भारत में अब खाने-पीने की आदतें तेजी से बदल रही हैं। लोग स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी ध्यान रखने लगे हैं। यही वजह है कि अब बाजार में शुगर-फ्री और हेल्दी प्रोडक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। हाल ही में गृहमंत्री Amit Shah ने एक कार्यक्रम में दावा किया कि अमूल की शुगर-फ्री चॉकलेट भारत की सबसे ज्यादा बिकने वाली शुगर-फ्री चॉकलेट बन चुकी है। इसके बाद से एक बार फिर शुगर-फ्री चॉकलेट और डार्क चॉकलेट चर्चा में आ गई है।

दरअसल, लंबे समय तक चॉकलेट को सिर्फ बच्चों की पसंद या मीठे खाने की चीज माना जाता रहा। लेकिन अब इसे हेल्थ और मूड से भी जोड़कर देखा जा रहा है। खासकर डार्क चॉकलेट और शुगर-फ्री चॉकलेट को लेकर लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ी है। यही कारण है कि बड़ी कंपनियां भी इस दिशा में लगातार नए प्रोडक्ट लॉन्च कर रही हैं।

 

क्या कहा अमित शाह ने?

गुजरात के गांधीनगर में मधुर डेयरी के नए प्लांट के उद्घाटन के दौरान अमित शाह ने कहा कि अमूल की शुगर-फ्री चॉकलेट देश की नंबर वन सेलिंग शुगर-फ्री चॉकलेट है। उन्होंने इसे बड़ी उपलब्धि बताया। रिपोर्ट के मुताबिक अमूल का चॉकलेट कारोबार अब करीब चौदह सौ करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है और इसमें पिछले साल लगभग पचास प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 

बताया गया कि अमूल की शुगर-फ्री डार्क चॉकलेट कंपनी की कुल चॉकलेट बिक्री का लगभग दस प्रतिशत हिस्सा बन चुकी है। यह दिखाता है कि अब लोग सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि हेल्दी विकल्प भी तलाश रहे हैं। पहले जहां लोग ज्यादा मीठी चॉकलेट पसंद करते थे, वहीं अब कम शक्कर वाली चॉकलेट की मांग बढ़ रही है।

 

आखिर क्यों बढ़ रही है शुगर-फ्री चॉकलेट की डिमांड?

आजकल डायबिटीज, मोटापा और दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में लोग खाने-पीने में शक्कर कम करने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि शुगर-फ्री चॉकलेट अब सिर्फ बीमारी से जुड़ी जरूरत नहीं, बल्कि एक लाइफस्टाइल बनती जा रही है।

कई लोग मीठा छोड़ नहीं पाते, लेकिन ज्यादा शक्कर खाने से डरते हैं। ऐसे लोगों के लिए शुगर-फ्री चॉकलेट एक बेहतर विकल्प बनकर उभरी है। खास बात यह है कि अब कंपनियां स्वाद से भी समझौता नहीं कर रहीं। नई तकनीक और बेहतर सामग्री की वजह से शुगर-फ्री चॉकलेट का स्वाद पहले से काफी अच्छा हो गया है।

इसके अलावा फिटनेस को लेकर बढ़ती जागरूकता ने भी इस बाजार को मजबूत किया है। जिम जाने वाले लोग, डाइट फॉलो करने वाले युवा और कैलोरी पर नजर रखने वाले ग्राहक अब डार्क और शुगर-फ्री चॉकलेट को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

 

डार्क चॉकलेट से मिल सकते हैं कई फायदे

विशेषज्ञों के अनुसार सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट खाना शरीर के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसमें फ्लेवोनॉयड्स नाम के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचा सकते हैं। 

डार्क चॉकलेट दिल की सेहत के लिए अच्छी मानी जाती है। यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है और खून के प्रवाह को बेहतर बना सकती है। कुछ शोधों में यह भी कहा गया है कि डार्क चॉकलेट खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकती है।

इसके अलावा यह दिमाग के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है। माना जाता है कि कोको में मौजूद तत्व दिमाग तक ब्लड फ्लो बढ़ाने में मदद करते हैं, जिससे याददाश्त और ध्यान बेहतर हो सकता है। कई लोग काम के दौरान थोड़ा चॉकलेट खाने से खुद को ज्यादा एक्टिव महसूस करते हैं।

 

मूड बेहतर करने में भी मददगार

जब भी किसी का मूड खराब होता है तो अक्सर लोग चॉकलेट खाने की सलाह देते हैं। इसके पीछे वैज्ञानिक वजह भी मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार चॉकलेट शरीर में ऐसे हार्मोन के निर्माण को बढ़ावा देती है जो खुशी और आराम का एहसास दिलाते हैं।

इसी कारण तनाव या उदासी के समय लोग चॉकलेट खाना पसंद करते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि जरूरत से ज्यादा चॉकलेट खाना शुरू कर दिया जाए। किसी भी चीज की अधिकता नुकसान पहुंचा सकती है। लेकिन सीमित मात्रा में डार्क चॉकलेट मूड बेहतर करने में मदद कर सकती है।

 

बच्चों से लेकर युवाओं तक बदल रही पसंद

कुछ साल पहले तक भारत में ज्यादातर लोग मिल्क चॉकलेट ही पसंद करते थे। लेकिन अब युवाओं के बीच डार्क चॉकलेट का चलन तेजी से बढ़ा है। सोशल मीडिया और फिटनेस इंफ्लुएंसर्स ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। लोग अब खाने की चीजों के पैकेट पर कैलोरी, शक्कर और न्यूट्रिशन वैल्यू पढ़ने लगे हैं।

यही कारण है कि कंपनियां भी अब अलग-अलग तरह की हेल्दी चॉकलेट बाजार में ला रही हैं। कहीं प्रोटीन वाली चॉकलेट मिल रही है तो कहीं कम कैलोरी वाली। कुछ कंपनियां तो ऐसी चॉकलेट भी बेच रही हैं जिनमें ड्राय फ्रूट्स, ओट्स और सुपरफूड्स का इस्तेमाल किया जा रहा है।

 

क्या शुगर-फ्री चॉकलेट पूरी तरह सेफ है?

हालांकि शुगर-फ्री चॉकलेट को सामान्य चॉकलेट से बेहतर माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसे बिना सोचे-समझे ज्यादा मात्रा में खाया जाए। कई शुगर-फ्री प्रोडक्ट्स में आर्टिफिशियल स्वीटनर का इस्तेमाल होता है। इसलिए हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले और भरोसेमंद ब्रांड चुनने की सलाह दी जाती है।

विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि हेल्दी रहने के लिए सिर्फ शुगर-फ्री चॉकलेट खाना काफी नहीं है। संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और अच्छी जीवनशैली भी उतनी ही जरूरी है। चॉकलेट को एक संतुलित डाइट का छोटा हिस्सा माना जाना चाहिए, न कि पूरा हेल्थ फॉर्मूला।

 

भारत में तेजी से बदल रहा फूड मार्केट

भारत का फूड मार्केट अब तेजी से हेल्थ-कॉन्शियस दिशा में बढ़ रहा है। पहले जहां लोग सिर्फ स्वाद देखते थे, वहीं अब सेहत और पोषण भी बड़ा फैक्टर बन चुके हैं। यही वजह है कि हेल्दी स्नैक्स, शुगर-फ्री मिठाइयां और डार्क चॉकलेट जैसी चीजों की मांग बढ़ रही है।

अमित शाह के बयान ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि भारत में शुगर-फ्री चॉकलेट का बाजार तेजी से फैल रहा है। आने वाले समय में यह बाजार और बड़ा हो सकता है, क्योंकि नई पीढ़ी स्वाद और सेहत दोनों के बीच संतुलन बनाकर चलना चाहती है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि अब चॉकलेट सिर्फ मीठा खाने की चीज नहीं रही, बल्कि बदलती लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुकी है।