बाइक चलाते समय हेलमेट पहनना सिर्फ ट्रैफिक नियमों को पूरा करना नहीं है, बल्कि यह आपकी जिंदगी बचाने वाला सबसे जरूरी सुरक्षा उपकरण है। अक्सर लोग हेलमेट को तब तक नहीं बदलते जब तक वह टूट न जाए या दिखने में खराब न लगे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हेलमेट भी एक समय के बाद अपनी सुरक्षा क्षमता खो सकता है? बाहर से बिल्कुल नया दिखने वाला हेलमेट अंदर से कमजोर हो सकता है। 

कई लोग सोचते हैं कि अगर हेलमेट में कोई दरार नहीं है तो वह पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता। हेलमेट की मजबूती सिर्फ उसकी बाहरी प्लास्टिक की परत से तय नहीं होती, बल्कि उसके अंदर मौजूद सुरक्षा लेयर भी उतनी ही जरूरी होती है। 

 

हेलमेट की भी होती है एक उम्र

जिस तरह कार के टायर, बैटरी और दूसरी चीजों की एक लाइफ होती है, उसी तरह हेलमेट की भी एक सीमित उम्र होती है। हेलमेट के अंदर एक खास तरह का फोम लगाया जाता है जिसे EPS लाइनर कहा जाता है। यही फोम दुर्घटना के समय सिर पर पड़ने वाले झटके को कम करने का काम करता है। 

समय के साथ धूप, गर्मी, पसीना, धूल और नमी की वजह से हेलमेट के अंदर मौजूद सामग्री प्रभावित हो सकती है। इससे उसकी झटका सहने की क्षमता कम हो सकती है और हादसे के समय वह पहले जैसा सुरक्षा कवच नहीं दे पाएगा। 

 

5 साल बाद हेलमेट बदलने की सलाह क्यों दी जाती है?

सेफ्टी एक्सपर्ट्स और कई हेलमेट मेकर्स आमतौर पर सलाह देते हैं कि सामान्य इस्तेमाल के बाद करीब 5 साल में हेलमेट बदल देना चाहिए। इसका कारण यह है कि लगातार इस्तेमाल से हेलमेट के अंदर के हिस्से धीरे-धीरे कमजोर हो सकते हैं। 

यह जरूरी नहीं कि 5 साल पूरे होते ही हेलमेट अचानक बेकार हो जाए, लेकिन समय के साथ उसकी सुरक्षा क्षमता कम हो सकती है। खासकर अगर हेलमेट रोजाना इस्तेमाल होता है, तेज धूप में रहता है या सही तरीके से रखा नहीं जाता तो उसका असर जल्दी दिख सकता है। 

 

सिर्फ बाहर से देखकर हेलमेट को सुरक्षित न मानें

कई बार हेलमेट ऊपर से बिल्कुल सही दिखाई देता है, लेकिन अंदर का फोम दब चुका होता है या कमजोर हो चुका होता है। ऐसे में देखने से यह पता लगाना मुश्किल होता है कि हेलमेट कितना सुरक्षित बचा है। अगर हेलमेट किसी बड़े एक्सीडेंट में लग चुका है तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए। कई बार अंदर की संरचना खराब हो जाती है लेकिन बाहर से कोई निशान दिखाई नहीं देता। 

 

गिरने के बाद भी बदल देना चाहिए हेलमेट

अगर बाइक से गिरते समय हेलमेट जमीन से टकराया है तो उसे बदल देना बेहतर होता है। क्योंकि हेलमेट का काम ही यही है कि वह झटके को अपने ऊपर लेकर आपके सिर को बचाए। एक बार बड़ा इंपैक्ट लेने के बाद अंदर का सुरक्षा फोम कमजोर हो सकता है। अगली बार दुर्घटना होने पर वह उतना प्रभावी नहीं रहेगा। 

 

कैसे पहचानें कि हेलमेट बदलने का समय आ गया है?

कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिनसे पता चलता है कि अब नया हेलमेट लेने का समय आ गया है। अगर हेलमेट सिर पर पहले की तरह फिट नहीं बैठ रहा, ज्यादा ढीला महसूस हो रहा है या स्ट्रैप ठीक से लॉक नहीं हो रही है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसके अलावा अगर हेलमेट के बाहरी हिस्से में दरार दिख रही है, रंग बहुत ज्यादा फीका पड़ गया है या अंदर की पैडिंग खराब हो गई है तो नया हेलमेट लेना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है। 

 

लंबे समय तक हेलमेट इस्तेमाल न करने पर भी असर पड़ सकता है

कुछ लोग हेलमेट खरीदकर सालों तक रख देते हैं और सोचते हैं कि इस्तेमाल नहीं किया इसलिए यह नया ही रहेगा। लेकिन लंबे समय तक रखा रहने पर भी हेलमेट की सामग्री पर असर पड़ सकता है। खासकर अगर हेलमेट गर्म जगह, धूप या नमी वाली जगह पर रखा गया है तो उसकी लाइफ कम हो सकती है। 

 

हेलमेट को ज्यादा समय तक सुरक्षित कैसे रखें?

अगर आप चाहते हैं कि आपका हेलमेट ज्यादा समय तक अच्छी स्थिति में रहे तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। हेलमेट को हमेशा सीधी धूप से बचाकर रखें। बाइक की सीट पर लंबे समय तक छोड़ने से बचें क्योंकि गर्मी और धूप से इसकी सामग्री प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा हेलमेट को साफ रखने के लिए तेज केमिकल का इस्तेमाल न करें। हल्के साबुन और पानी से सफाई करना बेहतर होता है। 

 

नया हेलमेट लेते समय किन बातों का ध्यान रखें?

सिर्फ डिजाइन या रंग देखकर हेलमेट नहीं खरीदना चाहिए। सबसे पहले उसकी सुरक्षा रेटिंग, फिटिंग और क्वालिटी देखनी चाहिए। हेलमेट न ज्यादा ढीला होना चाहिए और न ही इतना टाइट कि लंबे समय तक पहनने में परेशानी हो। सही फिटिंग वाला हेलमेट ही दुर्घटना के समय बेहतर सुरक्षा देता है।

 

हेलमेट पर खर्च करना क्यों जरूरी है?

कई लोग हेलमेट खरीदते समय पैसे बचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह समझना जरूरी है कि हेलमेट कोई फैशन एक्सेसरी नहीं बल्कि आपकी सुरक्षा का साधन है। एक अच्छा हेलमेट दुर्घटना में सिर की गंभीर चोट से बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है। इसलिए सिर्फ सस्ता हेलमेट लेने के बजाय अच्छी क्वालिटी और सही सुरक्षा मानकों वाला हेलमेट लेना चाहिए। 

 

हमारी राय

हेलमेट को लेकर सबसे बड़ी गलती यही होती है कि लोग इसे सिर्फ एक ट्रैफिक नियम मान लेते हैं। जबकि असल में यह आपकी जिंदगी की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। अगर आपका हेलमेट कई साल पुराना हो चुका है, फिटिंग खराब हो गई है या कभी बड़े हादसे में इस्तेमाल हुआ है तो उसे बदलने में देरी नहीं करनी चाहिए। कुछ हजार रुपये बचाने के चक्कर में अपनी सुरक्षा से समझौता करना सही फैसला नहीं है। बाइक चलाते समय अच्छी स्पीड, सही ड्राइविंग और सुरक्षित हेलमेट, ये तीनों चीजें आपकी यात्रा को सुरक्षित बनाती हैं। इसलिए हेलमेट की उम्र और उसकी हालत को नजरअंदाज न करें।