आज के समय में देश में एक्सप्रेसवे का नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा है। लंबी दूरी का सफर पहले के मुकाबले आसान और तेज हो गया है। बेहतर सड़कें, कम ट्रैफिक और ज्यादा स्पीड की वजह से लोग एक्सप्रेसवे को पसंद करते हैं। लेकिन यही तेज रफ्तार कई बार बड़ी दुर्घटनाओं की वजह भी बन जाती है।

हाल ही में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर हुए एक दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर एक्सप्रेसवे पर सुरक्षित ड्राइविंग की जरूरत को सामने ला दिया। इस हादसे में एक कार और एसयूवी की टक्कर हुई, जिसमें कई लोगों की जान चली गई। शुरुआती जानकारी के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि कार छूटे हुए एग्जिट पर वापस जाने के लिए एक्सप्रेसवे पर रिवर्स कर रही थी। इस घटना से सीख मिलती है कि एक्सप्रेसवे पर छोटी सी गलती भी बड़ी दुर्घटना में बदल सकती है। इसलिए लंबी यात्रा से पहले कुछ जरूरी नियमों को समझना बेहद जरूरी है। 

1. एक्सप्रेसवे पर कभी भी गाड़ी रिवर्स न करें

एक्सप्रेसवे पर सबसे बड़ी गलती जो लोग कर बैठते हैं, वह है एग्जिट छूट जाने पर गाड़ी पीछे करना। कई ड्राइवर सोचते हैं कि कुछ मीटर पीछे जाकर रास्ता पकड़ लेंगे, लेकिन एक्सप्रेसवे पर ऐसा करना बेहद खतरनाक होता है। यहां वाहन बहुत तेज गति से चलते हैं। आमतौर पर एक्सप्रेसवे पर गाड़ियां 100 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे ज्यादा की रफ्तार से चल सकती हैं।

ऐसे में अगर कोई गाड़ी अचानक पीछे की ओर चल रही हो तो पीछे से आने वाले वाहन चालक को प्रतिक्रिया देने का बहुत कम समय मिलता है। अगर आपका एग्जिट छूट जाए तो परेशान न हों। हमेशा आगे वाले एग्जिट से निकलकर वापस आएं। कुछ किलोमीटर ज्यादा चलना आपकी जिंदगी से ज्यादा कीमती नहीं हो सकता। कई लोग जल्दी पहुंचने या समय बचाने के चक्कर में यह गलती कर देते हैं, लेकिन एक्सप्रेसवे पर कुछ मिनट बचाने की कोशिश जानलेवा साबित हो सकती है।

2. सिर्फ कार की सेफ्टी रेटिंग पर भरोसा न करें

आजकल कार खरीदते समय लोग सेफ्टी रेटिंग को काफी महत्व देते हैं। 5 स्टार सेफ्टी रेटिंग वाली कारों की मांग भी बढ़ी है। लेकिन यह समझना जरूरी है कि सेफ्टी रेटिंग आपको हर हादसे से बचाने की गारंटी नहीं देती। क्रैश टेस्ट नियंत्रित परिस्थितियों में किए जाते हैं, जबकि सड़क पर दुर्घटनाएं अलग-अलग परिस्थितियों में होती हैं।

जैसे तेज रफ्तार, दूसरी गाड़ी का वजन, टक्कर का एंगल और ड्राइवर की प्रतिक्रिया जैसी चीजें हादसे के असर को बदल देती हैं।  इसलिए अच्छी सेफ्टी रेटिंग वाली कार लेना अच्छा फैसला है, लेकिन इसके साथ सुरक्षित ड्राइविंग भी उतनी ही जरूरी है। सीट बेल्ट लगाना, सही स्पीड रखना और ट्रैफिक नियमों का पालन करना किसी भी सुरक्षा फीचर से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

3. एक्सप्रेसवे पर दूर तक देखकर ड्राइव करें

तेज रफ्तार पर गाड़ी चलाते समय सिर्फ अपनी कार के आगे कुछ मीटर तक देखना काफी नहीं होता। ड्राइवर को सड़क पर काफी दूर तक नजर रखनी चाहिए ताकि आने वाले खतरे का अंदाजा पहले लगाया जा सके। मान लीजिए कोई वाहन अचानक धीमा हो रहा है, कोई गाड़ी गलत तरीके से लेन बदल रही है या सड़क पर कोई बाधा आ गई है, तो दूर तक देखने वाला ड्राइवर समय रहते फैसला ले सकता है। 

100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर कार हर सेकंड काफी दूरी तय करती है। ऐसे में अचानक सामने आई चीज पर तुरंत प्रतिक्रिया देना मुश्किल हो सकता है।ड्राइविंग के दौरान हमेशा उस जगह पर नजर रखें जहां आपको जाना है। विशेषज्ञों के अनुसार ड्राइवर की नजर जिस दिशा में होती है, वाहन अक्सर उसी दिशा में नियंत्रित होता है।

 

लेन बदलते समय रखें खास सावधानी

एक्सप्रेसवे पर लेन बदलना भी एक बड़ा जोखिम हो सकता है। कई बार लोग बिना इंडिकेटर दिए अचानक लेन बदल देते हैं, जिससे पीछे आने वाले वाहन को संभलने का मौका नहीं मिलता। लेन बदलने से पहले:

  • शीशे में पीछे की स्थिति देखें
  • इंडिकेटर दें
  • धीरे-धीरे लेन बदलें
  • तेज रफ्तार वाहन के सामने अचानक न आएं

याद रखें कि एक्सप्रेसवे पर हर वाहन की गति ज्यादा होती है, इसलिए छोटे फैसले भी सोच-समझकर लेने चाहिए।

 

सुरक्षित दूरी बनाए रखना क्यों जरूरी है?

कई बार लोग आगे वाली गाड़ी के बहुत करीब चलने लगते हैं। इसे टेलगेटिंग कहा जाता है। अगर आगे वाली गाड़ी अचानक ब्रेक लगाए तो पीछे वाली कार को संभलने का समय नहीं मिलता। हाईवे और एक्सप्रेसवे पर पर्याप्त दूरी बनाए रखना सुरक्षित ड्राइविंग का सबसे अहम हिस्सा है। एक सामान्य सलाह यह है कि सामने वाले वाहन से इतना अंतर रखें कि अचानक ब्रेक लगाने पर आपको प्रतिक्रिया देने का समय मिल सके। बारिश, कोहरा या रात के समय यह दूरी और बढ़ा देनी चाहिए।

 

तेज रफ्तार हमेशा सुरक्षित नहीं होती

एक्सप्रेसवे का मतलब यह नहीं कि हर समय अधिकतम स्पीड से गाड़ी चलानी है। सड़क की स्थिति, मौसम और ट्रैफिक के हिसाब से स्पीड तय करनी चाहिए। तेज रफ्तार में गलती की गुंजाइश बहुत कम हो जाती है। एक सेकंड की देरी भी बड़ा नुकसान कर सकती है।

 

थकान में ड्राइविंग से बचें

लंबे सफर में ड्राइवर की थकान भी दुर्घटना का बड़ा कारण बन सकती है। लगातार कई घंटे गाड़ी चलाने से ध्यान कम हो सकता है और प्रतिक्रिया समय बढ़ सकता है। जरूरत पड़ने पर ब्रेक लें, आराम करें और फिर आगे बढ़ें।

 

हमारी राय 

एक्सप्रेसवे ने सफर को आसान और तेज बना दिया है, लेकिन यहां सुरक्षित ड्राइविंग की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। एग्जिट मिस होने पर रिवर्स न करना, सिर्फ सेफ्टी रेटिंग पर निर्भर न रहना और दूर तक देखकर गाड़ी चलाना तीन ऐसे नियम हैं जो कई हादसों को रोक सकते हैं। सड़क पर सबसे जरूरी चीज स्पीड नहीं बल्कि सावधानी है। क्योंकि मंजिल तक जल्दी पहुंचने से ज्यादा जरूरी है कि आप सुरक्षित पहुंचें।