भारत में लग्जरी और सुपरकार्स का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। अब सिर्फ बड़े बिजनेसमैन ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के करोड़पति, स्टार्टअप फाउंडर्स और सेलिब्रिटीज भी महंगी विदेशी कारों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। लेकिन इन कारों की कीमतें आमतौर पर इतनी ज्यादा होती हैं कि कई बार असली कीमत से ज्यादा पैसा टैक्स और इंपोर्ट ड्यूटी में चला जाता है। अब इसी बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सुपरकार प्रेमियों की उत्सुकता बढ़ा दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच होने वाला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी एफटीए कई यूरोपीय कार कंपनियों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है। इसका सबसे बड़ा फायदा फेरारी जैसी लग्जरी कार कंपनियों को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कहा जा रहा है कि इस समझौते के बाद भारत में फेरारी कारों की कीमत करोड़ों रुपये तक कम हो सकती है।
आखिर क्या है India-EU FTA?
एफटीए यानी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दो देशों या समूहों के बीच होने वाला ऐसा समझौता होता है, जिसमें व्यापार को आसान बनाने के लिए टैक्स और इंपोर्ट ड्यूटी कम की जाती है। भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच लंबे समय से इस समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी और अब यह अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
रिपोर्ट्स के अनुसार इस समझौते के लागू होने के बाद यूरोप में बनी गाड़ियों पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी धीरे-धीरे कम हो सकती है। अभी भारत में पूरी तरह विदेश से आने वाली कारों पर करीब सौ से एक सौ दस प्रतिशत तक ड्यूटी लगती है। यही वजह है कि विदेशों में जो कार तीन-चार करोड़ की होती है, वही भारत आते-आते दोगुनी कीमत तक पहुंच जाती है।
फेरारी को कैसे होगा फायदा?
फेरारी इटली की कंपनी है और उसकी कारें यूरोप में बनती हैं। इसलिए भारत-ईयू एफटीए का सीधा फायदा फेरारी को मिलने की संभावना जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इंपोर्ट ड्यूटी पहले चरण में करीब तीस से चालीस प्रतिशत तक लाई जा सकती है और बाद में यह घटकर दस प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
यही कारण है कि फेरारी ने कथित तौर पर भारत में अपनी कुछ कारों की बुकिंग पहले से ही कम कीमत पर लेना शुरू कर दिया है। हालांकि यह कम कीमत सिर्फ उन ग्राहकों के लिए लागू होगी जिन्हें कार की डिलीवरी एफटीए लागू होने के बाद मिलेगी।
फेरारी की कौन-कौन सी कारें हो सकती हैं सस्ती?
रिपोर्ट्स के अनुसार फिलहाल फेरारी की पेट्रोल इंजन वाली कारों पर ही इस संभावित राहत का असर दिखाई दे सकता है। इनमें फेरारी पुरोसांगुए, ट्वेल्वे सिलिंड्री कूपे, ट्वेल्वे सिलिंड्री स्पाइडर और अमाल्फी जैसी कारें शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि फेरारी पुरोसांगुए की मौजूदा एक्स-शोरूम कीमत करीब दस करोड़ पचास लाख रुपये है। एफटीए लागू होने के बाद इसकी कीमत घटकर लगभग सात करोड़ पैंतीस लाख रुपये तक पहुंच सकती है। यानी ग्राहकों को करीब तीन करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत हो सकती है।
इसी तरह ट्वेल्वे सिलिंड्री स्पाइडर की कीमत करीब नौ करोड़ पंद्रह लाख रुपये से घटकर लगभग छह करोड़ चालीस लाख रुपये तक आ सकती है। वहीं ट्वेल्वे सिलिंड्री कूपे की कीमत भी करीब ढाई करोड़ रुपये तक कम होने की संभावना जताई जा रही है।
हर फेरारी नहीं होगी सस्ती
हालांकि यहां एक अहम बात समझना जरूरी है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अभी सिर्फ पेट्रोल कारों के लिए टैक्स ढांचे को लेकर स्पष्टता है। फेरारी की हाइब्रिड कारों को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है।फेरारी की कुछ लोकप्रिय हाइब्रिड कारें जैसे टू नाइंटी सिक्स जीटीबी और टू नाइंटी सिक्स जीटीएस फिलहाल इस संभावित राहत से बाहर रह सकती हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रिक कारों पर शुरुआती पांच साल तक इंपोर्ट ड्यूटी में छूट नहीं मिलने की भी बात कही जा रही है। यानी आने वाले समय में पेट्रोल फेरारी कारें तो सस्ती हो सकती हैं, लेकिन इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड मॉडल्स पर अभी भी भारी टैक्स लग सकता है।
भारत में क्यों बढ़ रहा है सुपरकार्स का बाजार?
पिछले कुछ वर्षों में भारत में लग्जरी कारों की मांग तेजी से बढ़ी है। मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे शहरों में अब फेरारी, लैम्बॉर्गिनी और रोल्स रॉयस जैसी कारें पहले के मुकाबले ज्यादा दिखाई देने लगी हैं। सोशल मीडिया ने भी इस ट्रेंड को काफी बढ़ावा दिया है।
आजकल युवा उद्यमी और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स भी लग्जरी लाइफस्टाइल को खुलकर दिखा रहे हैं। ऐसे में सुपरकार्स सिर्फ ट्रांसपोर्ट का साधन नहीं, बल्कि स्टेटस सिंबल बन चुकी हैं। यही वजह है कि अगर कीमतों में करोड़ों रुपये की कमी आती है तो भारत में इन कारों की बिक्री और तेजी से बढ़ सकती है।
सिर्फ फेरारी ही नहीं, दूसरी कंपनियों को भी होगा फायदा
भारत-ईयू एफटीए का असर सिर्फ फेरारी तक सीमित नहीं रहेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक बीएमडब्ल्यू, ऑडी, मर्सिडीज-बेंज, लैम्बॉर्गिनी, बेंटले और रोल्स रॉयस जैसी कई यूरोपीय कंपनियों को भी इसका फायदा मिल सकता है।
हालांकि कुछ कंपनियों ने अभी साफ कहा है कि कीमतें तुरंत कम नहीं होंगी। इसकी वजह यह है कि समझौते को पूरी तरह लागू होने में समय लग सकता है और ड्यूटी कटौती भी चरणबद्ध तरीके से होगी। यानी यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि अगले ही महीने सारी विदेशी कारें अचानक सस्ती हो जाएंगी। लेकिन आने वाले कुछ वर्षों में इसका असर धीरे-धीरे दिखाई दे सकता है।
क्या भारतीय ऑटो बाजार पर पड़ेगा असर?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर विदेशी लग्जरी कारें सस्ती होती हैं तो भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। इससे प्रीमियम सेगमेंट में ग्राहकों को ज्यादा विकल्प मिलेंगे। हालांकि सरकार घरेलू ऑटो उद्योग को नुकसान से बचाने के लिए धीरे-धीरे बदलाव कर सकती है। इसी कारण इलेक्ट्रिक कारों पर तुरंत राहत नहीं देने की बात सामने आई है। माना जा रहा है कि सरकार भारतीय ईवी कंपनियों को शुरुआती वर्षों में सुरक्षा देना चाहती है।
क्या अभी फेरारी खरीदना फायदे का सौदा है?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अभी फेरारी बुक करना सही रहेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ डीलरशिप्स संभावित कम कीमतों के आधार पर बुकिंग लेना शुरू कर चुकी हैं। लेकिन इसमें एक शर्त है। अगर कार की डिलीवरी एफटीए लागू होने से पहले होती है तो ग्राहक को पुरानी ऊंची कीमत ही चुकानी पड़ेगी। यानी अभी जो भी कीमतें सामने आ रही हैं, वे पूरी तरह अनुमानित हैं। अंतिम कीमत इस बात पर निर्भर करेगी कि एफटीए का अंतिम ढांचा कैसा बनता है और उस समय यूरो और रुपये की विनिमय दर क्या रहती है।
फिर भी इतना तय माना जा रहा है कि आने वाले समय में भारत में सुपरकार्स का बाजार और बड़ा हो सकता है। अगर फेरारी जैसी कारें सच में करोड़ों रुपये सस्ती होती हैं तो यह भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगा।









