भारत और सोने का रिश्ता सिर्फ निवेश तक सीमित नहीं माना जाता। यहां सोना परंपरा, सामाजिक प्रतिष्ठा, शादी-ब्याह और भावनाओं से जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि महंगाई बढ़े या कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएं, देश में गोल्ड की डिमांड कम होती नहीं दिखती। अब एक नई रिपोर्ट में सामने आया है कि भारतीय हर दिन करीब 2200 करोड़ रुपये का सोना खरीद रहे हैं। यह आंकड़ा सुनकर हर कोई हैरान है।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ता देशों में शामिल है। यहां हर साल 800 से 900 टन तक सोने की खपत होती है। खास बात यह है कि देश अपनी जरूरत का लगभग 99 प्रतिशत गोल्ड विदेशों से आयात करता है। यानी भारत में इस्तेमाल होने वाला ज्यादातर सोना दूसरे देशों से आता है।
आखिर कितना सोना खरीद रहे हैं भारतीय?
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल यानी WGC की रिपोर्ट के अनुसार भारत में लोग रोज औसतन 2.2 टन सोना खरीद रहे हैं। कीमत के हिसाब से यह करीब 2200 करोड़ रुपये प्रतिदिन बैठता है। अगर इस आंकड़े को सालाना स्तर पर देखा जाए तो यह बेहद बड़ा बाजार बन जाता है। भारत में सोने की मांग इतनी मजबूत है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिलता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत में सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जाता है। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव हो या आर्थिक अनिश्चितता, लोग गोल्ड खरीदना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं।
भारत में सोने की इतनी ज्यादा डिमांड क्यों?
भारत में सोने की मांग के पीछे सबसे बड़ा कारण सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराएं हैं। शादी-ब्याह में सोना खरीदना आज भी प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है। कई परिवारों में बेटियों के लिए सोना जमा करना परंपरा माना जाता है।
इसके अलावा दिवाली, धनतेरस, अक्षय तृतीया और दक्षिण भारत के कई त्योहारों में गोल्ड खरीदना शुभ माना जाता है। यही वजह है कि कीमतें बढ़ने के बावजूद लोग सोना खरीदना बंद नहीं करते। रिपोर्ट्स के मुताबिक देश में खरीदे जाने वाले कुल सोने का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा ज्वेलरी के रूप में इस्तेमाल होता है। बाकी गोल्ड कॉइन, बार और निवेश के रूप में खरीदा जाता है।
भारत सबसे ज्यादा सोना कहां से मंगाता है?
भारत में घरेलू गोल्ड उत्पादन बेहद कम है। इसलिए देश को अपनी जरूरत का लगभग पूरा सोना विदेशों से आयात करना पड़ता है। रिपोर्ट के अनुसार भारत सबसे ज्यादा गोल्ड स्विटज़रलैंड से आयात करता है। कुल गोल्ड इंपोर्ट में इसकी हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत बताई गई है।इसके बाद United Arab Emirates यानी UAE का नंबर आता है, जहां से करीब 16 प्रतिशत गोल्ड भारत पहुंचता है। इसके अलावा साउथ अफ्रीका और पेरु भी भारत के बड़े गोल्ड सप्लायर देशों में शामिल हैं। जानकार बताते हैं कि स्विट्जरलैंड दुनिया का बड़ा गोल्ड रिफाइनिंग हब माना जाता है। दुनिया के कई देशों से निकला सोना वहां प्रोसेस होकर भारत जैसे देशों तक पहुंचता है।
दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा डिमांड
भारत में दक्षिणी राज्यों में सोने की मांग सबसे ज्यादा मानी जाती है। खासकर केरलम और तमिलनाडु में पारंपरिक रूप से गोल्ड खरीदने का चलन काफी मजबूत है। शादी और त्योहारों में यहां बड़ी मात्रा में सोने की खरीद होती है। यही वजह है कि दक्षिण भारत को देश का सबसे बड़ा गोल्ड मार्केट माना जाता है।
पीएम मोदी की अपील के बाद बढ़ी चर्चा
हाल ही में पीएम मोदी ने लोगों से गैर-जरूरी सोने की खरीद कम करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि जरूरत से ज्यादा गोल्ड इंपोर्ट देश के विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार घाटे पर दबाव बढ़ाता है। वेस्ट एशिया में तनाव और बढ़ते आयात बिल को देखते हुए सरकार अब गोल्ड इंपोर्ट कम करने की कोशिश कर रही है। इसी वजह से पिछले कुछ दिनों में गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गईं।
सरकार ने बढ़ाई इंपोर्ट ड्यूटी
भारत सरकार ने हाल ही में सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी है। सरकार का मानना है कि इससे गोल्ड इंपोर्ट कुछ कम हो सकता है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा। नई ड्यूटी में 10 प्रतिशत बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5 प्रतिशत एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस शामिल है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में गोल्ड की मांग इतनी मजबूत है कि सिर्फ ड्यूटी बढ़ाने से खरीद पूरी तरह नहीं रुकेगी।
क्या महंगा हो जाएगा सोना?
इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। क्योंकि भारत अपनी जरूरत का लगभग पूरा सोना विदेशों से खरीदता है, इसलिए आयात महंगा होने का असर सीधे ग्राहकों पर पड़ता है। ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि शादी सीजन और त्योहारों के दौरान मांग फिर भी बनी रह सकती है। लेकिन निवेश के तौर पर खरीदारी करने वाले लोग थोड़ा इंतजार कर सकते हैं।
क्या फिर बढ़ेगी तस्करी?
एक्सपर्ट्स ने यह चिंता भी जताई है कि ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी से गोल्ड स्मगलिंग यानी तस्करी फिर बढ़ सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि ऊंची ड्यूटी की वजह से अवैध गोल्ड कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है। दरअसल, जब भारत में सोना ज्यादा महंगा हो जाता है तो कुछ लोग अवैध तरीके से विदेशों से गोल्ड लाने की कोशिश करते हैं। पहले भी ऊंची ड्यूटी के समय ऐसे मामले बढ़ चुके हैं।
शेयर बाजार से ज्यादा भरोसा गोल्ड पर?
पिछले कुछ समय में शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं की वजह से लोगों का रुझान फिर गोल्ड की तरफ बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार 2026 की पहली तिमाही में भारत के गोल्ड ETF में निवेश 186 प्रतिशत तक बढ़ गया। इससे साफ है कि लोग अभी भी गोल्ड को सुरक्षित निवेश मान रहे हैं। खासकर जब वैश्विक तनाव, महंगाई और आर्थिक अस्थिरता बढ़ती है, तब गोल्ड की मांग और बढ़ जाती है।
भारत का गोल्ड लव नहीं हो रहा कम
जानकार मानते हैं कि भारत में सोने की मांग सिर्फ आर्थिक कारणों से नहीं, बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक वजहों से भी जुड़ी है। यही कारण है कि सरकार की अपील, बढ़ती कीमतें और ऊंची इंपोर्ट ड्यूटी के बावजूद गोल्ड की चमक लोगों के बीच कम होती नहीं दिख रही।
हालांकि आने वाले समय में सरकार गोल्ड इंपोर्ट कम करने के लिए और कदम उठा सकती है। लेकिन फिलहाल इतना तय है कि भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड बाजारों में बना रहेगा और भारतीयों का ‘गोल्ड लव’ जल्द खत्म होता नजर नहीं आ रहा।









