कश्मीर और जम्मू की कनेक्टिविटी को लेकर केंद्र सरकार लगातार बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। पहले वंदे भारत ट्रेन और USBRL प्रोजेक्ट ने जम्मू-कश्मीर को देश के रेल नेटवर्क से नई मजबूती से जोड़ा, और अब बुलेट ट्रेन को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। अमृतसर से जम्मू तक प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर यानी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गया है। 

इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद अमृतसर से जम्मू का सफर, जो अभी करीब 5 से 6 घंटे का लगता है, वह घटकर सिर्फ 2 घंटे के आसपास रह जाएगा। यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक नई ट्रेन सेवा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और धार्मिक यात्राओं के लिए गेमचेंजर बताया जा रहा है। खासकर माता वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं और पंजाब-जम्मू के कारोबारियों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है। 

 

आखिर क्या है पूरा प्रोजेक्ट?

अमृतसर-जम्मू हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर एक प्रस्तावित बुलेट ट्रेन नेटवर्क है, जिसे National High Speed Rail Corporation Limited यानी NHSRCL तैयार कर रही है। यह कॉरिडोर करीब 240 किलोमीटर लंबा होगा और इसे दिल्ली-अमृतसर हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का एक्सटेंशन माना जा रहा है। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक NHSRCL ने अब इस प्रोजेक्ट के लिए फाइनल अलाइनमेंट डिजाइन, एरियल सर्वे और LiDAR सर्वे से जुड़े टेंडर जारी किए हैं। यानी अब प्रोजेक्ट शुरुआती चर्चा से निकलकर जमीन पर आगे बढ़ने लगा है। बताया जा रहा है कि इस हाई-स्पीड रेल लाइन पर ट्रेनें 250 से 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती हैं। ट्रैक को 350 किलोमीटर प्रति घंटे तक की स्पीड के हिसाब से डिजाइन किया जाएगा।

 

किन शहरों से होकर गुजरेगी बुलेट ट्रेन?

प्रस्तावित रूट के मुताबिक यह हाई-स्पीड रेल लाइन अमृतसर से शुरू होकर बटाला, गुरदासपुर, पठानकोट, सांबा और जम्मू तवी तक जाएगी। यानी पंजाब और जम्मू-कश्मीर के कई बड़े शहर सीधे हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। यह रूट धार्मिक और व्यावसायिक दोनों लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। अमृतसर में स्वर्ण मंदिर और जम्मू-कश्मीर में वैष्णो देवी धाम की वजह से हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। ऐसे में यह ट्रेन धार्मिक पर्यटन को बड़ा बढ़ावा दे सकती है। 

 

जम्मू-कश्मीर के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?

जम्मू-कश्मीर लंबे समय तक सड़क और मौसम आधारित कनेक्टिविटी की समस्याओं से जूझता रहा है। खासकर सर्दियों और बारिश के दौरान जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे कई बार बंद हो जाता है। ऐसे में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को इलाके के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। 

हाल ही में जम्मू से श्रीनगर तक वंदे भारत ट्रेन सेवा शुरू होने के बाद यात्रा समय काफी घटा है। अब जम्मू से श्रीनगर का सफर पांच घंटे से कम में पूरा हो रहा है। अब अगर अमृतसर से जम्मू तक बुलेट ट्रेन शुरू हो जाती है तो जम्मू-कश्मीर की देश के बाकी हिस्सों से कनेक्टिविटी और ज्यादा मजबूत हो जाएगी। इससे पर्यटन, होटल इंडस्ट्री, ट्रांसपोर्ट और लोकल व्यापार को भी फायदा मिल सकता है।

 

मोदी सरकार के बड़े रेल विजन का हिस्सा

केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों से भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क पर तेजी से काम कर रही है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पहले से निर्माणाधीन है और उसे भारत का पहला बुलेट ट्रेन कॉरिडोर माना जा रहा है। इसके अलावा दिल्ली-वाराणसी, दिल्ली-अमृतसर, मुंबई-पुणे, हैदराबाद-बेंगलुरु और चेन्नई-बेंगलुरु जैसे कई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर भी योजना बन रही है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पहले भी कह चुके हैं कि आने वाले समय में भारत में रेल यात्रा हवाई यात्रा को कड़ी टक्कर देगी। सरकार का लक्ष्य बड़े शहरों के बीच यात्रा समय को काफी कम करना है। 

 

हाईटेक तकनीक का होगा इस्तेमाल

इस प्रोजेक्ट में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक LiDAR सर्वे, ड्रोन मैपिंग और एरियल सर्वे टेक्नोलॉजी के जरिए पूरे रूट का अध्ययन किया जाएगा। LiDAR तकनीक की मदद से इलाके की बेहद सटीक 3D मैपिंग की जाती है। इससे पहाड़ी और कठिन इलाकों में रेल लाइन डिजाइन करना आसान होता है। जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्र में यह तकनीक बेहद अहम मानी जा रही है।

 

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बड़ा फायदा

इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा असर धार्मिक पर्यटन पर पड़ सकता है। अमृतसर का स्वर्ण मंदिर और जम्मू-कश्मीर का वैष्णो देवी धाम दोनों देश के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में गिने जाते हैं। हर साल करोड़ों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। अगर हाई-स्पीड रेल शुरू होती है तो पंजाब, दिल्ली और उत्तर भारत के दूसरे हिस्सों से जम्मू पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा। इससे होटल, ट्रैवल और लोकल बिजनेस सेक्टर में भी तेजी आने की उम्मीद है।

 

क्या कश्मीर तक भी पहुंचेगी बुलेट ट्रेन?

फिलहाल यह प्रोजेक्ट अमृतसर से जम्मू तक प्रस्तावित है, लेकिन इसे भविष्य में कश्मीर तक बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है। रेलवे पहले ही USBRL प्रोजेक्ट के जरिए कश्मीर घाटी को रेल नेटवर्क से जोड़ चुका है।ऐसे में आने वाले सालों में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को जम्मू से आगे श्रीनगर तक बढ़ाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा। हालांकि अभी इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

 

अभी कितने साल लग सकते हैं?

हालांकि प्रोजेक्ट पर सर्वे का काम शुरू हो चुका है, लेकिन बुलेट ट्रेन जैसे प्रोजेक्ट को पूरा होने में कई साल लगते हैं। पहले Detailed Project Report यानी DPR तैयार होगी, फिर जमीन अधिग्रहण और निर्माण का काम शुरू होगा। 

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को भी पूरा होने में कई साल लग रहे हैं। ऐसे में अमृतसर-जम्मू हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को शुरू होने में भी लंबा समय लग सकता है। लेकिन इतना तय है कि यह प्रोजेक्ट जम्मू-कश्मीर की कनेक्टिविटी के इतिहास में बड़ा बदलाव ला सकता है।

 

बदलती तस्वीर का नया संकेत

एक समय था जब जम्मू-कश्मीर में रेल कनेक्टिविटी भी सपना मानी जाती थी। लेकिन अब वंदे भारत से लेकर बुलेट ट्रेन तक की चर्चा हो रही है। यह दिखाता है कि आने वाले वर्षों में जम्मू-कश्मीर सिर्फ पर्यटन का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का भी बड़ा हब बन सकता है।