आजकल घूमने-फिरने का ट्रेंड काफी बढ़ गया है। लोग वीकेंड ट्रिप, ऑफिस टूर या फिर पार्टनर के साथ क्वालिटी टाइम बिताने के लिए होटल बुक करते हैं। ऑनलाइन बुकिंग ऐप्स ने होटल लेना आसान तो बना दिया है, लेकिन इसके साथ कुछ खतरे भी बढ़े हैं। पिछले कुछ सालों में होटल रूम में हिडन कैमरा मिलने, चोरी होने, प्राइवेसी लीक होने और स्टाफ की लापरवाही जैसे कई मामले सामने आए हैं। ऐसे में सिर्फ अच्छा व्यू, सस्ता रेट या रोमांटिक एंबियंस देखना काफी नहीं है, होटल रूम की सेफ्टी भी उतनी ही जरूरी है।
अक्सर लोग होटल में पहुंचते ही थकान की वजह से सीधे बेड पर गिर जाते हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि कमरे में एंटर करने के शुरुआती 5 मिनट सबसे अहम होते हैं। अगर इसी दौरान कुछ जरूरी चीजें चेक कर ली जाएं, तो कई परेशानियों से बचा जा सकता है।
सबसे पहले दरवाजे और लॉक को चेक करें
होटल रूम में घुसते ही सबसे पहले दरवाजे की जांच करनी चाहिए। कई लोग सिर्फ कार्ड से दरवाजा खुल गया तो मान लेते हैं कि सब ठीक है। लेकिन असली सेफ्टी अंदर वाले लॉक, डेडबोल्ट और सेफ्टी चेन से होती है। इन्हें बंद करके देखिए कि ये सही से काम कर रहे हैं या नहीं। अगर लॉक ढीला लगे या चेन टूटी हो, तो तुरंत रिसेप्शन पर शिकायत करें और जरूरत पड़े तो कमरा बदलवा लें।
आजकल सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल होते हैं जिनमें होटल रूम में घुसपैठ की घटनाएं दिखाई जाती हैं। कुछ लोग अतिरिक्त सुरक्षा के लिए दरवाजे के पीछे कुर्सी भी लगा देते हैं। हालांकि हर होटल असुरक्षित नहीं होता, लेकिन थोड़ा सतर्क रहना हमेशा बेहतर माना जाता है।
हिडन कैमरा चेक करना जरुरी
कई लोग हिडन कैमरा वाली बात को ओवररिएक्शन समझते हैं, लेकिन बीते कुछ सालों में ऐसे मामले सामने आए हैं जहां होटल रूम की प्राइवेट वीडियो लीक हो गईं। इसलिए कमरे में एंटर करते ही एक बार हिडन कैमरा चेक जरूर कर लेना चाहिए।
इसके लिए कमरे की लाइट बंद करके मोबाइल कैमरा या फ्लैशलाइट की मदद ली जा सकती है। स्मोक डिटेक्टर, टीवी के आसपास, डिजिटल घड़ी, चार्जिंग पॉइंट, शोपीस और दीवार के कोनों को ध्यान से देखें। अगर कहीं छोटी सी ब्लिंकिंग लाइट दिखे या कोई डिवाइस अजीब लगे, तो उसे नजरअंदाज न करें। कई ट्रैवलर्स भी सोशल मीडिया और फोरम्स पर यही सलाह देते हैं कि प्राइवेसी को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
कमरे के हर कोने पर एक नजर डालना जरूरी
होटल का कमरा चाहे कितना भी साफ दिखे, एक बार पूरा रूम चेक कर लेना चाहिए। बेड के नीचे, अलमारी के अंदर, पर्दों के पीछे और सोफे के आसपास नजर डालें। कई बार लोग जल्दबाजी में कमरे में सामान रखकर बाहर निकल जाते हैं और बाद में कोई संदिग्ध चीज मिलने पर परेशानी होती है। विदेशी ट्रैवल एक्सपर्ट्स भी सलाह देते हैं कि कमरे में पहुंचने के बाद थोड़ी देर ऑब्जर्व जरूर करें। अगर कमरे में बदबू आ रही हो, चादर गंदी हो या बाथरूम ठीक न लगे, तो तुरंत होटल स्टाफ को बताना चाहिए।
खिड़की और बालकनी लॉक को हल्के में मत लीजिए
अगर आपके कमरे में बालकनी है या बड़ी खिड़की है, तो उसका लॉक जरूर चेक करें। खासकर लोअर फ्लोर वाले कमरों में यह और जरूरी हो जाता है। कई बार स्लाइडिंग डोर ठीक से लॉक नहीं होते और बाहर से खुल सकते हैं। ट्रैवल सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि ग्राउंड फ्लोर और सीढ़ियों या एग्जिट के पास वाले कमरे ज्यादा रिस्की हो सकते हैं। इसलिए जहां संभव हो, बीच के फ्लोर का कमरा लेना बेहतर माना जाता है।
Wifi इस्तेमाल करते वक्त भी रहें सावधान
आजकल होटल में पहुंचते ही लोग सबसे पहले वाई-फाई कनेक्ट करते हैं। लेकिन यही एक बड़ी गलती भी बन सकती है। साइबर एक्सपर्ट्स मानते हैं कि पब्लिक वाई-फाई पर बैंकिंग, UPI या निजी जानकारी शेयर करना रिस्की हो सकता है। अगर बहुत जरूरी न हो तो होटल वाई-फाई पर नेट बैंकिंग या पासवर्ड से जुड़ा काम न करें। कोशिश करें कि मोबाइल डेटा का इस्तेमाल करें। कई बार फर्जी वाई-फाई नेटवर्क भी बनाए जाते हैं जिनसे डेटा चोरी होने का खतरा रहता है।
कीमती सामान को खुले में न रखें
लोग अक्सर होटल में पहुंचकर कैश, ज्वेलरी, लैपटॉप या पासपोर्ट जैसी चीजें टेबल पर छोड़ देते हैं। लेकिन ऐसा करना सही नहीं माना जाता। अगर कमरे में लॉकर दिया गया है, तो उसका इस्तेमाल जरूर करें। होटल चोरी के मामले कम जरूर होते हैं, लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। ट्रैवल सेफ्टी गाइड्स के मुताबिक चोरी अक्सर मौके का फायदा उठाकर की जाती है। इसलिए जरूरी सामान हमेशा सुरक्षित जगह पर रखें।
इमरजेंसी एग्जिट जानना बेहद जरूरी
अधिकतर लोग होटल में रुकते समय फायर एग्जिट या इमरजेंसी रूट पर ध्यान ही नहीं देते। लेकिन आग लगने या किसी हादसे की स्थिति में यही जानकारी सबसे ज्यादा काम आती है। कमरे में पहुंचने के बाद एक बार एग्जिट रूट जरूर देख लें और रिसेप्शन नंबर मोबाइल में सेव कर लें। कई सेफ्टी एक्सपर्ट्स कहते हैं कि होटल में रुकते वक्त सिर्फ आराम नहीं, बेसिक तैयारी भी जरूरी होती है। छोटी-सी सावधानी मुश्किल समय में बड़ी मदद कर सकती है।
सिर्फ ‘कपल फ्रेंडली’ टैग देखकर भरोसा करना सही नहीं
आजकल कई होटल खुद को ‘कपल फ्रेंडली’ बताते हैं, लेकिन सोशल मीडिया और ऑनलाइन फोरम्स पर ऐसे कई अनुभव शेयर किए गए हैं जहां लोगों को खराब व्यवहार, प्राइवेसी की कमी या अचानक परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसलिए होटल बुक करने से पहले सिर्फ डिस्काउंट या टैग न देखें। होटल के रिव्यू पढ़ें, लोकेशन देखें और यह भी जानें कि वहां का स्टाफ कैसा व्यवहार करता है। अच्छे रिव्यू और भरोसेमंद होटल हमेशा ज्यादा सुरक्षित माने जाते हैं।
हमारी राय
होटल में रुकना आज के समय में आम बात है और ज्यादातर होटल पूरी तरह सुरक्षित भी होते हैं। लेकिन बदलते दौर में सिर्फ भरोसे के सहारे नहीं चला जा सकता। थोड़ी-सी सतर्कता आपका ट्रिप खराब होने से बचा सकती है। कमरे में घुसते ही 5 मिनट निकालकर जरूरी सेफ्टी चेक कर लेना कोई डर या शक नहीं, बल्कि समझदारी है। खासकर जब बात प्राइवेसी और सुरक्षा की हो, तब लापरवाही बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। आखिर घूमने का असली मजा तभी है, जब आप पूरी तरह सुरक्षित और तनावमुक्त महसूस करें।









