सरकार की पीएम विश्वकर्मा योजना अब और भी आधुनिक होती जा रही है। इस योजना के तहत पारंपरिक कारीगरों को अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इसका मकसद है कि जो लोग सालों से अपने हाथों के हुनर से काम कर रहे हैं, वे अब नई टेक्नोलॉजी सीखकर अपने काम को और आगे बढ़ा सकें।

आज के समय में सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल भी जरूरी हो गया है। यही वजह है कि सरकार इस योजना के जरिए कारीगरों को डिजिटल और AI से जोड़ने की कोशिश कर रही है, ताकि उनका काम और कमाई दोनों बढ़ सके।

 

क्या है पीएम विश्वकर्मा योजना?

पीएम विश्वकर्मा योजना एक केंद्र सरकार की खास योजना है, जिसे 17 सितंबर 2023 को शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य देश के पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक और तकनीकी मदद देना है। 

इस योजना के तहत उन लोगों को फायदा मिलता है जो हाथों और औजारों से काम करते हैं, जैसे बढ़ई, लोहार, दर्जी, कुम्हार, नाई और कई अन्य पारंपरिक काम करने वाले लोग। सरकार का लक्ष्य है कि ऐसे कारीगर सिर्फ अपने पुराने तरीके तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़ा जाए, ताकि वे अपने काम को एक बेहतर बिजनेस में बदल सकें।

 

AI ट्रेनिंग से क्या बदलेगा?

अब इस योजना में AI ट्रेनिंग जोड़ने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कारीगर अपने काम को स्मार्ट तरीके से कर पाएंगे। उदाहरण के लिए, अगर कोई कारीगर फर्नीचर बनाता है, तो वह AI की मदद से नए डिजाइन बना सकता है या बाजार में क्या चल रहा है, यह समझ सकता है।

इसी तरह जो लोग कपड़े सिलते हैं या हस्तशिल्प बनाते हैं, वे AI टूल्स की मदद से नए पैटर्न और डिजाइन तैयार कर सकते हैं। इससे उनका काम ज्यादा आकर्षक बनेगा और ज्यादा ग्राहक मिलेंगे। सरल शब्दों में कहें तो AI ट्रेनिंग कारीगरों को हुनर और तकनीक का कॉम्बिनेशन देगी, जिससे उनकी कमाई बढ़ने की पूरी संभावना है।

 

योजना से मिलने वाले मुख्य फायदे

पीएम विश्वकर्मा योजना पहले से ही कई सुविधाएं देती है, और अब AI ट्रेनिंग जुड़ने से इसका फायदा और बढ़ गया है। इस योजना के तहत कारीगरों को स्किल ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें उन्हें हर दिन लगभग 500 रुपये का स्टाइपेंड भी मिलता है। इसके अलावा उन्हें 15,000 रुपये तक का टूलकिट भी दिया जाता है, जिससे वे अपने काम के लिए जरूरी औजार खरीद सकें। 

अगर कोई कारीगर अपना काम शुरू करना या बढ़ाना चाहता है, तो उसे बिना गारंटी के 3 लाख रुपये तक का लोन भी मिल सकता है, जिस पर केवल 5% ब्याज देना होता है। इसके साथ ही डिजिटल पेमेंट करने पर इंसेंटिव, मार्केट से जुड़ने का मौका और सरकारी पहचान पत्र (ID कार्ड) भी दिया जाता है, जिससे कारीगरों को एक अलग पहचान मिलती है। 

 

किन लोगों को मिलेगा इस योजना का लाभ?

इस योजना का लाभ वही लोग उठा सकते हैं जो पारंपरिक काम करते हैं और जिनकी उम्र कम से कम 18 साल है। इसमें कुल 18 तरह के काम शामिल किए गए हैं, जैसे बढ़ई, लोहार, कुम्हार, दर्जी, जूता बनाने वाले, माली, नाई आदि। सबसे जरूरी बात यह है कि यह योजना खास तौर पर उन लोगों के लिए है जो छोटे स्तर पर अपना काम करते हैं और जिन्हें आगे बढ़ने के लिए मदद की जरूरत है।

 

कैसे करें आवेदन?

पीएम विश्वकर्मा योजना में आवेदन करना काफी आसान है। इसके लिए कारीगर अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। वहां आधार कार्ड के जरिए उनका बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया जाता है।  इसके बाद उनके आवेदन को पंचायत या स्थानीय निकाय द्वारा जांचा जाता है और फिर जिला स्तर पर मंजूरी दी जाती है। एक बार रजिस्ट्रेशन पूरा हो जाने के बाद कारीगर को ट्रेनिंग, लोन और बाकी सुविधाओं का फायदा मिलना शुरू हो जाता है।

 

कारीगरों के लिए क्यों है यह योजना खास?

भारत में आज भी लाखों लोग पारंपरिक काम से अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। लेकिन उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे पैसे की कमी, नई तकनीक की जानकारी का अभाव और बाजार तक पहुंच न होना।

ऐसे में पीएम विश्वकर्मा योजना उनके लिए एक बड़ा सहारा बनकर आई है। यह योजना न सिर्फ उन्हें आर्थिक मदद देती है, बल्कि उन्हें नए जमाने के हिसाब से तैयार भी करती है। AI ट्रेनिंग जुड़ने के बाद यह योजना और भी खास हो गई है, क्योंकि अब कारीगर सिर्फ काम ही नहीं करेंगे, बल्कि स्मार्ट तरीके से काम करके ज्यादा कमाई भी कर पाएंगे।

 

देश की अर्थव्यवस्था को भी होगा फायदा

जब छोटे कारीगर आगे बढ़ेंगे, तो इसका फायदा पूरे देश को मिलेगा। छोटे-छोटे काम बड़े बिजनेस में बदल सकते हैं, जिससे रोजगार के नए मौके पैदा होंगे।इसके अलावा भारत के पारंपरिक उत्पादों को देश और विदेश में पहचान मिलेगी। इससे “मेक इन इंडिया” और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियान को भी मजबूती मिलेगी।

पीएम विश्वकर्मा योजना अब सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि कारीगरों के लिए एक नई उम्मीद बन चुकी है। AI ट्रेनिंग के जुड़ने से यह साफ हो गया है कि सरकार पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक से जोड़ना चाहती है। अगर इस योजना का सही तरीके से फायदा उठाया जाए, तो लाखों कारीगर अपनी जिंदगी बदल सकते हैं। यह पहल न सिर्फ लोगों को आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी।