अगर आपने कभी रात में लंबा सफर किया है, तो एक परेशानी का सामना जरूर किया होगा। सामने से आने वाली गाड़ी की तेज हाई बीम लाइट अचानक आंखों पर पड़ती है और कुछ सेकंड के लिए सड़क साफ दिखाई देना बंद हो जाता है। कई बार यही कुछ सेकंड बड़े हादसे की वजह बन जाते हैं।

भारत में रात के समय होने वाले सड़क हादसों का एक बड़ा कारण गलत तरीके से हाई बीम का इस्तेमाल भी माना जाता है। यही वजह है कि सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ हमेशा सलाह देते हैं कि रात में ड्राइविंग करते समय सिर्फ अपनी गाड़ी चलाना ही नहीं, बल्कि सामने से आने वाली गाड़ियों की रोशनी को भी सही तरीके से संभालना आना चाहिए। हाल ही में इसी विषय पर एक रिपोर्ट में बताया गया है कि हाई बीम की तेज रोशनी से बचने और स्पीड को नियंत्रित रखने का सही गणित समझना बेहद जरूरी है। 

 

आखिर हाई बीम इतनी खतरनाक क्यों होती है?

कार में दो तरह की हेडलाइट होती हैं, लो बीम और हाई बीम। लो बीम पास की सड़क को रोशन करती है, जबकि हाई बीम काफी दूर तक रोशनी पहुंचाती है।समस्या तब होती है जब सामने से आने वाला वाहन बिना जरूरत हाई बीम का इस्तेमाल करता है। इसकी तेज रोशनी सीधे सामने वाले ड्राइवर की आंखों पर पड़ती है, जिससे कुछ पल के लिए विजिबिलिटी काफी कम हो जाती है। इस दौरान सड़क, पैदल यात्री, जानवर या गड्ढे तक साफ नहीं दिखते और दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। 

 

स्पीड और विजिबिलिटी का क्या है असली गणित?

रात में ड्राइविंग का सबसे बड़ा नियम है कि आपकी गाड़ी की स्पीड उतनी ही होनी चाहिए, जितनी दूरी तक आपको सड़क साफ दिखाई दे रही है। अगर आपकी हेडलाइट लगभग 50 से 60 मीटर तक सड़क को साफ रोशन कर रही है और आप उससे कहीं ज्यादा तेज रफ्तार से गाड़ी चला रहे हैं, तो अचानक सामने कोई रुकावट आने पर ब्रेक लगाने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलेगा। यही वजह है कि विशेषज्ञ रात में दिन के मुकाबले थोड़ी कम स्पीड रखने की सलाह देते हैं। इससे अचानक आई किसी भी स्थिति में प्रतिक्रिया देने का समय मिल जाता है। 

 

सामने से हाई बीम आए तो क्या करें?

कई लोग तेज रोशनी देखकर सीधे उसी तरफ देखने लगते हैं। यही सबसे बड़ी गलती होती है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसी स्थिति में सामने वाली हेडलाइट को लगातार देखने के बजाय अपनी नजर सड़क के बाईं ओर बनी सफेद या पीली लेन मार्किंग पर रखें। इससे दिशा भी बनी रहती है और आंखें तेज रोशनी से भी बच जाती हैं। जैसे ही सामने वाला वाहन निकल जाए, सामान्य तरीके से आगे देखना शुरू करें। 

 

एंटी-ग्लेयर ग्लासेस कितने काम आते हैं?

अगर आपको अक्सर रात में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है तो एंटी-ग्लेयर ड्राइविंग ग्लासेस उपयोगी हो सकते हैं। ये सामने से आने वाली तेज रोशनी की चमक को कुछ हद तक कम कर देते हैं और आंखों पर पड़ने वाला दबाव घटा सकते हैं। हालांकि अगर आपकी नजर कमजोर है तो सबसे पहले डॉक्टर की सलाह के अनुसार सही नंबर का चश्मा पहनना ज्यादा जरूरी है। सिर्फ एंटी-ग्लेयर चश्मा हर समस्या का समाधान नहीं होता। 

 

खुद भी हाई बीम का गलत इस्तेमाल न करें

भारत में अक्सर देखा जाता है कि लोग शहर के अंदर भी लगातार हाई बीम पर गाड़ी चलाते रहते हैं। इससे सामने वाले ड्राइवर को परेशानी होती है। हाई बीम का इस्तेमाल केवल उन सड़कों पर करना चाहिए जहां पर्याप्त रोशनी न हो और सामने कोई वाहन न आ रहा हो। जैसे ही सामने से कोई गाड़ी दिखाई दे, तुरंत लो बीम पर आ जाना चाहिए। यही सुरक्षित और जिम्मेदार ड्राइविंग का तरीका है। 

 

विंडशील्ड साफ रखना भी है जरूरी

अगर आपकी कार के शीशे धूल, धब्बों या धुंध से भरे हुए हैं तो सामने से आने वाली रोशनी और ज्यादा फैल जाती है। इससे ग्लेयर बढ़ जाता है और विजिबिलिटी कम हो जाती है। इसलिए रात में निकलने से पहले विंडशील्ड, रियर ग्लास और दोनों साइड के शीशों को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। साथ ही हेडलाइट्स पर जमी धूल भी साफ कर दें ताकि आपकी अपनी रोशनी भी बेहतर मिले। 

 

रियर व्यू मिरर का नाइट मोड इस्तेमाल करें

ज्यादातर कारों के अंदर वाले रियर व्यू मिरर में नाइट मोड दिया जाता है। अगर पीछे से आने वाली गाड़ी की तेज रोशनी परेशान कर रही हो तो इस मोड का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे पीछे की हेडलाइट की चमक काफी कम महसूस होती है और ड्राइविंग ज्यादा आरामदायक बन जाती है। 

 

अगर आंखें थक गई हों तो ड्राइविंग से बचें

रात में लगातार कई घंटे गाड़ी चलाने से आंखें थक जाती हैं। ऐसे में हाई बीम की चमक और ज्यादा परेशान करती है। अगर नींद आ रही हो या आंखों में जलन महसूस हो रही हो तो कुछ देर किसी सुरक्षित जगह पर रुककर आराम करना बेहतर होता है। थकान की स्थिति में ड्राइविंग करना किसी भी हालत में सुरक्षित नहीं माना जाता।

 

बारिश या कोहरे में रखें अतिरिक्त सावधानी

बारिश और कोहरे में हाई बीम का इस्तेमाल कई बार उल्टा नुकसान पहुंचाता है। तेज रोशनी पानी की बूंदों या धुंध से टकराकर वापस आंखों में आती है, जिससे सामने का दृश्य और धुंधला हो सकता है। ऐसी स्थिति में लो बीम का इस्तेमाल करना अधिक सुरक्षित माना जाता है और स्पीड भी सामान्य से कम रखनी चाहिए।

 

अपनी कार की हेडलाइट की भी जांच करें

कई बार समस्या सिर्फ सामने वाले वाहन की नहीं होती। अगर आपकी कार की हेडलाइट का एंगल गलत है या आफ्टरमार्केट LED बहुत तेज लगी हुई है तो उससे भी दूसरे ड्राइवरों को परेशानी हो सकती है। समय-समय पर हेडलाइट का एलाइनमेंट और फोकस चेक कराना चाहिए ताकि रोशनी सड़क पर पड़े, सामने वाले ड्राइवर की आंखों पर नहीं।

 

हमारी राय

रात में ड्राइविंग के दौरान हाई बीम की तेज रोशनी एक आम लेकिन गंभीर समस्या है। कुछ सेकंड की अस्थायी ‘ब्लाइंडनेस’ भी बड़ा हादसा करा सकती है। इसलिए सिर्फ दूसरों से सही व्यवहार की उम्मीद करने के बजाय खुद भी जिम्मेदार ड्राइवर बनना जरूरी है।

कम स्पीड, सही बीम का इस्तेमाल, साफ शीशे, जरूरत पड़ने पर एंटी-ग्लेयर चश्मा और सड़क पर पूरा ध्यान, ये छोटी-छोटी बातें आपकी और दूसरों की जान बचा सकती हैं। याद रखें, रात में सुरक्षित ड्राइविंग का सबसे बड़ा नियम यही है कि आपकी गाड़ी हमेशा उतनी ही तेज चले, जितनी दूर तक आपको सड़क साफ दिखाई दे।