बॉलीवुड की बेबाक अभिनेत्री और सांसद Kangana Ranaut अक्सर अपनी फिल्मों, बयानों और निजी जिंदगी से जुड़े खुलासों को लेकर चर्चा में रहती हैं। आज कंगना इंडस्ट्री की सबसे सफल अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं, लेकिन उनके लिए यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। परिवार के विरोध से लेकर इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने तक, उन्होंने कई मुश्किल दौर देखे हैं।
हाल ही में कंगना से जुड़ा एक पुराना किस्सा फिर चर्चा में आ गया है। यह किस्सा उनके दिवंगत दादा से जुड़ा है, जो उनके एक फैसले से इतने नाराज हो गए थे कि उन्होंने गुस्से में उनसे अपने नाम से खानदान का नाम हटाने तक की बात कह दी थी। यह घटना उस दौर की है जब कंगना ने फिल्मों में करियर बनाने का फैसला किया था।
रूढ़िवादी परिवार से ताल्लुक रखती हैं कंगना
कंगना रनौत का परिवार मूल रूप से एक शिक्षित और पारंपरिक पृष्ठभूमि से आता है। उनके दादा ब्रह्म चंद रनौत एक आईएएस अधिकारी रहे थे और परिवार में पढ़ाई-लिखाई तथा सरकारी सेवाओं को काफी सम्मान की नजर से देखा जाता था। ऐसे माहौल में फिल्मों में करियर बनाने का फैसला हर किसी को स्वीकार नहीं था।
कंगना ने कम उम्र में ही अपने सपनों को पूरा करने के लिए घर छोड़ दिया था। पहले वह दिल्ली गईं और बाद में मुंबई पहुंचीं, जहां उन्होंने अभिनय की दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष शुरू किया। उस समय उनके परिवार के कई सदस्य उनके फैसले से सहमत नहीं थे।
एक्ट्रेस बनने का फैसला दादा को नहीं आया पसंद
कंगना ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि जब उनके परिवार को पता चला कि उन्होंने फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया है, तो घर में बहुत खुशी का माहौल नहीं था। खासकर उनके दादा इस फैसले से बेहद नाराज थे। उनका मानना था कि फिल्म इंडस्ट्री कोई सम्मानजनक पेशा नहीं है और परिवार की लड़की को इस क्षेत्र में नहीं जाना चाहिए।
कंगना के मुताबिक, दादा का गुस्सा इतना ज्यादा था कि उन्होंने उनसे अपने नाम के साथ लगा "रनौत" सरनेम तक हटाने के लिए कह दिया था। यह बात कंगना के लिए भी काफी भावुक और कठिन थी क्योंकि वह अपने सपनों के लिए लड़ रही थीं, लेकिन परिवार का एक बड़ा हिस्सा उनके खिलाफ खड़ा था।
घर छोड़कर सपनों के पीछे भागीं कंगना
आज जिस सफलता को देखकर लोग कंगना की तारीफ करते हैं, उसके पीछे वर्षों का संघर्ष छिपा है। किशोरावस्था में ही उन्होंने घर छोड़ दिया था। मुंबई पहुंचने के बाद उन्हें काम की तलाश में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई बार आर्थिक संकट भी आया और शुरुआती दिनों में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। लेकिन कंगना ने हार नहीं मानी। उन्होंने थिएटर सीखा, एक्टिंग की ट्रेनिंग ली और लगातार ऑडिशन देती रहीं। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें फिल्मों में मौका मिला।
'गैंगस्टर' से बदल गई किस्मत
साल 2006 में कंगना ने फिल्म Gangster से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। इस फिल्म में उनकी एक्टिंग को काफी सराहा गया और रातोंरात वह चर्चा में आ गईं। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छा प्रदर्शन किया और कंगना को इंडस्ट्री में मजबूत पहचान मिल गई।
हालांकि सफलता मिलने के बाद भी परिवार को उन्हें स्वीकार करने में समय लगा। एक अन्य इंटरव्यू में कंगना ने बताया था कि जब उनके माता-पिता ने उनकी पहली फिल्म देखी तो उनकी प्रतिक्रिया वैसी नहीं थी जैसी वह उम्मीद कर रही थीं। इससे उन्हें काफी दुख भी हुआ था।
परिवार को मनाने में लगा वक्त
कंगना के परिवार को फिल्मों की दुनिया को स्वीकार करने में काफी समय लगा। शुरुआत में उनके माता-पिता और रिश्तेदारों को लगता था कि यह करियर स्थायी नहीं है। लेकिन जब कंगना ने लगातार सफलता हासिल की और राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने लगीं, तब धीरे-धीरे परिवार का नजरिया बदलने लगा।
आज कंगना अपने परिवार के काफी करीब मानी जाती हैं और कई मौकों पर अपने माता-पिता तथा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ तस्वीरें भी साझा करती रहती हैं। हालांकि शुरुआती संघर्ष और विरोध का दौर उनके जीवन का अहम हिस्सा रहा है।
दादा से था खास लगाव
भले ही शुरुआत में उनके दादा उनके फैसले से नाराज थे, लेकिन कंगना हमेशा उनके बारे में सम्मान और प्यार से बात करती रही हैं। ब्रह्म चंद रनौत का दिसंबर 2020 में 90 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। उस समय कंगना ने भावुक संदेश साझा करते हुए बताया था कि पूरा परिवार उन्हें प्यार से ‘डैडी’ कहकर बुलाता था। उनके निधन की खबर ने कंगना को काफी भावुक कर दिया था। उन्होंने कहा था कि उनके दादा का हास्यबोध और व्यक्तित्व परिवार के लिए हमेशा यादगार रहेगा।
राजनीति और फिल्म दोनों में सक्रिय हैं कंगना
फिल्मों में सफलता हासिल करने के बाद कंगना ने राजनीति में भी कदम रखा। वह अब हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से सांसद हैं। अभिनय और राजनीति दोनों क्षेत्रों में उनकी सक्रिय मौजूदगी बनी हुई है। इन दिनों वह अपनी आगामी फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ को लेकर भी चर्चा में हैं। फिल्म के प्रमोशन के दौरान दिए गए उनके कई बयान भी सुर्खियां बटोर रहे हैं।
संघर्ष की कहानी से मिलती है सीख
कंगना रनौत की कहानी यह दिखाती है कि कई बार बड़े सपनों की कीमत परिवार के विरोध और सामाजिक दबाव के रूप में चुकानी पड़ती है। अगर उस समय कंगना अपने फैसले से पीछे हट जातीं, तो शायद आज वह उस मुकाम पर नहीं पहुंच पातीं जहां आज हैं। उनका सफर बताता है कि शुरुआत में विरोध करने वाले लोग भी समय के साथ आपकी सफलता को स्वीकार कर लेते हैं। जरूरी यह है कि व्यक्ति अपने लक्ष्य पर भरोसा बनाए रखे और मेहनत करता रहे।
हमारी राय
कंगना रनौत का यह किस्सा सिर्फ एक अभिनेत्री की निजी कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों युवाओं की कहानी भी है जो अपने सपनों के लिए पारंपरिक सोच से लड़ते हैं। हर पीढ़ी की अपनी सोच होती है और कई बार नए रास्तों को स्वीकार करने में समय लगता है। कंगना ने विरोध, संघर्ष और अस्वीकार किए जाने के बावजूद अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। यही वजह है कि आज उनका नाम बॉलीवुड की सबसे सफल और चर्चित अभिनेत्रियों में लिया जाता है। उनका सफर यह संदेश देता है कि अगर खुद पर भरोसा हो तो मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों में भी मंजिल हासिल की जा सकती है।









