भारत में चावल करोड़ों लोगों की थाली का अहम हिस्सा है। दोपहर का खाना हो या रात का भोजन, बिना चावल के कई लोगों का पेट ही नहीं भरता। लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, खासकर 40 साल के बाद, अक्सर यह सलाह सुनने को मिलती है कि चावल कम खाओ, वरना वजन बढ़ेगा, शुगर बढ़ेगी और कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो जाएंगी।

यही वजह है कि 40 की उम्र पार करते ही बहुत से लोग अपनी डाइट से चावल लगभग पूरी तरह हटा देते हैं। कुछ लोग सिर्फ रोटी खाना शुरू कर देते हैं, तो कुछ लोग कार्बोहाइड्रेट से ही दूरी बनाने लगते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई 40 साल के बाद चावल कम करना जरूरी है? और अगर हां, तो कितना कम करना चाहिए? स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस सवाल का जवाब उतना आसान नहीं है जितना अक्सर सोशल मीडिया या घरेलू सलाहों में बताया जाता है।

 

क्या 40 की उम्र के बाद शरीर में बदलाव आने लगते हैं?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक 40 साल की उम्र के बाद शरीर का मेटाबॉलिज्म पहले की तुलना में थोड़ा धीमा होने लगता है। यानी शरीर कैलोरी को पहले जितनी तेजी से नहीं जलाता। इसके अलावा मांसपेशियों का द्रव्यमान भी धीरे-धीरे कम होने लगता है और शरीर में फैट जमा होने की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है कि इस उम्र के बाद पहले जैसी डाइट खाने पर वजन बढ़ने लगता है। कई लोगों में ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सारी परेशानी की जड़ सिर्फ चावल है।

 

क्या चावल छोड़ देना ही समाधान है?

कई लोग मानते हैं कि चावल मोटापा बढ़ाने का सबसे बड़ा कारण है। जबकि पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि किसी एक खाद्य पदार्थ को दोष देना सही नहीं है। असल समस्या तब होती है जब व्यक्ति जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेने लगता है और शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है।

अगर कोई व्यक्ति दिनभर बैठकर काम करता है, व्यायाम नहीं करता और जरूरत से ज्यादा खाना खाता है, तो सिर्फ चावल छोड़ देने से बहुत बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा। दूसरी तरफ अगर कोई संतुलित मात्रा में चावल खाता है और सक्रिय जीवनशैली अपनाता है, तो उसे चावल से डरने की जरूरत नहीं है।

 

चावल शरीर को क्या फायदे देता है?

चावल कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत माना जाता है। यह शरीर को ऊर्जा देने का काम करता है। खासकर भारत जैसे देश में जहां बड़ी आबादी मेहनत वाला काम करती है, वहां चावल लंबे समय से मुख्य भोजन का हिस्सा रहा है।

इसके अलावा चावल आसानी से पच भी जाता है। कई लोगों को रोटी की तुलना में चावल खाने के बाद पेट हल्का महसूस होता है। बीमार व्यक्ति या पाचन संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों को भी अक्सर चावल खाने की सलाह दी जाती है। यानी चावल कोई दुश्मन नहीं है। समस्या तब शुरू होती है जब इसकी मात्रा जरूरत से ज्यादा हो जाती है या इसके साथ संतुलित पोषण नहीं लिया जाता।

 

40 के बाद कितनी मात्रा में चावल खाना सही है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि 40 साल के बाद चावल की मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है, लेकिन इसे पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है। अगर आपकी शारीरिक गतिविधि कम है तो एक बार में बहुत ज्यादा चावल खाने से बचना चाहिए।

उदाहरण के लिए, पहले जहां कोई व्यक्ति दो या तीन बड़ी प्लेट चावल खाता था, वहीं अब उसे मात्रा थोड़ी नियंत्रित करनी चाहिए। इसके साथ दाल, हरी सब्जियां, सलाद और प्रोटीन वाली चीजों को भी भोजन में शामिल करना चाहिए। इससे पेट भी भरेगा और पोषण भी बेहतर मिलेगा।

 

सफेद चावल या ब्राउन राइस, कौन बेहतर?

आजकल ब्राउन राइस को लेकर काफी चर्चा होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्राउन राइस में फाइबर ज्यादा होता है, जिससे पेट देर तक भरा रहता है और ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ती।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि सफेद चावल बिल्कुल खराब है। अगर आप संतुलित मात्रा में सफेद चावल खाते हैं और बाकी डाइट अच्छी रखते हैं तो यह भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक नहीं माना जाता। कई लोगों के लिए ब्राउन राइस पचाना भी मुश्किल हो सकता है, इसलिए अपनी जरूरत और शरीर के अनुसार चुनाव करना चाहिए।

 

चावल खाने का सही तरीका क्या है?

सिर्फ चावल खाना और उसके साथ कोई दूसरी पौष्टिक चीज न लेना सही तरीका नहीं माना जाता। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि चावल के साथ दाल, दही, सब्जियां, सलाद और प्रोटीन वाली चीजें जरूर खानी चाहिए।

जब भोजन में फाइबर और प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है तो ब्लड शुगर धीरे-धीरे बढ़ती है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है। इससे बार-बार भूख लगने की समस्या भी कम हो सकती है। इसके अलावा रात में बहुत ज्यादा चावल खाने से बचना भी फायदेमंद माना जाता है, खासकर उन लोगों के लिए जो कम शारीरिक गतिविधि करते हैं।

 

पूरी जीवनशैली पर ध्यान देना जरूरी

40 साल की उम्र के बाद स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए सिर्फ खाने पर ध्यान देना काफी नहीं है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित रखना भी उतना ही जरूरी है।

अगर कोई व्यक्ति रोजाना टहलता है, हल्का व्यायाम करता है और संतुलित भोजन लेता है तो वह लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है। वहीं सिर्फ चावल छोड़कर बाकी गलत आदतें जारी रखने से कोई बड़ा फायदा नहीं मिलने वाला।

 

किन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए?

अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज, मोटापा, फैटी लिवर या हृदय रोग जैसी समस्याएं हैं, तो उसे अपनी डाइट को लेकर डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह जरूर लेनी चाहिए। ऐसे लोगों के लिए चावल की मात्रा, खाने का समय और चावल का प्रकार भी महत्वपूर्ण हो सकता है। हर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है, इसलिए एक ही नियम सभी पर लागू नहीं होता।

 

हमारी राय

40 साल की उम्र के बाद चावल को पूरी तरह छोड़ देना कोई जरूरी नियम नहीं है। असली जरूरत संतुलन बनाने की है। अगर आप सीमित मात्रा में चावल खाते हैं, उसके साथ पर्याप्त प्रोटीन और सब्जियां लेते हैं और नियमित शारीरिक गतिविधि करते हैं, तो चावल आपकी डाइट का हिस्सा बना रह सकता है। उम्र बढ़ने के साथ समझदारी सिर्फ खाने की चीजें छोड़ने में नहीं, बल्कि उन्हें सही मात्रा और सही तरीके से खाने में है। इसलिए चावल से डरने के बजाय अपनी पूरी जीवनशैली को संतुलित बनाने पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।

 

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए। The Headlines हिंदी अपने पाठकों को हेल्थ, डाइट और फिटनेस से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने डॉक्टरों से सलाह लेने का सुझाव देता है।