आज के दौर में मोबाइल पर कुछ ही मिनटों में लोन मिलने का दावा करने वाले ऐप्स तेजी से बढ़ गए हैं। 'नो सिबिल चेक', '5 मिनट में पैसा', 'बिना दस्तावेज़ लोन' जैसे विज्ञापन सोशल मीडिया, यूट्यूब और व्हाट्सऐप पर हर जगह दिखाई देते हैं। लेकिन इन आसान लोन के पीछे अब एक बड़ा साइबर फ्रॉड नेटवर्क काम कर रहा है। भारत में फेक लोन ऐप्स का खतरा लगातार बढ़ रहा है और हजारों लोग इसका शिकार बन चुके हैं।
साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक ये ऐप्स सिर्फ लोगों को लोन देने के लिए नहीं बनाए जाते, बल्कि उनका असली मकसद लोगों का निजी डेटा चुराना, ब्लैकमेल करना और आर्थिक नुकसान पहुंचाना होता है। कई मामलों में लोगों की फोटो मॉर्फ करके उनके रिश्तेदारों और कॉन्टैक्ट्स को भेजी गईं। कहीं फर्जी रिकवरी एजेंट बनकर धमकियां दी गईं तो कहीं बैंक खाते खाली कर दिए गए।
आखिर कैसे काम करते हैं फेक लोन ऐप्स?
फेक लोन ऐप्स का तरीका लगभग एक जैसा होता है। पहले सोशल मीडिया पर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं। लोगों को कहा जाता है कि बिना ज्यादा कागजी प्रक्रिया के तुरंत लोन मिलेगा। कई ऐप्स दावा करते हैं कि खराब सिबिल स्कोर होने पर भी लोन मिल जाएगा। जब यूजर ऐप डाउनलोड करता है, तब ऐप मोबाइल के कॉन्टैक्ट्स, फोटो गैलरी, एसएमएस, लोकेशन और कॉल लॉग तक की परमिशन मांगता है। बहुत से लोग बिना पढ़े सारी परमिशन दे देते हैं। यहीं से खतरा शुरू होता है।
कुछ ऐप्स शुरुआत में छोटा लोन देकर भरोसा जीतते हैं। फिर बहुत ज्यादा ब्याज और छिपे हुए चार्ज जोड़ दिए जाते हैं। समय पर पैसा नहीं देने पर लोगों को धमकियां दी जाती हैं। कई मामलों में उनके परिवार और दोस्तों को कॉल करके बदनाम करने की कोशिश की जाती है।
भारत में कितनी बड़ी हो चुकी है समस्या?
हाल के वर्षों में डिजिटल लेंडिंग ऐप्स का बाजार तेजी से बढ़ा है। लेकिन इसी के साथ फर्जी ऐप्स की संख्या भी बढ़ी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक RBI ने 2024 में 600 से ज्यादा अनऑथराइज्ड लेंडिंग ऐप्स को फ्लैग किया था।
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि हर साल हजारों शिकायतें साइबर सेल और CERT-In तक पहुंच रही हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार हर साल 2500 से ज्यादा शिकायतें सिर्फ लोन ऐप फ्रॉड से जुड़ी आती हैं। केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली और तेलंगाना जैसे राज्यों में ऐसे मामलों में तेजी देखी गई है। कई मामलों में लोग मानसिक तनाव तक में पहुंच गए। कुछ राज्यों में तो आत्महत्या से जुड़े मामले भी सामने आए थे, जिसके बाद सरकार और RBI को सख्त कदम उठाने पड़े।
NBFC का नाम लेकर लोगों को बनाया जा रहा निशाना
अब सबसे बड़ा खतरा यह है कि कई फेक ऐप्स खुद को RBI रजिस्टर्ड NBFC यानी नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी से जुड़ा हुआ बताते हैं। वे किसी असली कंपनी का नाम या लोगो इस्तेमाल करके लोगों को भरोसे में लेते हैं।
कई यूजर्स को लगता है कि ऐप वैध है क्योंकि उसमें किसी NBFC का नाम लिखा होता है। लेकिन जांच करने पर पता चलता है कि या तो कंपनी का उस ऐप से कोई संबंध नहीं होता या फिर पूरी जानकारी फर्जी होती है। इसी वजह से अब एक्सपर्ट्स सलाह दे रहे हैं कि किसी भी ऐप पर भरोसा करने से पहले RBI की आधिकारिक NBFC सूची में उसका नाम जरूर जांचना चाहिए।
डेटा चोरी बन रही सबसे बड़ी समस्या
फेक लोन ऐप्स सिर्फ पैसे की ठगी नहीं करते, बल्कि डेटा चोरी का बड़ा माध्यम भी बन चुके हैं। कई ऐप्स यूजर्स की फोटो, आधार, पैन और कॉन्टैक्ट लिस्ट तक एक्सेस ले लेते हैं। बाद में इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए किया जाता है। कुछ मामलों में लोगों की एडिट की हुई तस्वीरें उनके रिश्तेदारों को भेजी गईं। कहीं व्हाट्सऐप ग्रुप बनाकर बदनाम किया गया। साइबर एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह सिर्फ वित्तीय अपराध नहीं, बल्कि गंभीर प्राइवेसी खतरा भी है।
सरकार और RBI क्या कर रहे हैं?
फर्जी लोन ऐप्स के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार और RBI ने कई कदम उठाए हैं। RBI ने डिजिटल लेंडिंग को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इन नियमों के तहत कोई भी लोन ऐप बिना स्पष्ट अनुमति के यूजर के कॉन्टैक्ट्स, फोटो या कॉल लॉग एक्सेस नहीं कर सकता। सरकार ने गूगल और दूसरे प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर कई फर्जी ऐप्स हटाने की कार्रवाई भी की है। RBI ने लोगों को 'सैशे पोर्टल' के जरिए शिकायत दर्ज करने की सुविधा दी है। हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह ने भी साइबर फ्रॉड रोकने के लिए AI आधारित सिस्टम लाने की बात कही है, ताकि फर्जी ट्रांजैक्शन और मनी म्यूल नेटवर्क को जल्दी पकड़ा जा सके।
कैसे पहचानें कि ऐप फर्जी है?
साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार कुछ संकेत ऐसे हैं जिनसे फेक ऐप्स की पहचान की जा सकती है। अगर कोई ऐप बहुत जल्दी लोन देने का दावा करे, बहुत ज्यादा परमिशन मांगे या एडवांस फीस मांगे, तो सतर्क हो जाना चाहिए। अगर ऐप के पास सही वेबसाइट, ग्राहक सहायता या स्पष्ट कंपनी जानकारी नहीं है, तो भी सावधानी जरूरी है। सिर्फ प्ले स्टोर रेटिंग देखकर भरोसा करना सही नहीं माना जाता, क्योंकि कई फर्जी ऐप्स नकली रिव्यू भी खरीद लेते हैं।
अगर फंस जाएं तो क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति को लगे कि वह फेक लोन ऐप का शिकार हो गया है, तो तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। सबसे पहले ऐप को अनइंस्टॉल करें और बैंक खाते व यूपीआई से जुड़े पासवर्ड बदलें। इसके बाद तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें या रिपोर्ट दर्ज करें। RBI के सैशे पोर्टल पर भी शिकायत की जा सकती है। साइबर एक्सपर्ट्स कहते हैं कि जल्दी शिकायत करने पर पैसे रिकवर होने की संभावना बढ़ जाती है।
क्यों बढ़ रहा है यह खतरा?
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आर्थिक दबाव, बेरोजगारी और आसान लोन की जरूरत की वजह से लोग जल्दी ऐसे ऐप्स के झांसे में आ जाते हैं। कई लोग बैंक से लोन न मिलने पर इन ऐप्स का सहारा लेते हैं। यही वजह है कि साइबर अपराधी अब डिजिटल लेंडिंग को बड़ा हथियार बना चुके हैं। सोशल मीडिया विज्ञापन और व्हाट्सऐप प्रमोशन के जरिए वे तेजी से लोगों तक पहुंच रहे हैं।
जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव
एक्सपर्ट्स का कहना है कि फेक लोन ऐप्स से बचने का सबसे अच्छा तरीका जागरूकता है। किसी भी 'इंस्टेंट लोन' ऑफर पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। हमेशा RBI रजिस्टर्ड संस्थानों से ही लोन लेना चाहिए और किसी भी ऐप को जरूरत से ज्यादा परमिशन नहीं देनी चाहिए। क्योंकि आज के डिजिटल दौर में सिर्फ पैसा ही नहीं, बल्कि आपका डेटा भी अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन चुका है।









