Strait of Hormuz Importance: अमेरिका और इजरायल ने जब से ईरान पर हमले किए हैं तब से पूरी दुनिया की नजर एक ऐसी जगह पर टिकी है जिसका नाम शायद पहले ज्यादा लोगों ने नहीं सुना था। यह जगह है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज। यह एक संकरा समुद्री रास्ता है जो देखने में भले ही छोटा लगे लेकिन इसकी अहमियत इतनी बड़ी है कि अगर यह बंद हो जाए तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल सकती है। तेल के दाम आसमान छू सकते हैं और कई देशों में ऊर्जा का संकट खड़ा हो सकता है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच यह जलमार्ग एक बार फिर सुर्खियों में है और दुनिया भर के देश यह देखने की कोशिश कर रहे हैं कि आगे क्या होगा।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान पहले भी कई बार धमकी दे चुका है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह इस रास्ते को बंद कर देगा। अब जब हमला हो चुका है तो यह सवाल और भी बड़ा हो गया है कि क्या ईरान सच में यह कदम उठाएगा और अगर उठाया तो दुनिया पर इसका क्या असर पड़ेगा।
Strait of Hormuz Importance: क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और कहां है यह?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक संकरा समुद्री रास्ता है जो तेल से भरपूर फारस की खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ता है। यह ईरान और ओमान के मुसंदम इलाके के बीच में पड़ता है। इसकी चौड़ाई करीब 50 किलोमीटर यानी 30 मील के आसपास है और कुछ जगहों पर इसकी गहराई 60 मीटर यानी 200 फीट से भी कम है।
इतना संकरा और कम गहरा होने की वजह से यह जलमार्ग किसी भी सैन्य तनाव या हमले के वक्त बहुत जल्दी प्रभावित हो सकता है। इस रास्ते पर कई अहम द्वीप भी हैं जिनमें ईरान के होर्मुज, केशम और लारक शामिल हैं। इसके अलावा ग्रेटर तुनब, लेसर तुनब और अबू मूसा जैसे विवादित द्वीप भी यहीं हैं जो 1971 से ईरान के कब्जे में हैं। इन द्वीपों की वजह से ईरान की इस पूरे इलाके में बहुत मजबूत पकड़ है और इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर उसकी नजर हमेशा रहती है।
दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल यहीं से गुजरता है
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की असली ताकत इसमें से गुजरने वाले तेल और गैस की मात्रा है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन यानी EIA ने इसे दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक बताया है। हर रोज इस रास्ते से करीब 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता है जो दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा है। इतना ही नहीं, दुनिया के कुल LNG यानी तरल प्राकृतिक गैस के व्यापार का भी करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर जाता है। यह गैस मुख्य रूप से कतर से आती है।
इस रास्ते से गुजरने वाले 80 फीसदी से ज्यादा तेल और गैस के जहाज एशियाई देशों की तरफ जाते हैं। इनमें चीन सबसे बड़ा खरीदार है जो ईरान के तेल निर्यात का 90 फीसदी से ज्यादा खरीदता है। भारत, जापान और दक्षिण कोरिया भी इस रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल और गैस मंगाते हैं।
एक बड़ा सवाल यह भी उठता है कि क्या इस रास्ते का कोई विकल्प है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के पास कुछ वैकल्पिक पाइपलाइन रास्ते हैं लेकिन उनकी कुल क्षमता मिलाकर भी सिर्फ करीब 26 लाख बैरल प्रति दिन है। यह होर्मुज से गुजरने वाले कुल तेल के मुकाबले बहुत कम है। यानी अगर होर्मुज बंद हो गया तो उसकी भरपाई करना लगभग नामुमकिन है।
Strait of Hormuz Importance: ईरान की धमकी और होर्मुज कार्ड का खेल
ईरान बहुत लंबे समय से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को एक दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल करता आया है। जब भी उस पर कोई दबाव आया या उसके खिलाफ कोई कार्रवाई हुई, उसने इस रास्ते को बंद करने की धमकी दी। इस साल जनवरी में भी ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के एक बड़े कमांडर ने साफ शब्दों में कहा था कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो तेहरान इस जलमार्ग को बंद करने पर विचार कर सकता है।
लेकिन एक दिलचस्प बात यह है कि इतनी बार धमकी देने के बाद भी ईरान ने आज तक होर्मुज को पूरी तरह बंद नहीं किया। हां, सैन्य अभ्यासों के दौरान उसने कुछ समय के लिए रास्ता रोका जरूर है और हाल के कुछ सालों में कई जहाजों को जब्त करने या परेशान करने की घटनाएं भी हुई हैं। इस पूरे इलाके में समुद्री ऑपरेशन ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर यानी IRGC देखती है जो ईरान की असममित यानी गैर-पारंपरिक समुद्री ताकत को संभालती है।
अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद क्या बदला?
28 फरवरी और 1 मार्च 2026 को अमेरिका और इजरायल ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और ऑपरेशन रोअरिंग लायन के तहत ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर बड़े हमले किए। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई और कई बड़े सैन्य अधिकारियों के मारे जाने की खबर आई। जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए।
इन हमलों के बाद से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर दुनिया भर में चिंता और बढ़ गई है। तेल के दाम पहले ही बढ़ने लगे हैं और दुनिया के बड़े बाजारों में हलचल देखी जा रही है। एशियाई देश जो इस रास्ते पर सबसे ज्यादा निर्भर हैं, वे बेहद सतर्क हैं। भारत भी इस स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है क्योंकि हम अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी इलाके से मंगाते हैं।
होर्मुज का इतिहास भी बताता है कि यह इलाका हमेशा से तनाव की जड़ रहा है। 1973 में जब अरब तेल उत्पादकों ने इजरायल के पश्चिमी समर्थकों पर प्रतिबंध लगाया था तब भी इस रास्ते की अहमियत पूरी दुनिया को समझ में आई थी। उसके बाद से कई बार यह जलमार्ग किसी न किसी संकट के केंद्र में रहा है। आज जब मध्य पूर्व में एक बार फिर जंग जैसे हालात बन गए हैं तो होर्मुज की अहमियत और भी बड़ी हो गई है। यह सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं है, यह दुनिया की ऊर्जा जरूरतों की एक बेहद नाजुक नस है और इस नस पर अभी सबसे ज्यादा दबाव है।









