एक समय भारत की इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर मार्केट में सबसे बड़ा नाम मानी जाने वाली Ola Electric इन दिनों मुश्किल दौर से गुजरती दिखाई दे रही है। कंपनी के चौथी तिमाही यानी Q4 नतीजे सामने आने के बाद इसके शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। कई ब्रोकरेज फर्म्स ने भी कंपनी को लेकर चिंता जताई है और कुछ ने तो ‘सेल’ रेटिंग तक दे दी है।
यही वजह है कि अब निवेशकों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि आखिर ओला इलेक्ट्रिक के साथ हो क्या रहा है। हाल ही में आए नतीजों के बाद कंपनी के शेयर करीब 4 से 6 प्रतिशत तक टूट गए। बाजार में निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता कंपनी की गिरती बिक्री, घटती मार्केट हिस्सेदारी और लगातार बढ़ते प्रतिस्पर्धी दबाव को लेकर है।
Q4 में क्या रहा सबसे बड़ा झटका?
कंपनी के ताजा वित्तीय नतीजों के अनुसार ओला इलेक्ट्रिक का राजस्व यानी रेवेन्यू सालाना आधार पर करीब 57 प्रतिशत तक गिर गया। पिछले साल जहां कंपनी का रेवेन्यू 600 करोड़ रुपये से ज्यादा था, वहीं इस बार यह घटकर करीब 265 करोड़ रुपये रह गया।
हालांकि कंपनी का घाटा कुछ कम जरूर हुआ है। क्यू4 में कंपनी का नेट लॉस करीब 500 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 42 प्रतिशत कम है। लेकिन इसके बावजूद बाजार खुश नहीं दिखा। वजह यह है कि निवेशक सिर्फ घाटा कम होने को नहीं बल्कि कंपनी की कुल ग्रोथ और भविष्य की संभावनाओं को भी देखते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर किसी कंपनी की बिक्री तेजी से गिर रही हो तो सिर्फ घाटा कम होना पर्याप्त नहीं माना जाता। निवेशक यह जानना चाहते हैं कि कंपनी भविष्य में दोबारा मजबूत वापसी कर पाएगी या नहीं।
आखिर क्यों गिर रही है कंपनी की बिक्री?
ओला इलेक्ट्रिक कभी भारत के ईवी स्कूटर बाजार की सबसे बड़ी कंपनी मानी जाती थी। लेकिन पिछले कुछ महीनों में उसकी मार्केट हिस्सेदारी तेजी से घटी है। कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कंपनी की हिस्सेदारी अब एक समय के लगभग 50 प्रतिशत स्तर से गिरकर सिंगल डिजिट तक पहुंच चुकी है।
इसके पीछे कई वजहें मानी जा रही हैं। सबसे बड़ा कारण बढ़ती प्रतिस्पर्धा है। अब बाजार में TVS Motor Company, Bajaj Auto और Ather Energy जैसी कंपनियां काफी मजबूत तरीके से उतर चुकी हैं। इन कंपनियों के पास पहले से बड़ा डीलर नेटवर्क और सर्विस इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। दूसरी तरफ ओला इलेक्ट्रिक को सर्विस और क्वालिटी से जुड़ी शिकायतों का भी सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया पर कई ग्राहकों ने स्कूटर खराब होने, सर्विस सेंटर में देरी और स्पेयर पार्ट्स की कमी जैसी समस्याएं उठाईं।
ब्रोकरेज फर्म्स क्यों हो गईं सतर्क?
कंपनी के नतीजों के बाद कई ब्रोकरेज फर्म्स ने चिंता जताई है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी की रिकवरी आसान नहीं होगी। खासकर तब जब बाजार में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। एक रिपोर्ट में कहा गया कि ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों में अभी और गिरावट आ सकती है। कुछ ब्रोकरेज फर्म्स ने तो करीब 35 प्रतिशत तक डाउनसाइड की आशंका जताई है।
ब्रोकरेज हाउस का कहना है कि कंपनी अभी भी कई बड़े जोखिमों से जूझ रही है। इनमें बिक्री में गिरावट, बाजार हिस्सेदारी का कम होना, कैश फ्लो की चिंता और बढ़ता खर्च शामिल है। इसके अलावा निवेशकों को यह भी डर है कि कंपनी को आगे चलकर और पूंजी जुटानी पड़ सकती है।
कुछ अच्छी खबरें भी हैं
हालांकि पूरी तस्वीर सिर्फ नकारात्मक नहीं है। कंपनी ने दावा किया है कि उसने लागत कम करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी का ग्रॉस मार्जिन सुधरा है और उसने पहली बार पॉजिटिव ऑपरेटिंग कैश फ्लो दर्ज करने का भी संकेत दिया है।
ओला इलेक्ट्रिक अब अपने खर्च कम करने, ऑटोमेशन बढ़ाने और बैटरी सेल्स का उत्पादन खुद करने पर फोकस कर रही है। कंपनी का मानना है कि इससे आने वाले समय में उसकी लागत कम होगी और मुनाफे की राह आसान बन सकती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल सेगमेंट में भी बड़ा दांव लगाने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि स्कूटर बाजार के मुकाबले मोटरसाइकिल बाजार कहीं ज्यादा बड़ा है और अगर वहां सफलता मिली तो कंपनी को फायदा हो सकता है।
निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या ओला इलेक्ट्रिक दोबारा पहले जैसी स्थिति हासिल कर पाएगी। एक समय कंपनी को भारत की ईवी क्रांति का चेहरा माना जाता था। कंपनी के आईपीओ को लेकर भी काफी उत्साह था। लेकिन अब लगातार गिरते शेयर और कमजोर नतीजों ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया है।
कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया कि कंपनी का शेयर अपने ऑल टाइम हाई से काफी नीचे आ चुका है। इससे छोटे निवेशकों को भी बड़ा नुकसान हुआ है। इसके अलावा बाजार में यह चिंता भी है कि अगर प्रतिस्पर्धा और बढ़ी तो ओला इलेक्ट्रिक को कीमतें कम करनी पड़ सकती हैं। इससे कंपनी के मार्जिन पर और दबाव पड़ सकता है।
क्या भारतीय ईवी बाजार धीमा पड़ रहा है?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार अभी भी लंबी अवधि में मजबूत माना जा रहा है। सरकार लगातार ईवी को बढ़ावा दे रही है और पेट्रोल की बढ़ती कीमतें भी लोगों को इलेक्ट्रिक वाहनों की तरफ आकर्षित कर रही हैं। लेकिन अब यह बाजार पहले जैसा आसान नहीं रहा। शुरुआत में ओला इलेक्ट्रिक को ‘फर्स्ट मूवर एडवांटेज’ मिला था, लेकिन अब लगभग हर बड़ी ऑटो कंपनी ईवी सेगमेंट में उतर चुकी है। ऐसे में ग्राहकों के पास विकल्प बढ़ गए हैं।
यही वजह है कि अब सिर्फ कम कीमत या हाई टेक फीचर्स से काम नहीं चलेगा। कंपनियों को मजबूत सर्विस नेटवर्क, भरोसेमंद क्वालिटी और बेहतर ग्राहक अनुभव भी देना होगा।
आगे कंपनी के सामने क्या चुनौती है?
ओला इलेक्ट्रिक के सामने सबसे बड़ी चुनौती ग्राहकों का भरोसा दोबारा जीतना है। अगर कंपनी सर्विस और क्वालिटी से जुड़ी समस्याएं दूर कर पाती है और साथ ही लागत कम करने में सफल रहती है, तो उसके लिए वापसी का रास्ता खुल सकता है। लेकिन अगर बिक्री में गिरावट जारी रही और कंपटीटर कंपनियां तेजी से आगे बढ़ती रहीं, तो मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। यही वजह है कि बाजार फिलहाल कंपनी को लेकर काफी सतर्क नजर आ रहा है।
फिलहाल इतना साफ है कि ओला इलेक्ट्रिक के लिए आने वाले कुछ क्वार्टर बेहद अहम रहने वाले हैं। कंपनी अब ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां उसके अगले कदम तय करेंगे कि वह भारतीय ईवी बाजार में फिर से मजबूत खिलाड़ी बन पाएगी या नहीं।









