आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपनी सेहत पर उतना ध्यान नहीं दे पाते जितना देना चाहिए। खासकर Vitamin D की कमी एक बहुत आम समस्या बन चुकी है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक में देखने को मिल रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या सिर्फ धूप यानी sunlight से ही शरीर की Vitamin D की जरूरत पूरी हो सकती है या फिर इसके लिए सप्लीमेंट्स और डाइट की भी जरूरत होती है। हाल ही में डॉक्टरों ने इस पर साफ जानकारी दी है, जो हर किसी के लिए जानना जरूरी है। 

 

Vitamin D आखिर है क्या और क्यों जरूरी है?

Vitamin D एक ऐसा विटामिन है जो शरीर में कैल्शियम को एब्जॉर्ब करने में मदद करता है। इसका सीधा असर हमारी हड्डियों, दांतों और मांसपेशियों की मजबूती पर पड़ता है। अगर शरीर में Vitamin D की कमी हो जाए तो हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, थकान बढ़ जाती है और कई बार जोड़ों में दर्द भी शुरू हो जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक Vitamin D सिर्फ एक विटामिन नहीं बल्कि एक हार्मोन की तरह भी काम करता है, जो शरीर के कई जरूरी फंक्शन्स को कंट्रोल करता है। यही वजह है कि इसकी कमी को हल्के में नहीं लेना चाहिए।

 

क्या सच में सिर्फ धूप से मिल सकता है Vitamin D?

डॉक्टरों का कहना है कि धूप Vitamin D का सबसे नेचुरल और बड़ा सोर्स है, लेकिन सिर्फ धूप पर पूरी तरह निर्भर रहना हमेशा संभव नहीं होता। जब हमारी त्वचा सूर्य की UVB किरणों के संपर्क में आती है, तब शरीर खुद Vitamin D बनाता है। लेकिन यहां कई फैक्टर काम करते हैं जैसे समय, मौसम, स्किन टोन, उम्र और शहर का प्रदूषण। उदाहरण के तौर पर सुबह की हल्की धूप Vitamin D बनाने में मदद करती है, लेकिन बहुत तेज या बहुत कम धूप का असर अलग हो सकता है। इसी वजह से सिर्फ धूप को 100% भरोसेमंद सोर्स नहीं माना जा सकता।

 

कितनी धूप लेना जरूरी है?

डॉक्टरों के अनुसार आम तौर पर रोजाना 15 से 30 मिनट तक की धूप शरीर के लिए काफी मानी जाती है, खासकर सुबह 8 बजे से 11 बजे के बीच। इस समय UVB किरणें सही मात्रा में होती हैं, जो Vitamin D बनाने में मदद करती हैं। लेकिन अगर किसी व्यक्ति की स्किन डार्क है, या वह पूरे दिन घर या ऑफिस में रहता है, तो उसे ज्यादा समय तक धूप में रहने की जरूरत पड़ सकती है। वहीं सर्दियों में या प्रदूषण वाले इलाकों में यह प्रक्रिया और धीमी हो जाती है।

 

सिर्फ धूप से क्यों नहीं पूरी होती जरूरत?

आज की लाइफस्टाइल में लोग ज्यादातर समय इनडोर रहते हैं। ऑफिस, स्कूल और घर के अंदर रहने से शरीर को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती। इसके अलावा कपड़ों से ज्यादा शरीर ढका होने या सनस्क्रीन लगाने से भी UVB किरणें त्वचा तक नहीं पहुंच पातीं। इसी वजह से सिर्फ धूप से Vitamin D की कमी पूरी करना कई लोगों के लिए मुश्किल हो जाता है। डॉक्टर कहते हैं कि भारत जैसे देश में धूप भरपूर है, फिर भी Vitamin D की कमी बहुत आम है, और इसका कारण हमारी लाइफस्टाइल ही है।

 

डाइट में क्या शामिल करें?

Vitamin D सिर्फ धूप से ही नहीं बल्कि कुछ फूड आइटम्स से भी मिलता है। फैटी फिश जैसे सैल्मन, टूना और मैकेरल इसमें काफी अच्छे सोर्स माने जाते हैं। इसके अलावा अंडे की जर्दी, फोर्टिफाइड दूध और मशरूम भी Vitamin D देने में मदद करते हैं। हालांकि डाइट से मिलने वाला Vitamin D भी सीमित मात्रा में होता है, इसलिए ज्यादातर मामलों में यह अकेले पर्याप्त नहीं होता। इसलिए डॉक्टर अक्सर धूप और डाइट दोनों को मिलाकर बैलेंस बनाने की सलाह देते हैं।

 

Vitamin D की कमी के लक्षण क्या हैं?

Vitamin D की कमी धीरे-धीरे शरीर में असर दिखाती है। शुरुआत में हल्की थकान, कमजोरी और मूड स्विंग जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं। धीरे-धीरे हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी और इम्यून सिस्टम कमजोर होने जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं। कई लोगों को बार-बार बीमार पड़ने की समस्या भी Vitamin D की कमी से जुड़ी हो सकती है। अगर लंबे समय तक यह कमी बनी रहे तो यह हड्डियों की गंभीर बीमारियों का कारण भी बन सकती है।

 

कौन लोग ज्यादा रिस्क में हैं?

कुछ लोग Vitamin D की कमी के ज्यादा शिकार होते हैं। इनमें ऑफिस में लंबे समय तक काम करने वाले लोग, बुजुर्ग, छोटे बच्चे और वे लोग शामिल हैं जो धूप में कम निकलते हैं। इसके अलावा जिन लोगों की स्किन टोन डार्क होती है, उनमें भी Vitamin D बनने की प्रक्रिया थोड़ी धीमी होती है। गर्भवती महिलाओं में भी Vitamin D की जरूरत ज्यादा होती है, इसलिए उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार सप्लीमेंट्स लेने पड़ सकते हैं।

 

सप्लीमेंट्स कब जरूरी हो जाते हैं?

जब शरीर में Vitamin D की कमी बहुत ज्यादा हो जाती है, तब डॉक्टर सप्लीमेंट्स लेने की सलाह देते हैं। यह टैबलेट या ड्रॉप्स के रूप में हो सकता है। लेकिन इसे बिना डॉक्टर की सलाह के लेना सही नहीं माना जाता क्योंकि इसकी ज्यादा मात्रा भी नुकसान कर सकती है। डॉक्टर पहले ब्लड टेस्ट करवाकर Vitamin D का लेवल चेक करते हैं और फिर उसी के आधार पर इलाज तय करते हैं।

 

रोजमर्रा की जिंदगी में क्या बदलाव जरूरी हैं?

अगर कोई व्यक्ति चाहता है कि उसे Vitamin D की कमी न हो, तो उसे अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करने चाहिए। जैसे रोज कुछ समय धूप में बैठना, फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाना और हेल्दी डाइट लेना। इसके अलावा लगातार अंदर रहने की आदत कम करनी चाहिए और कोशिश करनी चाहिए कि शरीर को नेचुरल धूप मिल सके। ये छोटे बदलाव लंबे समय में बड़ा असर डालते हैं।

 

हमारी राय

Vitamin D को लेकर सबसे बड़ी गलती यही होती है कि लोग सोचते हैं कि सिर्फ धूप से ही सब कुछ पूरा हो जाएगा। सच यह है कि धूप सबसे जरूरी और नेचुरल सोर्स जरूर है, लेकिन आज की लाइफस्टाइल में यह काफी नहीं होता। अगर सही समय पर थोड़ी धूप ली जाए, साथ में बैलेंस डाइट ली जाए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स लिए जाएं, तो Vitamin D की कमी से बचा जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि इसे नजरअंदाज न किया जाए क्योंकि यह छोटी दिखने वाली समस्या आगे चलकर बड़ी हेल्थ प्रॉब्लम बन सकती है।

 

 

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। The Headlines हिंदी अपने पाठकों को हेल्थ, डाइट और फिटनेस से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने डॉक्टरों से सलाह लेने का सुझाव देता है।