिए वह ऐसे ड्रिंक्स की तरफ भी जा रही है जो एनर्जी दे सकें या हेल्थ के लिए बेहतर हों। कंपनियां अब अपने पोर्टफोलियो में सिर्फ सॉफ्ट ड्रिंक्स नहीं रख रही हैं, बल्कि उसमें एनर्जी ड्रिंक्स, स्पोर्ट्स ड्रिंक्स, विटामिन-युक्त पेय और लो-शुगर ऑप्शंस भी जोड़ रही हैं। इस बदलाव से मार्केट में प्रतिस्पर्धा और भी बढ़ गई है और हर कंपनी नए टेस्ट के साथ कुछ अलग पेश करने की कोशिश कर रही है।
सोशल मीडिया ने बढ़ाई फ्लेवर्ड ड्रिंक्स की चर्चा
आज के समय में सोशल मीडिया इस पूरे बदलाव का सबसे बड़ा वजह बन गया है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब शॉर्ट्स और दूसरे प्लेटफॉर्म पर लोग नए-नए ड्रिंक्स ट्राय करते हैं और उन्हें शेयर करते हैं। इससे किसी भी नए फ्लेवर को तेजी से लोकप्रियता मिल जाती है। अगर कोई ड्रिंक वायरल हो जाता है, तो उसकी डिमांड अचानक कई गुना बढ़ जाती है। यही वजह है कि कंपनियां अब सिर्फ स्वाद पर नहीं, बल्कि ‘वायरल अपील’ पर भी काम कर रही हैं। पैकेजिंग, नाम और कलर कॉम्बिनेशन तक इस तरह डिजाइन किए जा रहे हैं कि वो सोशल मीडिया पर ध्यान खींच सकें।
कंपनियों की स्ट्रेटेजी में बड़ा बदलाव
फूड और बेवरेज कंपनियों के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण भी है और अवसरों से भरा भी है। अब उन्हें सिर्फ बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन नहीं करना, बल्कि तेजी से बदलते ट्रेंड्स के हिसाब से नए प्रोडक्ट लॉन्च करने पड़ रहे हैं। कंपनियां अब अपने प्रोडक्शन सिस्टम को ज्यादा फ्लेक्सिबल बना रही हैं ताकि वे जल्दी-जल्दी नए फ्लेवर बाजार में ला सकें। कई ब्रांड यह भी मानते हैं कि आने वाले समय में सफलता उन्हीं की होगी जो जेन ज़ी की पसंद को जल्दी समझकर उसे अपनाएंगे।
भारतीय ड्रिंक मार्केट में बड़ा ग्रोथ ट्रेंड
भारत का सॉफ्ट ड्रिंक और फ्लेवर्ड बेवरेज मार्केट लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार आने वाले समय में इस सेक्टर में डबल डिजिट ग्रोथ की संभावना है। इसका सबसे बड़ा कारण युवा आबादी और बदलती लाइफस्टाइल है। भारत में प्रति व्यक्ति ड्रिंक कंजम्पशन अभी भी कई देशों के मुकाबले कम है, इसलिए यहां ग्रोथ की काफी संभावनाएं हैं। जैसे-जैसे शहरीकरण बढ़ रहा है और लोगों की आमदनी बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए-नए ड्रिंक्स की मांग भी बढ़ रही है।
छोटे शहरों में भी बढ़ रही मांग
पहले यह ट्रेंड सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित था, लेकिन अब छोटे शहरों और कस्बों में भी फ्लेवर्ड ड्रिंक्स की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। दुकानों और रेस्टोरेंट्स में नए-नए फ्लेवर की मांग साफ दिखाई दे रही है। युवा अब सिर्फ ट्रेडिशनल पेय पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि वे हर जगह कुछ नया ट्राय करना चाहते हैं। यही वजह है कि कंपनियां अब अपने प्रोडक्ट्स को ज्यादा से ज्यादा जगहों तक पहुंचाने पर ध्यान दे रही हैं।
आगे क्या हो सकता है इस मार्केट में?
अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो आने वाले समय में ड्रिंक मार्केट पूरी तरह बदल सकता है। पारंपरिक सॉफ्ट ड्रिंक्स की जगह नए फ्लेवर्ड और हेल्थ-फोकस्ड ड्रिंक्स ले सकते हैं। इसके अलावा टेक्नोलॉजी और इनोवेशन भी इस सेक्टर को और आगे ले जाएंगे। आने वाले समय में ऐसे ड्रिंक्स भी आ सकते हैं जो पूरी तरह कस्टमाइज्ड होंगे यानी ग्राहक अपनी पसंद का फ्लेवर खुद चुन सकेंगे।
कुल मिलाकर जेन ज़ी ने ड्रिंक इंडस्ट्री को एक नई दिशा दे दी है। अब यह सिर्फ ड्रिंक्स का बाजार नहीं रहा, बल्कि एक इनोवेशन और लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है। फ्लेवर्ड ड्रिंक्स की बढ़ती मांग इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में कंपनियों को और ज्यादा क्रिएटिव और तेज होना पड़ेगा। जो ब्रांड जेन ज़ी की बदलती पसंद को समझ पाएंगे, वही इस नए दौर में आगे निकलेंगे और बाकी को पीछे रह जाना पड़ सकता है।









